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तटबंध निर्माण में बड़ा खेल! बालू-सिल्ट की जगह मिट्टी से भरी जा रहीं बोरियां

कुशीनगर। जनपद में बाढ़ सुरक्षा के लिए बनाए जा रहे ए.पी. तटबंध आमवा बंधे के पिपराही नोज पर गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी और मौके से प्राप्त तस्वीरों के आधार पर आरोप है कि निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी की जा रही है।
बताया जा रहा है कि जहां तकनीकी मानकों के अनुसार बोरियों में बालू और सिल्ट भरा जाना चाहिए, वहां ठेकेदार द्वारा मिट्टी भरकर काम कराया जा रहा है। इससे तटबंध की मजबूती पर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि यही स्थिति रही तो बाढ़ के दौरान तटबंध कमजोर साबित हो सकता है, जिससे आसपास के गांवों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
मामले में नया खुलासा
जब पत्रकारों ने मौके पर मौजूद अधिकारियों और ठेकेदार से बोरियों में भरी जा रही सामग्री के बारे में सवाल किया, तो वहां मौजूद एडीओ और ठेकेदार ने बताया कि “सिल्ट उपलब्ध न होने की स्थिति में मिट्टी भरी जा रही है।”
हालांकि, यह जवाब अपने आप में कई गंभीर सवाल खड़े करता है कि क्या बिना मानक सामग्री के कार्य कराना नियमों के अनुरूप है?
मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर एसडीओ एस.पी. मौर्य भी पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उनकी मौजूदगी के बावजूद कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल बरकरार हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही सीधे-सीधे जनहित के साथ खिलवाड़ है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी ठेकेदार व संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही निर्माण कार्य को मानकों के अनुरूप दोबारा कराने की भी मांग उठ रही है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?

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