

देवरिया। जिलाधिकारी व अधिवक्ता संगठनों के बीच चल रहा विवाद अब प्रदेश स्तर पर पहुंच गया है। अब अधिवक्ता जिलाधिकारी के स्थानांतरण नहीं सस्पेंशन पर अड़े हैं। अधिवक्ता बार कौंसिल के सदस्यों के साथ कचहरी चौराहा पर जामकर प्रदर्शन प्रदर्शन किया।
दीवानी कचहरी से पूर्व अध्यक्ष हरिशंकर सिंह, अरुण कुमार त्रिपाठी व मधुसूदन मिश्र के नेतृत्व में अधिवक्ताओं का प्रदर्शन दीवानी न्यायालय से होते हुए जिलाधिकारी के कार्यालय तक गया। वहां से कचहरी चौराहे पर चक्का जाम कर दिया। बुधवार को भी अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य नहीं किया। इस दौरान जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सिंहासन गिरी, जिला कलक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय कुमार मिश्रा, दी कलक्ट्रेट सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामचीज यादव, मंत्री अजय कुमार उपाध्याय, आनंद किशोर मिश्रा, सदर तहसीलदार के अध्यक्ष युगल किशोर तिवारी, बरहज तहसील बार के अध्यक्ष नागेंद्र सिंह, सुभाष चंद्र राव, सुशील मिश्रा, अशोक दीक्षित, विद्यासागर मिश्र, गिरिजेश दुबे, उपस्थित रहे।
डीएम का स्थानांतरण नहीं, अब सस्पेंशन चाहिए
बार काउंसिल में उठेगा, देवरिया डीएम की करतूत
देवरिया। उत्तर प्रदेश बार कौंसिल का तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बुधवार को बार कौंसिल के अध्यक्ष के निर्देश पर जिलाधिकारी व अधिवक्ताओं के बीच चल रहे विवाद की जांच करने देवरिया पहुंचे। अधिवक्ताओं से मिलने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिलाधिकारी के आचरण की जितनी भी निंदा की जाए। वह कम है। यह मुद्दा बार कौंसिल में गूंजेगा। अधिवक्ताओं को सम्मान चाहिए, यदि सम्मान नहीं मिला तो काम नहीं करेंगे, ऐसे में जिलाधिकारी का स्थानांतरण नहीं सस्पेंशन चाहिए।
उन्होंने कहा कि जनता दरबार में गए अधिवक्ता संगठन के अध्यक्ष के साथ अमर्यादित आचरण जिलाधिकारी जैसे पद पर बैठे हुए व्यक्ति के लिए ठीक नहीं है। उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के सदस्य हरिशंकर सिंह ने कहा कि यदि विधायक और मंत्री डीएम को नहीं हटा सकते तो प्रदेश के अधिवक्ता ऐसे डीएम को हटाकर ही चैन से बैठेंगे । मामले को बार कौंसिल की बैठक में उठाया जाएगा और इसे प्रदेश व्यापी बनाने के लिए पूरे प्रदेश में हड़ताल की जाएगी और लखनऊ में पूरे प्रदेश के अधिवक्ताओं की महापंचायत बुलाकर मुख्यमंत्री का घेराव किया जाएगा।
पूर्व अध्यक्ष अरुण कुमार त्रिपाठी ने कहा कि डीएम सत्ताधारी दल का नौकर नहीं बल्कि संविधान का पालक होता है, ऐसे में विधि के विपरीत आचरण कदापि
बर्दाश्त नहीं होगी। डीएम अधिवक्ताओं की आवाज नहीं दबा सकता है, जो जिलाधिकारी कल तक कुर्सी से उठकर हाथापाई करने को तैयार था वह आज माफी मांगने को कह रहा है। यह कैसा आचरण है ? यदि मान सम्मान के लिए जेल भी जाना पड़े तो अधिवक्ताओं के लिए मैं सबसे पहले जेल जाने को तैयार हूं। बार कौंसिल के सदस्य मधुसूदन त्रिपाठी ने कहा कि आंदोलन को और तेज किया जाए । जब तक हम ताकतवर नहीं होंगे सरकार हमारी तरफ नहीं देखेगी। यदि डीएम कुर्सी से उठकर अमर्यादित आचरण करता है तो उसकी कुर्सी ही पलट देंगे । प्रदेश में हापुड़ कांड की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए प्रदेश अध्यक्ष, मुख्यमंत्री व प्रमुख सचिव से मिलकर जिलाधिकारी को तत्काल हटाए जाने व विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए पहल करेंगे । अध्यक्षता सिंहासन गिरी व संचालन अजय उपाध्याय ने किया।





