
🏗️ सहारनपुर विकास प्राधिकरण (SDA) के भ्रष्ट कारनामे का खुलासा — आवासीय मानचित्र पर कराया गया छह वाणिज्यिक निर्माण, मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत से खुली पोल
👉 अवर अभियंता शोएब आलम पर आरोप — जोन 12 हिरन मारान क्षेत्र में आवास के नाम पर खड़े कर दिए वाणिज्यिक कॉम्प्लेक्स
👉 मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के जवाब ने किया खुलासा — “विज्ञप्ति प्रकाशन प्रक्रिया में” बताकर टाल दिया मामला
रिपोर्ट – एलिक सिंह, ब्यूरो चीफ
(दैनिक आशंका बुलेटिन / वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़)
📍सहारनपुर
सहारनपुर।
सहारनपुर विकास प्राधिकरण (SDA) के भीतर फैले भ्रष्टाचार का एक और बड़ा मामला उजागर हुआ है। अवर अभियंता शोएब आलम पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने आवासीय मानचित्र की स्वीकृति के बाद मौके पर तीन मंजिला छह वाणिज्यिक निर्माण करा दिए।
यह मामला जोन 12 के हिरन मारान क्षेत्र का बताया जा रहा है। जहाँ विकास प्राधिकरण द्वारा मूल रूप से एक आवासीय भवन का मानचित्र स्वीकृत किया गया था। लेकिन मौके पर उसी भूमि पर दुकानें, शोरूम और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान खड़े कर दिए गए।
इस गंभीर अनियमितता की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज कराई गई, जिसके बाद जो जवाब सामने आया, उसने पूरे प्रकरण में SDA की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया।
📋 मुख्यमंत्री पोर्टल पर चौंकाने वाला जवाब
शिकायत के जवाब में सहारनपुर विकास प्राधिकरण ने कहा कि,
“प्रश्नगत स्थल का पूर्व में आवासीय मानचित्र स्वीकृत था। स्वीकृत मानचित्र के विरुद्ध वाणिज्यिक निर्माण किए जाने के कारण चालानी कार्यवाही की गई है। प्रतिवादी की ओर से व्यवसायिक शमन मानचित्र प्रस्तुत किया गया है, जो शमन की प्रक्रिया से पूर्व विज्ञप्ति प्रकाशन की प्रक्रिया में है। अतः शिकायत निक्षेपित होने योग्य है।”
इस जवाब से स्पष्ट है कि बिना वाणिज्यिक मानचित्र स्वीकृति और बिना विज्ञप्ति प्रकाशन के, SDA अधिकारियों ने वाणिज्यिक निर्माण को मौन स्वीकृति दे दी।
🏢 मौके पर चल रहा कारोबार, फिर भी कार्रवाई शून्य
मौके पर मौजूद सूत्रों के अनुसार, हिरन मारान स्थित उक्त निर्माण में एक दुकान में “ग्रोवर होजरी एंड गारमेंट्स” के नाम से व्यवसाय भी शुरू हो चुका है।
इससे साफ जाहिर है कि निर्माण केवल पूरा ही नहीं हुआ बल्कि वाणिज्यिक गतिविधियां भी आरंभ हो गई हैं।
आश्चर्य की बात यह है कि स्वयं SDA के जवाब के अनुसार, अब तक वाणिज्यिक मानचित्र की स्वीकृति प्रक्रिया अधूरी है — विज्ञप्ति तक प्रकाशित नहीं हुई है। इसके बावजूद भवन में व्यवसायिक कार्यवाही चल रही है, और विकास प्राधिकरण के अधिकारी मौन बने हुए हैं।
💰 जनता का आरोप — रिश्वतखोरी और सांठगांठ से हुआ निर्माण
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि SDA में भ्रष्टाचार अब खुलेआम हो चुका है।
लोगों का कहना है कि “जहाँ जेबें गर्म हों, वहाँ नियम ताक पर रख दिए जाते हैं।”
आमजन में यह भी चर्चा है कि अवर अभियंता शोएब आलम ने मिलीभगत से यह वाणिज्यिक निर्माण कराए हैं और ऊपर तक इस खेल की जानकारी है।
जनता का कहना है कि पहले भी SDA के अधिकारियों पर रिश्वत कांड सामने आया था, मगर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नतीजतन अब अधिकारी बेधड़क भ्रष्टाचार के नए-नए तरीके निकाल रहे हैं।
📜 कानून के अनुसार गंभीर उल्लंघन
जानकारों के अनुसार, यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 की सुसंगत धाराओं का खुला उल्लंघन है।
इस अधिनियम के अंतर्गत आवासीय भूखंड पर वाणिज्यिक निर्माण पूर्णतः प्रतिबंधित है जब तक कि नियोजन विभाग द्वारा भूमि उपयोग परिवर्तन और वाणिज्यिक मानचित्र स्वीकृत न हो।
यहां न केवल बिना स्वीकृति निर्माण हुआ बल्कि जनता को भ्रमित कर SDA ने खुद ही अपने जवाब में स्वीकार लिया कि निर्माण वाणिज्यिक था।
🧱 “शमन मानचित्र” का दुरुपयोग — भ्रष्टाचार का नया जरिया
SDA के जवाब में प्रयुक्त शब्द “व्यावसायिक शमन मानचित्र” विशेषज्ञों की नजर में बेहद संदिग्ध है।
शमन मानचित्र की प्रक्रिया सामान्यतः उन मामलों में होती है जहाँ निर्माण में मामूली विचलन हुआ हो।
मगर यहाँ मामला तो पूरी इमारत के उद्देश्य बदलने का है — आवास से वाणिज्यिक में।
यह स्थिति सीधे तौर पर कानूनी अपराध और प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है।
😠 जनता में बढ़ता असंतोष
हिरन मारान क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि विकास प्राधिकरण की यह कार्यशैली अब “अंधेर नगरी चौपट राजा” की कहावत को साकार कर रही है।
एक निवासी ने कहा,
“जहाँ पैसा दो, वहाँ नियम बदल जाते हैं। SDA के अधिकारी जनता की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करते, बल्कि उल्टा बिल्डरों और ठेकेदारों से मिलकर आम जनता को परेशान करते हैं।”
लोगों ने मांग की है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इस प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराएं और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें।
📣 जिम्मेदारी तय होनी चाहिए
सवाल यह भी उठता है कि आखिर इस पूरे निर्माण के दौरान
जोन 12 के अवर अभियंता शोएब आलम,
सहायक अभियंता,
मुख्य नगर नियोजक,
और उपाध्यक्ष SDA तक को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी?
अगर जानकारी थी तो यह मौन स्वीकृति क्यों दी गई?
अगर जानकारी नहीं थी, तो यह निरीक्षण और निगरानी की घोर विफलता है।
दोनों ही स्थितियों में जिम्मेदारी तय होना और कार्रवाई होना अनिवार्य है।
🚨 भ्रष्टाचार का “सिस्टम” उजागर
यह मामला सिर्फ एक इमारत या एक अभियंता का नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि SDA जैसे संवेदनशील संस्थानों में भ्रष्टाचार का तंत्र व्यवस्थित रूप से काम कर रहा है।
जहाँ नियमों को शमन और चालान की प्रक्रिया में उलझाकर वास्तविक अपराध को कागज़ी कार्रवाई के पीछे छिपा दिया जाता है।
🗣️ जनता की अपील
क्षेत्रीय जनता ने शासन से मांग की है कि –
इस पूरे प्रकरण की भ्रष्टाचार निवारक संगठन (Vigilance) या CBI जांच कराई जाए।
जब तक जांच पूरी न हो, संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर निष्पक्ष जांच कराई जाए।
वाणिज्यिक निर्माण को तत्काल सील किया जाए और निर्माणकर्ता के विरुद्ध FIR दर्ज हो।
⚖️ निष्कर्ष
सहारनपुर विकास प्राधिकरण पर भ्रष्टाचार के आरोप पहले भी लग चुके हैं, परंतु इस बार मामला सीधे मुख्यमंत्री पोर्टल से जुड़ा होने के कारण राज्य स्तर पर हलचल मच सकती है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या शासन इस बार सिर्फ जवाब तक सीमित रहेगा या वाकई में कठोर कार्रवाई करेगा।
फिलहाल, यह मामला SDA की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है —
क्या विकास प्राधिकरण विकास कर रहा है या भ्रष्टाचार को बढ़ावा?
रिपोर्ट – एलिक सिंह, ब्यूरो चीफ
दैनिक आशंका बुलेटिन / वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
📍सहारनपुर













