सीवान जिला मुख्यालय के महादेवा में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन श्रीराम जन्मोत्सव की कथा का रसपान कथावाचक डाँ रमाशंकर नाथ दास जी महाराज नें कराया।श्री महाराज नें कहा कि भगवान श्रीराम जी व चारो भाइयों का जब जन्म हुआ उस समय की स्थिति मनोरम व दिव्य थी। श्री महाराज नें कहा कि दिन के ठिक बारह बजे राघवेंद्र प्रभु प्रकट हुए ऐसी सुंदर झांकी थी कि आप दर्शन करें। मंद-मंद अस्मित हास्य कर रहे है।।। मुस्कुरा रहे हैं। भगवान् शंख चक्र पदम धारण किए खड़े है माता कैशल्या गदगद हो गई। लेकिन यह बात बाहर किसी के “नही पता।भगवान ने मैया से कहा आप ने मुझसे कहा था की आपके जैसा बेटा चाहिए। इस लिए मैं आपका बेटा बनकर आया है। कौशल्या मैया बोली मैने आपको पुत्र बनकर आने को बोला “था आप तो पिताजी बनकर पधारा है। ये भैख चक्र गदा पदम लेकर क्यों आए हैं ? ऐसा कोई वेटा होता है । राम जी बोले- माता हम तो जहां कही भी पुत्र बनते (लाप हमको पुत्र बोली- ये तो ठिक है हैं ऐसे लेकिन चार ‘हाथ का बेटा, होता है। लोग कहेगे चार हाथ का कैसे हुला मैया के कहने पर रामजी ने दो हाथ हटा दिए दो हाथ के हो गए लौर मझ्या से बोले बाब तो पुत्र हो गया अब तो द्वार खोलिए।मइया बोली- इतना लम्बा, बेटा नही होता पहले छोटे बनिये तभी, द्वार खुलेगा रामजी छोटे हो गए मइया ने कहाँ वस्त्र तो उतारो राम जी ने कहा बहुत परेशान करती हैं आप कभी कहती दो हाथ हटाओ आप कहती छोटे हो जाओ कभी कहती नंगे हो जाओ नंगे काहे का होवें। मैया की बात सुनकर रामजी नंगे हो गए जब छोटे से हो गए तब नंगे होने में क्या लगता है हो गए नंगे । मैया ने पालने में सुला दिया अब तो द्वार खोलो मैया मुझे सब देखना चाहते हैं ।मैया बोली -लाला होता हैं तो रोता है रोओ तो सही भगवान बोले रोने का अभ्यास नहीं। फिर भगवान को रोना भी पड़ा । इस अवसर पर सैकड़ो लोग मौजूद थे।
[yop_poll id="10"]





