
*भूकंप के झटके से हिला MP... सिंगरोली में 10 किमी नीचे था केंद्र, लोग डरे*
*भूकंप के झटके से हिला MP... सिंगरोली में 10 किमी नीचे था केंद्र, लोग डरे*
प्रेस विज्ञप्ति
सिंगरौली जिला, मध्यप्रदेश
*भूकंप के झटके से हिला MP… सिंगरोली में 10 किमी नीचे था केंद्र, लोग डरे*
सिंगरोली। सिंगरौली 27 मार्च गुरुवार की दोपहर करीब 3:07 पर भूकंप के झटके से सिंगरौली अंचल की धरती हिलने लगी। भूकंप की तीव्रता 3. 5 रही है । हालांकि इसमें किसी प्रकार की जानमाल के हानि नहीं हुई है। डेढ़ महीने के दौरान सिंगरौली जिले में यह दूसरा भूकंप का झटका है। जानकारी के अनुसार आज दिन गुरुवार को हल्के दर्जे का भूकंप आया। भूकंप का केंद्र सिंगरौली क्षेत्र था। गनीमत रही कि इसकी तीव्रता काफी कम थी, जिसकी वजह से कहीं जान-माल के नुकसान की आशंका नहीं है। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 3.5 थी। आज गुरुवार को 3 बजकर 7 मिनट पर भूकंप का यह झटका महसूस किया गया। भूकंप का केंद्र जमीन में 10 किलोमीटर नीचे था।
सिंगरौली और आसपास के जिलों (सिद्धि के साथ-साथ पड़ोसी राज्य सोनभद्र और मिर्जापुर छत्तीसगढ़ प्रांत के जिले) में काफी लोगों ने भूकंप के झटके को महसूस किया। लोग तुरंत घरों से बाहर निकल आए।
*प्रशासन नहीं मिली नुकसान की सूचना*
इस मामले में जिला प्रशासन बेखबर रहा। प्रशासन को कहीं से किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। रिक्टर स्केल पर 3-7 तीव्रता वाले भूकंपों को हल्के दर्जे में गिना जाता है। इतनी तीव्रता के भूकंप में नुकसान की आशंका ना के बराबर होती है।
यहां बताते चले कि करीब 38 दिन पूर्व यानी 17 फरवरी की सुबह 8:02 पर सिंगरौली अंचल के पूर्वोत्तर क्षेत्र में भूकंप का झटका आया था। उसकी तीव्रता 4.00 रिक्टर स्केल गहराई 261 किलोमीटर थी। इस दौरान भी किसी प्रकार की जर माल की हानि नहीं हुई थी।
*भूकंप आने का कारण*
भूकंप पृथ्वी की सतह पर स्थित टेक्टोनिक प्लेटों के आपसी टकराव और हलचल के कारण आते हैं। पृथ्वी की बाहरी परत, जिसे क्रस्ट कहा जाता है, कई टेक्टोनिक प्लेटों में विभाजित है। इन प्लेटों के आपस में टकराने, खिसकने या एक-दूसरे से दूर जाने पर ऊर्जा का विस्फोट होता है, जिससे भूकंप आता है।
*भूकंपीय ऊर्जा का संचार*
जब प्लेटों के बीच दबाव बनता है और वह अचानक टूटती हैं, तो भूमिगत ऊर्जा को बाहर निकालती हैं, जिसे भूकंपीय तरंगों के रूप में महसूस किया जाता है। यह तरंगें पृथ्वी की सतह तक पहुंचने पर भूकंप के झटके महसूस होते हैं।
*प्राकृतिक और मानवजनित कारण*
प्राकृतिक कारणों के अलावा, मानवजनित गतिविधियाँ जैसे खनन, जलाशय निर्माण और बड़े निर्माण कार्य भी भूकंप का कारण बन सकते हैं।
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