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✨माँ गंगा के पावन तट ऋषिकेश में पूज्य गोविंददेव गिरि जी महाराज के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत कथा का शुभारम्भ*

विजय कुमार बंसल उत्तराखंड ब्यूरो

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*🌸पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी का पावन सान्निध्य*

*💥भागवत कथा सम्बंधों की कथा*

*🌸उत्तराखण्ड नेगेटिव नैरेटिव की धरती नहीं, नटराज की धरती है*

*✨चार धाम यात्रा में आस्था व व्यवस्था का अद्भुत संगम*

*🙏🏻स्वामी चिदानन्द सरस्वती*

 

ऋषिकेश, 20 अप्रैल। माँ गंगा के पावन तट, योगनगरी में पूज्य गोविंददेव गिरि जी महाराज के श्रीमुख से प्रवाहित हो रही दिव्य श्रीमद्भागवत कथा के पावन अवसर पर आज एक अत्यंत प्रेरणादायी, गरिमामय एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण क्षण रहा, जब परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज एवं उत्तराखण्ड के माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी का पावन सान्निध्य, उद्बोधन एवं आशीर्वचन प्राप्त हुए।

इस अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अत्यंत ओजस्वी एवं प्रेरणादायी संदेश देते हुए कहा कि “उत्तराखण्ड नेगेटिव नैरेटिव की धरती नहीं, नटराज की धरती है।” उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि देवताओं, ऋषियों, तपस्वियों और दिव्य चेतना की भूमि है। यह वह पावन धरा है जहाँ हिमालय की गोद में ऋषियों ने तप किया, जहाँ माँ गंगा का अवतरण हुआ, जहाँ प्रत्येक कण में आध्यात्मिकता, संस्कृति और सनातन जीवन मूल्यों की सुगंध विद्यमान है।

उन्होंने आगे कहा कि यह प्रदेश विश्व को केवल प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन ही नहीं देता, बल्कि योग, अध्यात्म, शांति, साधना, संस्कृति और जीवन जीने की शैली प्रदान करता है। यहाँ की नदियाँ केवल जलधारा नहीं, जीवनधारा हैं, यहाँ के पर्वत केवल शिलाखंड नहीं, तप और त्याग के प्रतीक हैं, यहाँ के तीर्थ केवल स्थल नहीं, आत्मजागरण के केंद्र हैं।

 

पूज्य स्वामी जी ने आह्वान किया कि देवभूमि की पावनता, नदियों की निर्मलता, पर्यावरण की शुचिता तथा संस्कृति की गरिमा की रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है। यदि हम उत्तराखण्ड की आत्मा को समझना चाहते हैं, तो हमें उसके अध्यात्म, सेवा, संस्कार और समर्पण को समझना होगा।

इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखण्ड सरकार देवभूमि की आध्यात्मिक विरासत, सांस्कृतिक अस्मिता और प्राकृतिक संपदा के संरक्षण हेतु पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पूज्य संतों का मार्गदर्शन राज्य की सबसे बड़ी शक्ति है और उनके आशीर्वाद से उत्तराखण्ड निरंतर अपनी विरासत को साथ लेकर विकास, धर्म और संस्कृति के मार्ग पर अग्रसर है।

माननीय मुख्यमंत्री जी ने कहा कि ऋषिकेश, हरिद्वार, केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री सहित सम्पूर्ण उत्तराखण्ड भारत की सनातन आत्मा का जीवंत स्वरूप है। सरकार का प्रयास है कि तीर्थ स्थलों का विकास हो, श्रद्धालुओं को सुविधाएँ प्राप्त हों और आने वाली पीढ़ियाँ अपनी जड़ों, संस्कृति और विरासत से जुड़ी रहें।

कथा व्यास पूज्य गोविंददेव गिरि जी महाराज के श्रीमुख से प्रवाहित श्रीमद्भागवत कथा श्रद्धालुओं के अंतर्मन में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का संचार कर रही है। वे अपनी कथाओं के माध्यम से धर्म, नीति, करुणा, सेवा, प्रेम और समर्पण के दिव्य संदेश जन-जन तक पहुँच रहे हैं।

ऋषिकेश की पावन धरती पर संतशक्ति, जनशक्ति और शासनशक्ति का यह अद्भुत संगम समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश है कि जब अध्यात्म और प्रशासन साथ चलते हैं, तब राष्ट्र और समाज का समग्र उत्थान सुनिश्चित होता है।

कथा आयोजक श्री अरूण माहेश्वरी जी, श्रीमती मंजू माहेश्वरी जी द्वारा इस दिव्य श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया गया जिसे सम्पूर्ण माहेश्वरी परिवार व ईष्टमित्र इस दिव्य कथा का आनंद ले रहे है।

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