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गणतंत्र दिवस का मंच बना अखाड़ा? मुखर्जी ग्राउंड में मार्टिनेट स्कूल के टीचर और अधिकारियों में बहस

**गणतंत्र दिवस पर आष्टा में अनुशासन तार-तार:

*आष्टा में मार्टिनेट के टीचर ने* जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों से किया अशोभनीय व्यवहार*

 

आष्टा।

मुखर्जी ग्राउंड पर गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित भव्य कार्यक्रम उस समय विवाद में घिर गया, जब एक निजी स्कूल मार्टिनेट के शिक्षक द्वारा मंच पर मौजूद जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से असभ्य व असंयमित व्यवहार किया गया।

देशभक्ति और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजे इस आयोजन में छोटे-छोटे बच्चों ने अपनी कला से सभी को मंत्रमुग्ध किया। मंच पर जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ नागरिक एवं अधिकारी मौजूद थे, जिनकी उपस्थिति में प्रतिभागी बच्चों को पुरस्कार एवं सम्मान प्रदान किए जा रहे थे।

इसी दौरान जब मार्टिनेट स्कूल को पुरस्कार देने की बारी आई, तो  मार्टिनेट स्कूल के  शिक्षक ने जनप्रतिनिधियों के हाथों बच्चों को मिलने वाला पुरस्कार लेने से मना कर दिया। एवं भेद भाव का आरोप लगाया प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शिक्षक ने उच्च स्वर और अनुचित भाषा का प्रयोग करते हुए जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों से बहस शुरू कर दी।

स्थिति तब और गंभीर हो गई, जब समझाइश के बावजूद शिक्षक ने कार्यक्रम का बहिष्कार करते हुए राष्ट्रीय पर्व की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला आचरण किया। पूरी घटना मंच के सामने मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई।

घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि किस प्रकार शिक्षक द्वारा जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के प्रति असम्मानजनक रवैया अपनाया गया।

अब सवाल यह उठ रहा है कि

जो शिक्षक बच्चों को संस्कार सिखाने की जिम्मेदारी निभाते हैं, वही सार्वजनिक मंच पर मर्यादा भूल जाएं, तो क्या यह स्वीकार्य है?

क्या राष्ट्रीय पर्व जैसे अवसर पर इस तरह का व्यवहार शिक्षा जगत की छवि को धूमिल नहीं करता?

मामला अब आष्टा में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग जिम्मेदारों से स्पष्टीकरण व कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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