
करोड़ों की लागत से बन रहे इंजीनियरिंग कॉलेज के बोर्ड में झोल
अजीत मिश्रा (खोजी)
यूपी के बस्ती में बन रहे इंजीनियरिंग कॉलेज पर लगा बोर्ड इन दिनों चर्चा में आ गया है. इसकी वजह है इस बोर्ड के नाम में की गए एक गलती, जिसे लेकर लोग कई तरह की बातें बनाने लगे हैं।
करोड़ों की लागत से बन रहे इंजीनियरिंग कॉलेज के बोर्ड में झोल, गलत नाम लिखने पर प्रशासन हो रहा ट्रोल!
बस्ती: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में करोड़ों की लागत से एक अत्याधुनिक इंजीनियरिंग कॉलेज का निर्माण किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य युवाओं को तकनीकी शिक्षा प्रदान कर देश के भविष्य को संवारना है।लेकिन, इस कॉलेज के शुरू होने से पहले ही एक बड़ी गलती सामने आई है।जिसने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। इस कॉलेज के सामने जो बोर्ड लगाया है उसमें ही भाषाई चूक सामने आई है, जिसके बाद लोग इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं कर रहे हैं।
इस कॉलेज का नाम ‘भारत रत्न सरदार वल्लभ भाई पटेल इंजीनियरिंग कॉलेज’ है। नाम तो बेहद सम्मानजनक और प्रेरणादायक है लेकिन, इसके बोर्ड पर नाम को लिखने में ही गलती हो गई है। ये गलती छोटी है लेकिन इसे नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता, ख़ासतौर पर तब जब ये एक शैक्षिक संस्थान पर लगाया गया हो। इससे अधिकारियों के हिंदी ज्ञान और कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
💫कॉलेज के नाम को लिखने में हुई गड़बड़।
दरअसल इस कॉलेज के बोर्ड में बड़े-बड़े शब्दों में राजकीय की जगह ‘राजकिय’ लिख दिया गया है, जिसकी वजह से उनके हिन्दी ज्ञान को लेकर उन्हें ट्रोल किया जा रहा है। जिस संस्थान से भविष्य के इंजीनियर निकलने वाले हैं, उसके नाम में ही हुए इस ‘झोल’ को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। कॉलेज के नाम या उससे संबंधित विवरण में राजकीय शब्द में गलत मात्रा का प्रयोग किया गया, जिसने पूरे मामले को हास्यास्पद बना दिया है। यही नहीं अब CNDS (Construction and Development of New Schemes) के अधिकारियों की हिंदी भाषा पर पकड़ पर भी सवाल उठ रहे हैं ।
इस कॉलेज का निर्माण लगभग आठ करोड़ रुपये की लागत से हुआ है। सरकार का उद्देश्य है कि यह संस्थान स्थानीय युवाओं को गुणवत्तापूर्ण इंजीनियरिंग शिक्षा प्रदान करे और उन्हें रोजगार के योग्य बनाए। ऐसे में ये गलती नजरअंदाज करने लायक नहीं है। ‘भारत रत्न सरदार वल्लभ भाई पटेल इंजीनियरिंग कॉलेज’ का बोर्ड अब सोशल मीडिया और स्थानीय गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। मामला मीडिया में आने के बाद स्थानीय प्रशासन ने गलती सुधारने की बात कही है।

















