
दरभंगा में मस्तिष्क ज्वर की रोकथाम के लिए उच्चस्तरीय बैठक, ‘चमकी को धमकी’ अभियान तेज
दरभंगा, 03 अप्रैल 2025: दरभंगा जिले में मस्तिष्क ज्वर (एईएस/जेई) की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। जिलाधिकारी राजीव रौशन के निर्देशानुसार अपर समाहर्ता (विधि व्यवस्था) राकेश रंजन की अध्यक्षता में जिला समाहरणालय स्थित बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर सभागार में एक महत्वपूर्ण समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला स्तरीय अधिकारी और चिकित्सा पदाधिकारी उपस्थित रहे।
‘चमकी को धमकी’ अभियान के तहत जागरूकता पर जोर
अपर समाहर्ता राकेश रंजन ने कहा कि गर्मी और उमस बढ़ने के साथ ही बच्चों में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) और जापानी इंसेफलाइटिस (JE) का खतरा बढ़ जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
मुख्य निर्देश:
- डीपीओ, आईसीडीएस को निर्देश दिया गया कि सभी सीडीपीओ अपने-अपने प्रखंडों में आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं को प्रशिक्षण दें।
- डीपीएम, जीविका के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षित किया जाएगा, जो अपने क्षेत्र में मस्तिष्क ज्वर से बचाव के लिए जनजागरूकता फैलाएंगे।
- डेडीकेटेड कंट्रोल रूम का गठन किया जाएगा और जागरूकता रथ के माध्यम से प्रचार-प्रसार होगा।
- मुजफ्फरपुर से सटे जाले और सिंहवाड़ा प्रखंड में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में रहेगा।
‘चमकी को धमकी’ अभियान के तीन चरण
- पहली धमकी (खिलाओ) – बच्चों को रात में सोने से पहले भरपेट भोजन और मिठा पदार्थ जरूर दें।
- दूसरी धमकी (जगाओ) – रात में और सुबह उठते समय देखें कि बच्चा बेहोश तो नहीं या उसे चमकी तो नहीं आई।
- तीसरी धमकी (अस्पताल ले जाओ) – चमकी के लक्षण दिखते ही आशा कार्यकर्ता को सूचित कर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं।
मस्तिष्क ज्वर के लक्षण
- तेज बुखार और सिरदर्द
- अर्धचेतना या भ्रम की स्थिति
- शरीर में झटके (चमकी) या लकवा
- हाथ-पैर का अकड़ना
- मानसिक संतुलन में गड़बड़ी
सावधानियां और उपचार
- बच्चों को तेज धूप से बचाएं और दिन में दो बार स्नान कराएं।
- नींबू-पानी या ओआरएस का घोल पिलाएं।
- तेज बुखार होने पर ताजे पानी से शरीर पोछें और पंखा चलाएं।
- चमकी आने पर बच्चे को करवट में लिटाएं और गर्दन सीधी रखें।
- झटके के दौरान बच्चे के मुंह से झाग साफ करें और तेज रोशनी से बचाएं।
क्या न करें
- बच्चों को गर्म कपड़ों में न लपेटें।
- बेहोशी की स्थिति में जबरदस्ती कुछ न खिलाएं।
- बच्चे के इलाज के लिए ओझा-गुणी के पास समय न गंवाएं।
- मरीज के पास शोरगुल न करें।
स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियां
- 104 आपातकालीन नंबर को सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रदर्शित किया गया है।
- 102 एंबुलेंस सेवा सभी पीएचसी में कार्यरत रहेगी।
- एईएस/जेई रोगियों के लिए सभी सीएचसी और पीएचसी में विशेष बेड की व्यवस्था की गई है।
- मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत 94 वाहन टैग किए गए हैं।
- सभी पीएचसी/सीएचसी में एईएस/जेई के लिए आवश्यक दवाएं और उपकरण उपलब्ध हैं।
इस बैठक में सिविल सर्जन डॉ. अरुण कुमार, उप निदेशक जनसंपर्क सत्येंद्र प्रसाद, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार मिश्रा, डीपीओ आईसीडीएस चांदनी सिंह, डीपीएम हेल्थ शैलेश चंद्र सहित कई अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
दरभंगा जिला प्रशासन मस्तिष्क ज्वर की रोकथाम के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। ‘चमकी को धमकी’ अभियान के तहत घर-घर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जिससे इस बीमारी से होने वाली मौतों को रोका जा सके। स्वास्थ्य विभाग, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, जीविका समूह और प्रशासन मिलकर इस अभियान को सफल बनाने में जुट गए हैं।
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