
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती में युवक की संदिग्ध मौत का मामला गहराया, पीड़ित परिवार ने एसपी से लगाई न्याय की गुहार
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- साक्ष्य मौजूद फिर भी ढीली कार्रवाई! बस्ती एसपी की चौखट पर न्याय की गुहार लगाने पहुंचा पीड़ित परिवार
- “आखिर किसके संरक्षण में घूम रहे आरोपी?” सुसाइड नोट के बाद भी बस्ती पुलिस की सुस्ती पर उठे सवाल!
- मौत से पहले बनाया वीडियो, फिर भी खाकी खामोश; बस्ती में निर्मल निषाद मामले ने पकड़ा तूल।
- FIR 107/2026: एक महिला की गिरफ्तारी के बाद रुकी तफ्तीश, मुख्य आरोपी अब भी दे रहे धमकियां।
- बस्ती: संदिग्ध मौत मामले में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से आक्रोश
- सुसाइड नोट और चैटिंग के बाद भी बस्ती में मुख्य आरोपी फरार, सीएम से शिकायत
बस्ती।। उत्तर प्रदेश सरकार की ‘अपराध मुक्त’ और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर जनपद बस्ती में एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। थाना हर्रैया क्षेत्र के ग्राम शंभूपुर में एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। मृतक निर्मल निषाद के परिजनों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताते हुए नामजद आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
इस संबंध में पीड़ित जुगराज निषाद ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) बस्ती को प्रार्थना पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।
सुसाइड नोट और वीडियो चैटिंग के रूप में पुख्ता साक्ष्य मौजूद
पीड़ित परिवार का आरोप है कि निर्मल निषाद को काफी लंबे समय से कुछ दबंगों द्वारा मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। परिजनों ने पुलिस प्रशासन को सौंपे गए साक्ष्यों का हवाला देते हुए बताया कि मौत से पहले मृतक ने एक सुसाइड नोट लिखा था, साथ ही कुछ वीडियो, फोटो और व्हाट्सएप चैटिंग भी छोड़ी है।
”मृतक ने अपने आखिरी लिखित बयान और वीडियो में साफ तौर पर कुछ लोगों को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया है। उसने लगातार मिल रही धमकियों और मारपीट का भी जिक्र किया था। इतने पुख्ता सबूतों के बाद भी पुलिस की ढीली कार्रवाई समझ से परे है।”
— पीड़ित परिवार
शव की स्थिति बयां कर रही जुल्म की दास्तान
घटनाक्रम को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जो सीधे तौर पर हत्या या आत्महत्या के लिए उकसाने की तरफ इशारा करते हैं। परिजनों के अनुसार:
- शव मिलने के समय मृतक के पैरों में चप्पल मौजूद थी।
- उसकी जींस फटी हुई थी।
- शरीर पर स्पष्ट रूप से चोट के निशान दिखाई दे रहे थे।
इन हालातों को देखते हुए मामला पूरी तरह संदिग्ध नजर आ रहा है। परिवार का कहना है कि पुलिस ने महज एक महिला आरोपी को गिरफ्तार कर औपचारिकता पूरी कर ली है, जबकि घटना में शामिल अन्य नामजद आरोपी अब भी खुलेआम घूम रहे हैं।
आखिर किसके संरक्षण में घूम रहे आरोपी?
मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से स्थानीय जनता और पीड़ित परिवार में भारी आक्रोश है। लोग अब सीधे तौर पर सूबे की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि जब सुसाइड नोट, वीडियो बयान और चैटिंग जैसे अकाट्य साक्ष्य मौजूद हैं, तो फिर आखिर किसके राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण में आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और पीड़ित परिवार को लगातार धमकियां दे रहे हैं?
आरोपियों की खुलेआम आवाजाही के कारण पीड़ित परिवार खौफ के साए में जीने को मजबूर है। पूरे घर में डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
मुख्यमंत्री और उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग
पीड़ित जुगराज निषाद ने प्रशासन से मांग की है कि एफआईआर संख्या 107/2026 में दर्ज सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ बिना किसी दबाव के निष्पक्ष विवेचना की जाए और उनकी जल्द से जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए।
इस मामले की लिखित शिकायत मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, डीआईजी रेंज बस्ती समेत अन्य उच्चाधिकारियों को भी स्पीड पोस्ट व ईमेल के माध्यम से भेजी गई है। अब देखना यह होगा कि “अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस” का दावा करने वाला पुलिस प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी तत्परता और संवेदनशीलता से कार्रवाई करता है।









