
सागर/वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664* बुंदेलखंड के ज़िला सागर में स्थित है ग्राम ढाना जो पहाड़ी पर बसा एक विकसित कस्बा और इतिहास की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल भी है ।इस इलाके का नाम ढाना संभवत धनाढ्य बस्ती होने के कारण पड़ा ।लगभग 600 वर्ष पहले यहां अहीर राजवंश व हजारी परिवार ने शासन किया । यहां मौजूद गढ़ि का निर्माण सन 1500 के पहले हुआ था। ढाना मूलतः यादवों की गद्दी थी लेकिन राजवंश के पतन के बाद यहां की रियासत सन 1605 में प्रयागराज के एक संपन्न पाठक ब्राह्मण परिवार जो अहीर राजाओं के राजपुरोहित थे उनके मातहत हुई। उन राजपुरोहित परिवार को “हजारी” की पदवी रही। बुंदेला नरेश छत्रसाल महाराज द्वारा पेशवाई में दिए हिस्से को श्रीमंत बाजीराव पेशवा ने ढाना इलाके के हजारी खानदान को 64 हजार अशरफी (सोने की मुहर ) 16 गांव और एक हजार सेना का दायित्व देकर इलाके का राजा बनाया और हजारी की उपाधि अता फरमाई। ढाना की जागीर में कई गांव आते थे जिनमें से कुछ गांव का अस्तित्व खत्म हो चुका है जो केवल अब राजस्व रिकॉर्ड में दिखाई देते हैं। पहले ढाना में केवल कुछ घर थे जो गढ़िया के अंदर थे। रहवासी आस-पास के गांव में रहते थे जो आज ढाना का गांव का मौजा है वह कभी देवरी सगोरिया मोहनपुरा पटना गांव हुआ करता था । जहां प्रसिद्ध पटनेश्वर धाम मंदिर है वहां कभी पटना गांव था इसलिए पटनेश्वर मंदिर का नाम पड़ा। शिवलिंग का कोई इतिहास नहीं है पर मंदिर का निर्माण सन 1724 मैं सागर की शासिका रानी लक्ष्मीबाई ने करवाया था। गढ़ि का कुछ ही अवशेष अब बचा है जो देखरेख के अभाव में खंडहर हो रहा।
मौजूदा अवशेष में राजा बब्बा की बेहेर (बाबड़ी) तालाब, राम दरबार मंदिर, राजाओं की समाधि इत्यादि अवशेष बचे हैं। हजारी घराने में 3 राजा हुए अंतिम राजा लोकप्रिय हुए जिनको राजा बब्बा के नाम से जाना जाता था, इन्होंने सागर के मराठा रियासत के राजाओं का साथ दिया और उनके नेतृत्व में कई युद्ध लड़े। सन 1800 में अंग्रेजी शासन लगने के कारण हजारी घराना कमजोर पड़ा।





