
“नालसा” नई दिल्ली एवं बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार पटना के निर्देशानुसार एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार मदन किशोर कौशिक के दिशानिर्देश में आज जिला विधिक सेवा प्राधिकार एवं बाल विकास निगम बिहार सरकार और कवच परियोजना सेंटर डायरेक्ट द्वारा चलाया गया 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत आशा SOP बाल विवाह पर प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण (TOT) जिला विधिक सेवा प्राधिकार, गयाजी के सभागार में आयोजित की गई
इस कार्यक्रम का उद्घाटन जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव श्री अरविंद कुमार दास,महिला विकास निगम की डी पी एम जयवंती कुमरी और स्वास्थ्य विभाग के डी सी एम श्री मनीष कुमार जी के दारा दीप प्रज्वलित कर के किया गया .
सचिव महोदय ने बताया कि एकदिवसीय प्रशिक्षण में सम्मिलित प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण उपरांत अपने स्तर से प्रखंड स्तर पर अपने विभाग के सारे लोग को प्रशिक्षण देने का काम करेंगे और जो 100 दिवसीय अभियान बाल विवाह मुक्त भारत है उसके तहत 16 जनवरी 26 से लेकर 26 जनवरी 26 तक डोर टू डोर कैंपेन में सारे लोग बाल विवाह मुक्त भारत अभियान का डोर टू डोर कैंपेन करेंगे। सचिव महोदय ने यह भी बताया कि गया जिला में कहीं भी बाल विवाह होता है तो कृपया इसकी सूचना इस नंबर पर 1098 एवं 15100 कॉल कर सकते हैं ।
प्रशिक्षको का प्रशिक्षण देते हुए सेन्टर डायरेक्ट स्वय सेवी संस्था के चन्द्र शेखर सिंह व कृषण मुरारी ठाकुर के द्वारा बाल विवाह के मुद्दे पर चर्चा करते हुए बता गया कि बाल विवाह 15 साल की उम्र में सुरु नहीं होती यह 5 साल की उम्र में शुरू होने वाली असुरक्षा से जन्म लेती है जिसमे स्कूल छोड़ना,पलायन जातिगत भेदभाव घर में हिंसा – ये सुरुआती मुश्किलें धीरे धीरे जमा होती है. इसलिए रोकथाम शादी के समय नहीं बल्कि बहुत पहले सुरु होनी चाहिए बाल विवाह एक अलग थलग समस्या नहीं है बाल विवाह उन कई बाल संरक्षणों को जोखिम में से एक है जिनकी सुरुआत जीवन में बहुत शुरुआती चरण में ही हो जाती है जिन परिवारों में बालविवाह होता है वहा बाल श्रम और बाल तस्करी का जोखिम कही अधिक हो जाता है ये असुरक्षाए अक्सर एक दुसरे से जुडी होती है और एक दुसरे को मजबूत करती है I
प्रशिक्षक के द्वारा बताया गया कि अधिकांश बाल शोषण की सुरुआत घर के भीतर से सुरु होता है तथा जोखिम के शुरुआती संकेत पहले से दिखाई देते है जिसमे समुदाय के हितधारक बच्चो को होने वाले संकट से पहले देख लेते है जिसकी सुरुआत समय रहते ही मदद करने में कारक सिद्ध होता है I यदि किसी बच्चे के साथ किसी भी प्रकार कि घटना घटती है जिसमे बच्चे का हित शामिल हो तो पंचायत स्तर पर बाल कल्याण एव संरक्षण समिति के सदस्य,शिक्षक,SMC के सदस्य प्रधान,वार्ड सदस्य एव PLV(पैरालीगल वालेंटियर) के साथ साथ जो भी नियमित रूप से बच्चो के संपर्क में रहता है ये सभी सुरक्षा के कारक में आते हैI
अंत में परियोजना प्रबंधक श्री दीनानाथ मौर्या जी के द्वारा बताया गया कि यदि बच्चो का रिस्क पहचान लेते है तो सबसे पहले हमें बच्चे या परिवार की पहचाना के बाद जोखिम स्तर के अनुसार कार्यवाही करे हाई रिस्क में तुरंत रिपोर्ट करे आवश्यकता होने पर रेस्क्यू, योजनाओ से जोड़ना,परामर्श तथा CWPC द्वारा समीक्षा I मीडियम रिस्क के मामलों में निरंतर फालोअप और विजिट करना है और परिवार को योजनाओ से जोड़ना,परामर्श और नियमित निगरानी लो रिस्क के मामलों में कम से कम तिमाही निगरानी,निरंतर सहयोग और सुरक्षा कारको को मजबूत करना होता है I
त्रिलोकी नाथ डिस्ट्रिक्ट रिपोर्टर गयाजी बिहार
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