
🚨🔥 काशी की धरती पर भड़काऊ हुंकार! ज्ञानवापी को लेकर कथित धमकी का वीडियो वायरल, भीड़ को उकसाने का आरोप — अब क्या चलेगी कानून की धार? 🔥🚨
धार्मिक नगरी वाराणसी में एक वायरल वीडियो ने सियासी और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। वीडियो में खुशबु पांडेय उर्फ “बदबू पांडेय” नाम से पहचानी जा रही युवती कथित तौर पर ज्ञानवापी परिसर को लेकर बेहद तीखा और उकसाने वाला बयान देती दिखाई दे रही है। वीडियो में वह भीड़ को संबोधित करते हुए यह कहती सुनाई दे रही है कि यदि काशी विश्वनाथ मंदिर की ओर बढ़ रही भीड़ ज्ञानवापी की तरफ मुड़ जाए तो “तुरंत फैसला हो जाएगा” और “इसे तोड़ना है” जैसी बात कही जाती है।
यह वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। कई लोगों ने इसे सीधे-सीधे कानून-व्यवस्था को चुनौती और सांप्रदायिक तनाव भड़काने वाला बयान बताया है। वहीं बड़ी संख्या में यूजर्स ने वाराणसी पुलिस और उच्च अधिकारियों से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
🔴 मामला क्यों है बेहद संवेदनशील?
ज्ञानवापी परिसर वर्षों से कानूनी और सामाजिक रूप से संवेदनशील विषय रहा है। ऐसे में किसी भी सार्वजनिक मंच से धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाने जैसी टिप्पणी माहौल को तनावपूर्ण बना सकती है। यही वजह है कि इस वायरल वीडियो को लेकर प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज बताई जा रही है।
हालांकि, अब तक वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो कब और किस परिस्थिति में रिकॉर्ड किया गया। जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
⚖️ कानून की नजर से कितना गंभीर है मामला?
यदि जांच में यह साबित होता है कि सार्वजनिक रूप से धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाने या भीड़ को उकसाने का प्रयास किया गया है, तो यह भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है। उदाहरण के तौर पर:
- धारा 196 BNS – धर्म, जाति, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देना।
- धारा 197 BNS – राष्ट्रीय एकता के विरुद्ध या सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने वाले बयान।
- धारा 299 BNS – धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से जानबूझकर किया गया कृत्य।
- धारा 351/352 BNS (आपराधिक धमकी से संबंधित प्रावधान) – यदि किसी बयान में भय या हिंसा की खुली चेतावनी शामिल हो।
(धाराओं का अंतिम निर्धारण पुलिस जांच और कानूनी मूल्यांकन पर निर्भर करेगा।)
❓ उठ रहे हैं तीखे सवाल
- क्या यह बयान महज उत्तेजना में दिया गया या सुनियोजित उकसावा था?
- क्या भीड़ को किसी खास दिशा में मोड़ने का संकेत कानून-व्यवस्था को चुनौती है?
- क्या सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप अधूरी है या पूरे संदर्भ के साथ जांच होगी?
👮♂️ अब सबकी नजर प्रशासन पर
फिलहाल पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रेस बयान जारी नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि वीडियो की सत्यता, स्थान, तारीख और भाषण के पूरे संदर्भ की जांच की जा सकती है। यदि आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाते हैं, तो संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
👉 धार्मिक मुद्दों पर भड़काऊ बयान कानून के दायरे में आते हैं।
👉 सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो साझा करने से पहले सत्यापन आवश्यक है।
👉 जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं।
काशी की फिज़ा में उठी इस बयानबाजी की आंच अब प्रशासनिक कार्रवाई की ओर मुड़ती है या महज सोशल मीडिया विवाद बनकर रह जाती है — यह आने वाला समय तय करेगा। जैसे ही आधिकारिक पुष्टि या कार्रवाई सामने आएगी, विस्तृत अपडेट साझा किया जाएगा।
संपादक – एलिक सिंह
वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
ब्यूरो प्रमुख – हलचल इंडिया न्यूज़, सहारनपुर
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