
महुली महुअरिया में गूंजा अनमोल गृहस्थी उर्फ “जालिम सास”नाटक का मंचन
शानदार अभिनय ने दर्शकों को किया भावुक, नाटक ने दिया सामाजिक संदेश
महुली में गूंजा अनमोल गृहस्थी उर्फ “जालिम सास” का मंच — शानदार अभिनय ने दर्शकों को किया भावुक, नाटक ने दिया सामाजिक संदेश
संवाददाता_राकेश कुमार कन्नौजिया
विंढमगंज/सोनभद्र। ग्राम पंचायत महुली में चल रहे श्री शंकर झंकार नाट्य कला परिषद के पांचवे दिन शनिवार की रात मंचित नाटक “अनमोल गृहस्थी उर्फ जालिम सास” ने दर्शकों को भावनाओं के सागर में डुबो दिया। हंसी, गुस्सा और आंसुओं के मिश्रण से भरे इस नाटक ने समाज को गहरा संदेश दिया कि “संबंध सम्मान से टिकते हैं, अत्याचार से नहीं।”
पांचवें दिन हुए इस मंचन में कलाकारों के दमदार अभिनय ने दर्शकों का दिल जीत लिया। नाटक की मुख्य पात्र गंगादेई की भूमिका में राजेश शर्मा ने जीवंत प्रदर्शन किया। कहानी एक मध्यमवर्गीय परिवार के संघर्ष, रिश्तों और स्वार्थ के इर्द-गिर्द घूमती है। गंगादेई के परिवार में दो बेटे नारायण और मदन, पुत्रवधू लक्ष्मी, पोता गोपी, और बेटी जमुना हैं।
कहानी का मुख्य मोड़ तब आता है जब सीताराम (भूमिका में नाटक के डायरेक्टर अवधेश शर्मा) अपनी पत्नी जमुना को ससुराल से लेने आता है, लेकिन सास रामदेई उसे घर के कामों में झोंक देती है — झाड़ू लगाना, बर्तन धोना, कपड़े साफ करना आदि। अपनी बेटी की हर शिकायत पर आंख मूंदकर विश्वास करने वाली रामदेई अपने दामाद सीताराम के साथ अन्याय करती है।
सीताराम की सहनशीलता और विनम्रता ने दर्शकों को भावुक कर दिया। नाटक के अंत में जब सच सामने आता है और अन्याय के खिलाफ आवाज उठती है, तो पूरा मंच तालियों से गूंज उठता है।
पूरे नाटक में कलाकारों का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा। सीन मास्टर विक्की शर्मा ने मंच सज्जा को प्रभावशाली बनाया। नाटक की सफलता में शिवदाश शर्मा और महेंद्र पुरी का विशेष योगदान रहा।
कार्यक्रम के दौरान समिति के अध्यक्ष अरविंद जायसवाल, उपाध्यक्ष सेकरार अहमद, प्रबंधक प्रदीप जायसवाल, भगवानदास कन्नौजिया, उदय शर्मा, विनोद कन्नौजिया सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
दर्शक नाटक के अंत तक मंच से बंधे रहे और तालियों की गूंज ने माहौल को जीवंत बनाए रखा। “अनमोल गृहस्थी उर्फ जालिम सास” का यह मंचन कला, संवाद और सामाजिक संदेश का शानदार उदाहरण बन गया।

















