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चालान से होता है चमत्कार, किसका होता है भला

IMG 20260112 092046सागर/वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664 * हमारे यहां सिस्टम की महान ‘जादुई’ प्रक्रिया है, जहाँ सुरक्षा और सुधार से ज्यादा कागज़ की कीमत होती है। पुलिस का कटा हुआ ‘चालान’ दरअसल एक अदृश्य सुरक्षा कवच है। हेलमेट न होने पर जैसे ही रसीद हाथ में आती है, व्यक्ति का सिर अचानक ‘अभेद्य’ हो जाता है। अब अगर दुर्घटना हो भी जाए, तो वह कागज का टुकड़ा यमराज को रास्ता बदलने पर मजबूर कर देता है। आखिर जुर्माना भरते ही जान की कीमत जो वसूल हो गई!​ विज्ञान भले ही फेल हो जाए, पर चालान कभी फेल नहीं होता। गाड़ी का साइलेंसर जो जहरीला धुआं उगल रहा था, ५००-१००० की रसीद कटते ही वह ‘ऑक्सीजन’ में बदल जाता है। जैसे ही आपकी जेब ढीली होती है, आपकी गाड़ी का इंजन पवित्र हो जाता है और पर्यावरण अचानक शुद्ध महसूस करने लगता है। नियम अनुशासन के लिए नहीं, बल्कि ‘वसूली’ के उत्सव बन गए हैं। यहाँ समस्या का समाधान मरम्मत (Repair) में नहीं, बल्कि रसीद (Receipt) में ढूँढा जाता है।यही कार्य किसी और तरीके से भी ठीक किया जा सकता है। चालान करने से किसका भला हुआ, क्या जिसका चालान हुआ है,उसका दुबारा चालान नहीं होगा? कौन सुधर पाया चालान से,

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