
शाहपुरा जिला उदय शाहपुरा दरबार अमर शहीद कुं प्रताप सिंह दसवीं सेवा संस्थान और बॉम्बे विचार मंच संस्थान ने मुख्यमंत्री के नाम लिखा
पत्र कैलाश सिंह जाड़ावत और सुरेश चंद्र घुड़सवार ने बताया कि शाहपुरा करीब 390 वर्षों का एक गौरवशाली इतिहास राजस्थान के इतिहास में अंकित है। वीर राजा भरत सिंह, राजा उम्मेद सिंह प्रथम, कुँवर अदोत सिंह कंधार से लेकर दक्षिण भारत तक वीरता का लोहा मनवाया। जिस वजह से राजस्थान को भी जगह मिली। देश की आजादी के लिए शाहपुरा के क्रांतिकारी वीर एक ही परिवार के केसरी सिंह, जोरावर सिंह और प्रताप सिंह 12वें ने अंग्रेज़ों से लोहा लिया था। सं विक्रमवत 1688 पौष शुक्ल दोज, 14 दिसंबर 1631
रविवार को शाहपुरा राज्य की स्थापना हुई। राजस्थान संघ की स्थापना में शाहपुरा की रियासत का महत्वपूर्ण योगदान रहा। यानि 14 अगस्त 1947 को ही राज्य में राजा सुदर्शन देव ने राज्य प्रजामंडल के अध्यक्ष गोकुल लाल असावा को राज्य का इतिहास रच दिया। एक तरफा बीजेपी को वोट दिया,उसे जनता के साथ, सारासर धोखा होगा।
मुख्यमंत्री शाहपुरा जिले की वर्तमान सरकार का निर्णय अनुचित है। इस क्षेत्र के लोगों की जनभावना उग्र होगी। शाहपुरा जिला बना रहे इस निम्नतम लॉजिक प्रस्तुतिकरण से पहले शाहपुरा अलग से रियासत (स्टेट) बनी हुई है।
सभी को रियासतें, सम्मान मिला हुआ है इस लिए, शाहपुरा को भी आज़ादी के 75 वें स्थान पर रहने के बाद ही सही जिला बनाया जाना चाहिए।
देश के एकीकरण में शाहपुरा के राजा सुदर्शन देव ने इमाम सहर्ष सर्व प्रथम सरदार पटेल मठ को लोक तंत्र की अपनी जगह के लिए स्थान दिया था। क्या उनके त्याग और समर्पण के बदले में भाजपा सरकार, जिले का राज्य संगठन? ऐसा तो बहुत ही गलत होगा। देश की आजादी में यही के क्रांतिकारी केसरी सिंह बारहवें परिवार ने अपना अतुलनीय बलिदान दिया था। वह देश कभी भी बर्बाद नहीं हो
पाएगा। एक ही परिवार से 4लोगो ने अपना सर्वस्व बलिदान देश के लिए दिया था। बीजेपी सरकार को उनके बलिदान का मान रखना चाहिए। स्वामी दयानंद सरस्वती ने इसी पर सत्यार्थ प्रकाश ग्रंथ का लेखन शुरू किया था। राजा सहित अनेक लोगों को आर्य समाज में दीक्षित किया गया था।
अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय की मुख्य पृष्टि भी यही है। यहां हर पंचवर्षीय देव महोत्सव लगता है, और “शाहपुरा बाग” हेरिटेंज होटल है, देश विदेश लोग रहते हैं।
आज़ादी के 75 साल बाद पहली बार आश्चर्य सीट होने के कारण कांग्रेस ने विकास के लिए शाहपुरा को जिला बनाया था। फिर भी कांग्रेस हार गयी।
बीजेपी को शाहपुरा, जहाजपुर विधान सभा क्षेत्र में जनता ने विजय बनाया,बावजूद जिला हटाना वर्तमान सरकार के हित में नही रहेगा।जनता की नाराजगी बीजेपी को भारी पड़ेगी।जिला घोषणा के बाद क्षेत्र में बहुत विकास हुआ है।अधिकारी एवं ऑफिस कार्यालयों का खुलना,ज़िला कलेक्टर द्वारा तुरंत जन सुनवाई के साथ त्वरित समाधान करना।लोगो को बहुत पसंद आया है।कार्यालय एवं अधिकारियों
पर पहले ही लाखो रुपया खर्च हो चुका है।जिला निरस्त की स्थिति में लाखो रूपये जो जिले में लगे है।उनका नुकसान होगा। और जनता की नाराजगी झेलनी होगी वो अलग से।जिला टूटने की स्थिति में बीजेपी के कार्यकर्ताओं का हौसला टूट जाएंगा,विरोधी लोग उन्हें बोलने नही देंगे।अगर कांग्रेस सरकार रिपीट होती तो क्या बने जिले वो हटाते ? बिलकुल नहीं, तो फिर बीजेपी ऐसा क्यों कर रही है?बीजेपी
सरकार को आय के स्त्रोत के साथ ही उचित समाधान ढूंढना चाहिए।शाहपुरा क्षेत्र का आय राजस्व के स्त्रोत,आगुचा माइंस,बिजोलिया माइंस,अगर इन्हे पूरा सामिल नही भी करे,तो भी हमारा राजस्व आय का प्रतिशत तय किया उद्योग,रेल, कृषि,पर्यटन एवं कला एवं
संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए।अतः सीएम से आग्रह पूर्वक निवेदन है कि,विकास की गति धीमी होगी, मगर रुकेगी नही, इस लिए मुख्यमंत्री हम आपके अपने है।अपनो पर कुठाराघात न करे।शाहपुरा को जिला यथावत रखते हुए।समस्या समाधान के प्रयत्न करना चाहिए,इसके लिए शाहपुरा क्षेत्र की जनता तन मन धन से आपके साथ है





