
मुरादाबाद के रतनपुर कला में पिछले करीब 40 सालोंसे बंद पड़े जैन मंदिर को लेकर टीएमयू के चांसलरसुरेश जैन ने कहा है कि प्रशासन इस मंदिर की जमीनका उपयोग किसी सरकारी कार्य में करे। उन्होंने कहा किमंदिर 4 दशक से बंद हैं। मंदिर की मूर्तियां दूसरे मंदिरोंमें भेज दी गई थीं। गांव में अब जैन समाज का कोईपरिवार नहीं रहता है, इसलिए इस मंदिर के जी्णोद्धारकी जरूरत नहीं है।
सुरेश जैन ने इस जैन मंदिर के इतिहास के बारे मेंमीडिया से जानकारी साझा की। उन्होंने बताया किबिलारी तहसील के गांव रतनपुर कला में करीब 40साल पहले तक जैन धर्मावलम्बियों के 10 परिवार रहतेथे। इनमें से कुछ व्यवसायी और कुछ किसान थे। लेकिनधीरे-धीरे सभी यहां से पलायन कर गए। ये परिवार अबदेश के अलग-अलग हिस्सों में बसे हैं। 1985 में हुई एकडकैती की घटना के बाद जैन समाज के लोगों ने गांव सेपलायन कर दिया था।सुरेश जैन ने मीडिया को बताया कि इसी गांव में जयकुमार जैन वैद्य थे। उनके दो बेटे थे, आनंद कुमार जैनऔर जिनेन्दर कुमार जैन। ये परिवार कलकत्ता शिफ्ट होगया। उनका वहीं पर बिजनेस है। सुरेश जैन ने कहा किउनके फूफा बृज रतन लाल जैन और अर्जुन लाल जैनभी रतनपुर कला में रहते थे। बृजरतनलाल जैन के छोटेभाई अर्जुन लाल जैन गांव में ही रहते थे। वर्ष 1985 मेंइनके यहाँ डकैती हुई थी। डकैत उनके घर में रखा कैश,ज्वैलरी और दूसरी कीमती चीजें लूट ले गए थे। विरोधकरने पर परिवार के लोगों को बेरहमी से मारा-पीटाथा। डकैती की इस घटना के बाद रतनपुर कला से जैनसमुदाय के सभी परिवार पलायन कर गए।इनमें से कुछ मुरादाबाद, फ़रीदाबाद, कलकत्ता, गुडगांवऔर गाज़ियाबाद शिफ्ट हो गए थे। तब से रतनपुर कलाका प्राचीन जैन मंदिर बंद पड़ा है। संभल की घटना केबाद पूरे प्रदेश में जगह-जगह प्राचीन मंदिर ढूंढे जा रहेहै। ऐसे में रतनपुर कला गांव में प्राचीन जैन मंदिर भीसामने आया था। ये मंदिर अब खंडरनुमा स्थिति में है।मंदिर के आसपास परिसर में कूड़ाघर बन चुका है। इसमंदिर के जीर्णोद्धार की मांग उठ रही है। इस मामले मेंसुरेश जैन ने शुक्रवार को मीडिया को एक बयान दिया।उन्होंने कहा कि रतनपुर कला के प्राचीन जैन मंदिर। उन्होंने कहा कि रतनपुर कला के प्राचीन जैन मंदिर मेंभगवान की जो प्रतिमाएं थीं वो दूसरे मंदिरों में भेज दीगई थीं। मंदिर में भगवान आदिनाथ की एक मूल प्रतिमावर्ष 1985 में ही मझोला, मुरदाबाद मंदिर में आ गई थी।बाकी बची प्रतिमाएं भी पूजा के सामान सहित उसी वर्षहल्द्वानी, जैन मंदिर में दे दी गयी थीं। उसके बाद मंदिरमें भगवान की कोई प्रतिमा शेष नहीं थी।
सुरेश जैन ने कहा कि अब गांव में कोई जैन परिवार नहींहै। इसलिए जैन समाज 4 दशक से बंद पड़े जैन मंदिरका जीर्णोद्धवार नहीं चाहता। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेशसरकार और प्रशासन इस मंदिर को अपने कब्जे में लेले और यहां डिस्पेंसरी या लाइब्रेरी बना दी जाए या फिरकोई दूसरा सरकारी उपयोग किया जाए।






