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बस्ती: पल्स हॉस्पिटल में ‘मौत का ऑपरेशन’, एनेस्थीसिया के ओवरडोज से जच्चा-बच्चा ने तोड़ा दम!

ऑपरेशन टेबल बनी कसाईखाना: पल्स हॉस्पिटल की लापरवाही ने ली जच्चा-बच्चा की जान। क्या पल्स हॉस्पिटल में इलाज का मतलब 'मौत' है? एनेस्थीसिया के ओवरडोज से माँ-बेटे की मौत का आरोप।

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अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती: पल्स हॉस्पिटल में ‘मौत का ऑपरेशन’? एनेस्थीसिया के ओवरडोज से जच्चा-बच्चा की जान जाने का आरोप

  • बस्ती पल्स हॉस्पिटल कांड: इलाज के नाम पर खिलवाड़, परिजनों का आरोप- एनेस्थीसिया ने ली जान।
  • मौत के बाद आनन-फानन में शव घर भेजा, पल्स हॉस्पिटल की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल।
  • जच्चा-बच्चा की मौत: पति के आते ही पुलिस को दी जाएगी तहरीर, पल्स हॉस्पिटल के खिलाफ ग्रामीणों में उबाल।

बस्ती: स्टेशन रोड स्थित पल्स हॉस्पिटल में एक बार फिर चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल प्रशासन की कथित लापरवाही के चलते एक 24 वर्षीय गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि एनेस्थीसिया का ओवरडोज देने के कारण ऑपरेशन टेबल पर ही जच्चा-बच्चा की सांसें थम गईं।

​क्या है पूरा मामला?

​मृतक प्रतिभा चौधरी (24), जो वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत पल्टनपुर की निवासी थीं, उन्हें प्रसव पीड़ा के लिए पल्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन से पहले दिए गए एनेस्थीसिया इंजेक्शन के बाद स्थिति अचानक बिगड़ी और कुछ ही देर में जच्चा-बच्चा दोनों ने दम तोड़ दिया।

​डॉक्टर और संचालक की संवेदनहीनता

​आरोप है कि मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने मामले को दबाने की पुरजोर कोशिश की। परिजनों का कहना है कि डॉक्टर और अस्पताल संचालक ने आनन-फानन में एंबुलेंस मंगवाई और शवों को परिजनों के हवाले कर सीधे घर भेज दिया। यह कदम अस्पताल प्रशासन की मंशा पर बड़े सवाल खड़े करता है कि क्या सबूत मिटाने की कोशिश की गई थी?

​पति का इंतजार, न्याय की गुहार

​मृतका के पति, जो बाहर रहकर मजदूरी करते हैं, घटना की सूचना मिलते ही घर के लिए निकल चुके हैं। परिजनों ने स्पष्ट कहा है कि वे मामले को रफा-दफा नहीं होने देंगे। पति के बस्ती पहुँचते ही पूरे मामले की शिकायत पुलिस थाने में दर्ज कराई जाएगी और पोस्टमार्टम (PM) कराने की मांग की जाएगी।

​सवालों के घेरे में अस्पताल की व्यवस्था

​यह घटना जिले के निजी अस्पतालों में व्याप्त ‘लूट और लापरवाही’ के खेल को उजागर करती है।

  • क्या पल्स हॉस्पिटल के पास जटिल ऑपरेशन के लिए प्रशिक्षित एनेस्थीसिया विशेषज्ञ उपलब्ध थे?
  • दवा की मात्रा तय करने में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई?
  • मौत के तुरंत बाद एंबुलेंस से शव भिजवाना, क्या किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है?

​ग्रामीणों और परिजनों में भारी आक्रोश है। वे बस्ती पहुँचकर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करने की तैयारी कर रहे हैं। अब देखना यह है कि क्या जिला स्वास्थ्य विभाग इस मामले को गंभीरता से लेकर अस्पताल की जांच करेगा या हर बार की तरह लापरवाही के पन्नों को दबा दिया जाएगा।

प्रशासन की चुप्पी और अस्पताल की ये करतूत, क्या किसी और की जान का इंतजार कर रही है?

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