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बस्ती में मौत का तांडव: खाकी की नाक के नीचे नशा माफिया वीरू सिंह का ‘सफेद’ साम्राज्य!

सिस्टम फेल या माफिया पास? परशुरामपुर और घघौवा बने नशे की नई राजधानी। पुलिस की सुस्ती, माफिया की मस्ती: पुड़िया में बिक रही युवाओं की जिंदगी!

अजीत मिश्रा (खोजी)

विशेष रिपोर्ट: बस्ती मंडल में मौत का ‘सफेद’ कारोबार, खाकी की चुप्पी पर सुलगते सवाल

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

  • बस्ती पुलिस की ‘खानापूर्ति’ से तस्करों के हौसले बुलंद, बड़े सप्लायरों पर मेहरबानी क्यों?
  • घघौवा चौकी क्षेत्र में नशे का खेल: आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है मौत का व्यापार?
  • डिजिटल हुआ नशा, सो रहा प्रशासन: दुबौलिया में घर-घर पहुँच रहा स्मैक का जहर।
  • बस्ती मंडल में ‘नशे की लंका’: युवाओं की रगों में जहर घोल रहा माफिया वीरू सिंह!
  • चीखती जनता, खौफ में परिवार: क्या नशे की आग में जल जाएगी आने वाली पीढ़ी?
  • अयोध्या से गोंडा तक तस्करों का जाल, बस्ती पुलिस केवल दावों में बेमिसाल!

बस्ती। जनपद के हरैया, विक्रमजोत और परशुरामपुर थाना क्षेत्रों में इन दिनों नशे का कारोबार पूरी तरह बेलगाम हो चुका है। गांजा और स्मैक की ‘पुड़िया’ युवाओं की रगों में जहर घोल रही है, लेकिन जिम्मेदार सिस्टम चैन की नींद सोया है। हालात यह हैं कि दुबौलिया थाना क्षेत्र अब ‘डिजिटल नशा व्यापार’ के नए गढ़ के रूप में उभर रहा है, जहाँ तकनीक के जरिए मौत का सामान घर-घर पहुँचाया जा रहा है।

वीरू सिंह: नशे के साम्राज्य का स्वयंभू ‘सुल्तान’

सूत्रों की मानें तो इस पूरे काले साम्राज्य का कथित सरगना वीरू सिंह नामक नशा माफिया बना हुआ है। चर्चा है कि इसी माफिया के इशारे पर नशे का जाल गांव-गांव तक फैल चुका है। वीरू सिंह और उसके गुर्गे मासूम युवाओं को निशाना बना रहे हैं, जिससे न जाने कितने घर उजड़ रहे हैं और कितनी माताओं की गोद सूनी हो रही है। पुड़िया-पुड़िया में सपनों की जिंदगी नीलाम हो रही है, लेकिन इस बड़े सप्लायर पर हाथ डालने की जहमत कोई नहीं उठा रहा।

पुलिस की ‘खानापूर्ति’ और घघौवा चौकी का संदिग्ध मौन

पुलिसिया कार्रवाई के दावों की हवा तो तब निकल जाती है जब धरातल पर धंधा धड़ल्ले से चलता दिखता है। पुलिस छोटे-मोटे नशेड़ियों या छुटभैया तस्करों को पकड़कर अपनी पीठ थपथपा लेती है, जबकि बड़े सप्लायर आज भी आजाद घूम रहे हैं।

सबसे चौंकाने वाला नाम पुलिस चौकी घघौवा का है। यह क्षेत्र नशे के कारोबार के लिए इस कदर चर्चित हो चुका है कि यहाँ के तस्करों का जाल न केवल परशुरामपुर, बल्कि अयोध्या और गोंडा तक फैला हुआ है। आखिर क्या वजह है कि घघौवा क्षेत्र से होने वाली इस तस्करी पर लगाम नहीं लग पा रही? क्या यह पुलिस की विफलता है या फिर तस्करों को मिल रहा ‘अभयदान’?

परशुरामपुर: नशे का नया हब, खौफ में जनता

परशुरामपुर का इलाका अब नशे के हब में तब्दील होता जा रहा है। गांव के हर मोड़ पर नशे का जाल बिछा है। स्थानीय लोग इस भयावह स्थिति को देखकर डरे-सहमे हैं। लोग अपनी सुरक्षा के डर से खुलकर बोलने से कतरा रहे हैं, लेकिन उनके भीतर का गुस्सा अब उबाल पर है। सवाल यह है कि युवाओं की इस बर्बादी का जिम्मेदार कौन है? वह तस्कर जो जहर बेच रहा है, या वह सिस्टम जिसकी निगरानी इतनी ढीली है कि तस्करों के हौसले बुलंद हैं?

प्रशासन से तीखे सवाल:

  • आखिर वीरू सिंह जैसे कथित नशा माफियाओं पर नकेल कब कसी जाएगी?
  • घघौवा चौकी क्षेत्र में सक्रिय अंतर-जनपदीय नेटवर्क को ध्वस्त करने में देरी क्यों?
  • क्या पुलिस केवल ‘खानापूर्ति’ के लिए छोटे मोहरों की गिरफ्तारी करती रहेगी?
  • डिजिटल होते नशे के व्यापार पर साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की नजर क्यों नहीं है?

निष्कर्ष:: अगर समय रहते इन इलाकों में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ जैसी बड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो बस्ती मंडल की आने वाली पीढ़ी पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी। अब खोखले दावों की नहीं, बल्कि सख्त एक्शन की जरूरत है।

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