
✨महुली महुअरिया में झूम उठा मंच — “शमा ब परवाना उर्फ शनए मुहब्बत” की दर्दभरी प्रेम कहानी ने दर्शकों को किया भावुक✨
✨महुली महुअरिया में झूम उठा मंच — “शमा ब परवाना उर्फ शनए मुहब्बत” की दर्दभरी प्रेम कहानी ने दर्शकों को किया भावुक✨
संवाददाता _राकेश कुमार कन्नौजिया

विंढमगंज/सोनभद्र। स्थानीय थाना क्षेत्र के महुली महुअरिया टोला में चल रहे श्री शंकर झंकार नाट्यकला मंचन का छठवां एवं अंतिम दिन रविवार की रात भावनाओं और शिक्षा से भरपूर प्रस्तुति के साथ सम्पन्न हुआ।
समापन अवसर पर मंचन का शुभारंभ मुख्य अतिथि उपेंद्र कुमार उर्फ गुड्डू जायसवाल (उद्यमी एवं खनन व्यवसायी, ओबरा) ने फीता काटकर किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में महेश अग्रवाल, मनीष उर्फ पिंकू जायसवाल, रिकु सिंह (ओबरा) उपस्थित रहे।
इस दौरान नथुन सिंह गोंड (सेवानिवृत्त शिक्षक), क्लामुद्दीन सिद्दीकी, दिलीप कन्नौजिया सहित कई गणमान्यजन मंचासीन रहे।
समिति के अध्यक्ष एवं ग्राम प्रधान अरविंद जायसवाल द्वारा सभी कलाकारों को अंगवस्त्र भेंट कर मुख्य अतिथि के करकमलों से सम्मानित कराया गया।
🎤 अतिथियों ने कहा – नाटक समाज का आईना है
- नथुन सिंह गोंड ने कहा — “नाट्यकला सिर्फ मनोरंजन नहीं, यह शिक्षाप्रद साधन है जो हमें जीवन का मूल्य सिखाती है।”
- क्लामुद्दीन सिद्दीकी बोले — “संगीत न रहे तो नाट्यकला की आत्मा अधूरी रह जाती है, संगीत ही इसमें प्राण फूंकता है।”
- मुख्य अतिथि उपेंद्र कुमार उर्फ गुड्डू जायसवाल ने कहा — “नाटक समाज का आईना होता है। इसकी हर घटना से कुछ न कुछ सीख मिलती है जो हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।”
🎭 “शमा ब परवाना उर्फ शनए मुहब्बत” — प्रेम, त्याग और दर्द की दास्तान
अंतिम दिन मंचित यह नाटक लैला-मजनूं और शिरी-फरहाद जैसी अमर प्रेम कहानियों की झलक लिए हुए था।
गरीब युवक असलम और शमा का निष्कपट प्रेम, समाज की बंदिशों से टकराता है और अंत में प्रेम के सर्वोच्च बलिदान पर समाप्त होता है।
जब समाज ने इनके रिश्ते को ठुकराया, तो दोनों ने एक ही पेड़ की डाल पर फांसी लगाकर प्रेम की अमर मिसाल कायम कर दी।
शमा द्वारा छोड़ी गई अंतिम चिट्ठी ने सभी को भावविभोर कर दिया —
“हम आपकी सुहागरात की भरपाई नहीं कर सके,
लेकिन मेरी अंतिम ख्वाहिश है कि हमें एक ही कब्र में दफनाया जाए।”
यह संवाद सुनकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं और पूरा मैदान भावनाओं से भर गया।
👥 मुख्य कलाकारों का दमदार प्रदर्शन
असलम – अवधेश शर्मा
शमा – अंकित शर्मा
अनवर – क्लामुद्दीन
लियाकत (असलम का पिता) – राजेश शर्मा
जहूर खान – समशाद आलम
आयशा – जशवंत शर्मा
गोपाल – नयूम खान
सहायक भूमिकाओं में — जावेद, जादून सिंह आदि कलाकारों ने शानदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया।
🌟 कार्यक्रम में उमड़ा जनसैलाब
इस अवसर पर राजनाथ गोस्वामी, दिलीप कुमार कन्नौजिया, धर्मेंद्र गुप्ता, राकेश कुमार कन्नौजिया,नितेश कुमार, समिति के अध्यक्ष अरविंद जायसवाल, उपाध्यक्ष सेकरार अहमद, प्रबंधक प्रदीप जायसवाल, कोषाध्यक्ष भगवानदास कन्नौजिया सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण दर्शक उपस्थित रहे।
पूरे क्षेत्र में यह नाट्य मंचन चर्चाओं का विषय बना रहा।
🔥 नाट्यकला मंचन का यह समापन प्रेम, त्याग और सामाजिक संदेश से परिपूर्ण रहा — जिसने दर्शकों के हृदय को गहराई तक छू लिया और मंचन को अविस्मरणीय बना दिया।
















