

रमजान सब्र रहमत और बरकत का महीना है – मौलाना शादाब रजा
बिसौली। इस्लाम धर्म में रमजान को सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। इसे इबादत, संयम और आत्म अनुशासन का महीना कहा जाता है। इस पूरे महीने में मुसलमान अल्लाह की खास इबादत करते हैं और अपने व्यवहार खान-पान व जीवन शैली में सादगी अपनाते है। इस दौरान मौलाना शादाब रजा उवैसी ने अपनी तकरीर में कहा कि रमजान का पहला अशरा रहमत का होता है और इन दिनों में अल्लाह की रहमतें बंदों पर बारिश की तरह बरसती हैं। रोजा सिर्फ भूखे प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि इंसान की आंख, कान, जुबान और दिल का भी रोजा होना चाहिए। रोजे के दौरान बुराई से बचना, गलत निगाहों से परहेज करना और अच्छे कामों में लगना ही असली इबादत है। मौलाना उबैसी साहब ने कहा कि रमजान सब्र, रहमत और बरकत का महीना है और सब्र करने वालों के लिए जन्नत का वादा किया गया है। उन्होंने कहा कि पहला अशरा रहमत का, दूसरा मगफिरत का और तीसरा जहन्नम से निजात का होता है। मौलाना शादाब रजा उवैसी ने कहा कि रोजा एक इबादत है। जिसमें अल्लाह रब्बुल इज्जत अपने बंदों से इस मुबारक महीने में गरीबों, जरूरतमंदों, यतीमों और असहायों का ख्याल रखने की हिदायत करता है। मौलाना ने कहा कि रमजान के महीने का एक-एक लम्हा कीमती होता है। इसमें जितनी इबादत की जाए उतनी कम है। क्योंकि अल्लाह अपने बंदों पर खास रहमत नाजिल करता है और छोटे-छोटे नेक कामों का भी बड़ा सवाब देता है, इसलिए हर मुसलमान को इन दिनों में ज्यादा से ज्यादा इबादत करनी चाहिए। अल्लाह ताला हम पर रहमतों का साया इनायत फरमाए।







