
+++++++ नागपुर, मंगलवार 07 अक्टूबर 2025 +++++
उच्चतम न्यायालय ने नागपुर सुधार न्यास को राहत दी है। उच्चतम न्यायालय ने नागपुर के फुटाला झील को आद्रभूमि मानने मना कर दिया है। न्यायालय के इस फैसले से एनआईटी के द्वारा फुटाला झील में अस्थाई संरचनाएं बनाकर शुरू किए गए संगीत फव्वारे तथा अन्य विकास कार्यों का मार्ग खुल गया है। मालूम हो कि नागपुर के गैर सरकारी संगठन स्वच्छ एसोसिएशन ने बाम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ और उसके बाद देश के उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर करते हुए फुटाला झील और उसके आसपास के चल रहे विकास कार्यों को रोकने मांग की थी। एनजीओ स्वच्छ एसोसिएशन ने यह दावा किया था कि फुटाला झील एक आद्रभूमि है और वहां पर विकास कार्य वर्ष 2017 के कानून के अनुसार पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करना है। बाम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने इस याचिका को पहले ही खारिज कर दिया था। अब उच्चतम न्यायालय में लंबी सुनवाई चलने के बाद इस याचिका को खारिज कर दिया है। उच्चतम न्यायालय ने अपने दिए फैसले मे कहा कि नागपुर की फुटाला झील एक प्राकृतिक आद्रभूमि नहीं है यह मानव निर्मित एक झील है। उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद अब फुटाला झील मे प्रस्तावित विकास कार्यों को आगे बढ़ाने मे कोई कानूनी परेशानी नहीं है। अब यहां पर फिर से विकास कार्य शुरू हो सकते है









