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सीएचसी बनकटी में तैनात लिपिक पर गंभीर आरोप: महीनों ड्यूटी से गायब रहकर उठा रहे वेतन, प्रमुख सचिव से शिकायत

"साहब" महीने में आते हैं सिर्फ दो दिन: सीएचसी बनकटी के लिपिक पर ड्यूटी से गायब रहने का संगीन आरोप, CDR जांच की मांग

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती: बनकटी स्वास्थ्य केंद्र के बाबू पर गंभीर आरोप, घर बैठे बना रहे पेरोल; निलंबन की उठी मांग

  • “कोई मुझसे नौकरी नहीं करवा सकता”: रसूखदार लिपिक की दबंगई, प्रमुख सचिव और मुख्यमंत्री पोर्टल पर पहुंची शिकायत
  • सिस्टम को ठेंगा दिखा रहे लिपिक शमीम! महीनों गायब रहने के बाद भी मिल रहा पूरा वेतन, बस्ती से लखनऊ तक मची खलबली
  • लापरवाह लिपिक पर गिर सकती है गाज: बनकटी सीएचसी में ड्यूटी से नदारद रहने वाले कर्मचारी की उच्चस्तरीय जांच शुरू

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

  • मुख्यमंत्री पोर्टल और प्रमुख सचिव (गृह) तक पहुँचा मामला।
  • आरोप: महीने में सिर्फ दो दिन ऑफिस आते हैं लिपिक शमीम।
  • कॉल डिटेल (CDR) निकलवाकर जांच करने की उठी मांग।

बनकटी (बस्ती)। जनपद बस्ती के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) बनकटी में तैनात एक लिपिक की कार्यशैली और रसूख ने सरकारी तंत्र की शुचिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। संस्थान में कार्यरत लिपिक शमीम (मानव संपदा कोड: 235211) पर लंबे समय से ड्यूटी से नदारद रहने, कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही बरतने और संदिग्ध आचरण के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल सहित प्रमुख सचिव (गृह), उत्तर प्रदेश शासन से करते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है।

महीने में सिर्फ दो दिन उपस्थिति का दावा

शिकायत में सनसनीखेज खुलासा किया गया है कि लिपिक शमीम पूरे महीने कार्यालय से अनुपस्थित रहते हैं। वे केवल महीने की 21 और 22 तारीख को, जब वेतन निर्माण (पेरोल) का कार्य होता है, तभी कार्यालय में दर्शन देते हैं। मूल रूप से जनपद बलिया के निवासी शमीम का ठिकाना गोरखपुर और लखनऊ बताया जा रहा है। पारिवारिक कारणों का हवाला देकर वे अपनी ड्यूटी से कन्नी काटते हैं, जिससे सरकारी कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

“कोई मेरी नौकरी नहीं छुड़वा सकता” – रसूख की धमक

हैरानी की बात यह है कि आरोपी लिपिक के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे कथित तौर पर अपनी सेटिंग का बखान करते फिरते हैं। चर्चा है कि उन्होंने स्वयं यह स्वीकार किया है कि वे अपनी पिछली तैनातियों (गोरखपुर, देवरिया, पिपरौली) में भी इसी तरह अपनी मर्जी से आते-जाते रहे हैं। आरोप के मुताबिक, शमीम अक्सर कहते हैं— “आज तक मुझसे कोई नौकरी नहीं करवा पाया है, मैं अपने हिसाब से काम करता हूँ और मेरा प्रभाव ऊपर तक है।” उनका यह बयान सीधे तौर पर शासन और अनुशासन को चुनौती दे रहा है।

विवादास्पद रहा है पिछला रिकॉर्ड

शिकायतकर्ता ने लिपिक के पिछले सेवा विवरण का कच्चा चिट्ठा भी शासन के सामने रखा है:

  • 1995 (गगहा, गोरखपुर): तैनाती के दौरान भी उपस्थिति अनियमित रही।
  • 2014-2018 (गोरखपुर व देवरिया): कई बार तबादले हुए लेकिन कार्यशैली नहीं बदली।
  • 2021 से वर्तमान (बनकटी, बस्ती): अगस्त 2021 से यहां तैनात हैं और लगातार शिकायतों के घेरे में हैं।

जांच और कार्रवाई की पांच सूत्रीय मांग

मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन से निम्नलिखित कार्रवाई की मांग की गई है:

  • पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय (High-Level) जांच कराई जाए।
  • लिपिक की उपस्थिति और वेतन भुगतान के रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन हो।
  • वास्तविक लोकेशन पता करने के लिए उनके मोबाइल नंबर (9935310326) की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच हो।
  • जांच पूरी होने तक उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।
  • वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर विधिक कार्रवाई (FIR) सुनिश्चित हो।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी अपने इस ‘रसूखदार’ कर्मचारी के खिलाफ सख्त कदम उठाएंगे, या हर बार की तरह जांच के नाम पर लीपापोती कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

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