
धमतरी, 10 जुलाई 2026 सिहावा की ऐतिहासिक रथयात्रा महापर्व को शांतिपूर्ण, सुरक्षित एवं गरिमामय ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से शुक्रवार को ग्राम पंचायत सिहावा के सभागार में शांति समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रशासन, जनप्रतिनिधियों एवं पंचायत प्रतिनिधियों ने पर्व के सफल आयोजन को लेकर विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक में नगरी एसडीओपी विपिन रंगारी, थाना प्रभारी अजय सिंह, जनपद सदस्य प्रेमलता नागवंशी, सिहावा सरपंच ऊषाकिरण नाग, भीतररास सरपंच रेमंत शांडिल्य, सिरसिदा सरपंच नरसिंह मरकाम, भीतररास उपसरपंच सुनील यादव, सिहावा उपसरपंच सुनील सिंहसार सहित पंचायत प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
बैठक में आगामी 16 जुलाई को आयोजित होने वाली रथयात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुरक्षा तथा धार्मिक परंपराओं की गरिमा बनाए रखने को लेकर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। बताया गया कि इस दौरान पारंपरिक भक्ति गीतों एवं धुमाल के लिए सहमति बनी। साथ ही हाई-बेस साउंड सिस्टम का उपयोग नहीं करने पर भी चर्चा हुई। हालांकि डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने के संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक और स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है।
बैठक में पर्व के दौरान सामाजिक एवं धार्मिक वातावरण को ध्यान में रखते हुए मदिरा दुकान तथा चिकन-मटन बिक्री को एक दिन के लिए बंद रखने का प्रस्ताव भी सामने आया। पंचायत प्रतिनिधियों ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजने पर सहमति जताई, ताकि रथयात्रा के दिन मांस एवं मदिरा की बिक्री पर रोक सुनिश्चित की जा सके।
श्रद्धालुओं की संभावित भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए स्थानीय युवाओं का स्वयंसेवक (वॉलेंटियर) दल गठित करने का भी निर्णय लिया गया। यह दल पुलिस एवं प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर यातायात व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और अन्य व्यवस्थाओं में सहयोग करेगा, जिससे आयोजन सुचारु एवं व्यवस्थित रूप से संपन्न हो सके।
*वर्षों पुरानी आस्था और परंपरा का प्रतीक है सिहावा की रथयात्रा*
सिहावा की ऐतिहासिक रथयात्रा अंचल की सबसे प्राचीन एवं धार्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है। इस पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा एवं भगवान बलभद्र भव्य एवं आकर्षक रथों पर विराजमान होकर भीतररास और सिहावा से नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं। रथयात्रा सिहावा एवं भीतररास के प्रमुख मार्गों से होते हुए कर्णेश्वर मंदिर, देउरपारा तक पहुंचती है।
इस दिव्य यात्रा के दर्शन, पूजा-अर्चना तथा गजा-मूंग प्रसाद ग्रहण करने के लिए अंचल ही नहीं बल्कि दूर-दराज़ क्षेत्रों से भी हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण छा जाता है, जहां बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इस महापर्व में सहभागी बनते हैं।
श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए प्रशासन द्वारा पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी, ताकि रथयात्रा महापर्व शांतिपूर्ण, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके




