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हिंदू धर्म ग्रंथों में माता लक्ष्मी को धन, वैभव, यश, कीर्ती की देवी के रूप में पूजा जाता है

देवी मां लक्ष्मी के आठ स्वरूपों का वर्णन मिलता है

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सोमवार 20 अक्टूबर 2025-: हिंदू धर्म ग्रंथों में माता लक्ष्मी जी को धन, वैभव, संपत्ति, यश कीर्ती की देवी के रूप में पूजा जाता है। मानते हैं कि लक्ष्मी माता की कृपा के बिना जीवन में समृद्धि संपन्नता नहीं आ सकती । इसलिए माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए उन्हें अलग अलग स्वरूपों में पूजा जाता है। कहतें हैं कि जिन पर देवी लक्ष्मी जी की कृपा होती है वे ऐश्वर्य और वैभव प्राप्त कर लेते हैं। हमारे हिंदू धर्म ग्रंथों में माता लक्ष्मी जी के आठ स्वरूपों का वर्णन मिलता है। जिन्हें अष्टलक्ष्मी कहा जाता है।
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(1)-: आदि लक्ष्मी: श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार आदि लक्ष्मी को लक्षमी जी का पहला स्वरूप माना गया है। इन्हें मूल लक्ष्मी या महालक्ष्मी भी कहा जाता है। हमारे पुराणों में कहा गया है कि मां आदि लक्ष्मी ने ही जगत की उत्पति की है, भगवान श्रीहरि के साथ जगत का संचालन भी करती हैं।
(2)-: धन लक्ष्मी-: हमारे हिंदू धर्म ग्रंथों में देवी मां लक्ष्मी के दूसरे स्वरूप को धनलक्ष्मी भी कहा जाता है। धनलक्ष्मी के हाथ में सीने से भरा हुआ कलश और दूसरे हाथ में कमल पुष्प है। धनलक्ष्मी की पूजा वंदना से व्यक्ति की आर्थिक परेशानी दूर होती है, और ऋण से मुक्ति भी मिलती है। (3)-: धान्य लक्ष्मी-: देवी मां लक्षमी जी का तीसरा स्वरूप धान्य लक्ष्मी का है। धान्य लक्ष्मी जगत में अनाज के रूप में वास करती है। धान्य लक्ष्मी को अन्नपूर्णा का ही एक रूप भी माना जाता है। इनकी पूजा करने से घर में धन धान्य का भंडार भरा रहता है। (4)-: गज लक्ष्मी-: देवी मां लक्ष्मी का चौथा स्वरूप धान्य लक्ष्मी कहा जाता है। धान्य लक्ष्मी गज हाथी पर विराजमान रहती हैं। मान्यता है कि धान्य लक्ष्मी की कृपा से संतान की प्राप्ति होती है (5)-: संतान लक्षमी -: संतान लक्ष्मी को देवी लक्ष्मी जी का पांचवा स्वरूप माना जाथा है। संतान लक्ष्मी के चार हाथ होते हैं। इनके गोद में स्कंद कुमार को बालक के रूप में विराजमान रहतं हैं। मानते है माता अपने भक्तों की रक्षा अपनी संतान की तरह करती हैं। ‘(6)-: वीर लक्ष्मी-: वीर लक्षमी का रूप अपने भक्तो को ओजस, साहस और वीरता के वरदान प्रदान करती हैं। वीर लक्षमी अपने हाथीं मेंतलवार और ढाल अस्त्र शस्त्र धरण करती ह
करथी है (7)-: जय लक्ष्मी-:देशी लक्षी जी का सातवां सवब जय लक्ष्मी के माना जाता है। जय लक्ष्मी की आराधना से भक्तों को जीवन में विजय की प्राप्ति होती है। जय लक्ष्मी यश कीर्ती वैभव सम्मान आदि प्रदान करती है।
(8) विद्या लक्ष्मी-: देवी मां लक्ष्मी का आठवां स्वरूप विद्या लक्ष्मी के होता है। विद्या लक्ष्मी ज्ञान कौशल, कला, प्रदान करती है विद्या लक्ष्मी का स्वरूप ब्रह्माचारिणी के जैसा ही होता है। इनकी साधना से शिक्षा के क्षेत्र में सफलता मिलती है।

अनंतपद्मनाभ

D Anant Padamnabh, village- kanhari, Bpo-Gorakhpur, Teh-Pendra Road,Gaurella, Distt- gpm , Chhattisgarh, 495117,
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