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बस्ती पुलिस की संवेदनहीनता: माँ की राह ताकते मासूमों ने त्यागा अन्न-जल, क्या खाकी को किसी अनहोनी का इंतज़ार?

सिस्टम की लापरवाही: सात दिन से लापता महिला, पुलिस ने अब तक फोटो तक नहीं मांगी!

अजीत मिश्रा (खोजी)

खाकी की संवेदनहीनता: लापता मां की राह ताकते मासूमों ने छोड़ा अन्न-जल, क्या किसी अनहोनी का इंतजार कर रही बस्ती पुलिस?

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

  • मित्र पुलिस का ‘क्रूर’ चेहरा: बिलखते बच्चे और बेबस पिता, कोतवाली पुलिस की फाइलों में दफन हुआ इंसाफ।
  • “माँ लौट आओ!” : बच्चों के विलाप से दहला पिकौरा दत्तूराय, पुलिस के पास सर्विलांस के सिवा कोई जवाब नहीं।
  • टूट गया हंसता-खेलता परिवार: अवसाद में डूबे मासूम, लापता पत्नी की तलाश में दर-दर भटक रहा पति।
  • आधार बनवाने निकली कंचन कहाँ गई? बस्ती कोतवाली की ‘सुस्ती’ बढ़ा रही परिजनों की धड़कनें।
  • लव मैरिज का सुखद सफर और ये खौफनाक मोड़: क्या पुलिस की ‘उदासीनता’ बन जाएगी किसी हादसे की वजह?

बस्ती। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था और ‘मित्र पुलिस’ के दावों की धज्जियां उड़ाती एक हृदयविदारक घटना बस्ती जनपद से सामने आई है। कोतवाली थाना क्षेत्र के पिकौरा दत्तूराय मोहल्ले से एक विवाहिता बीते 29 अप्रैल से लापता है, लेकिन पुलिस की कथित ‘सुस्ती’ और ‘उदासीनता’ ने एक हंसते-खेलते परिवार को बर्बादी की कगार पर खड़ा कर दिया है। 11 साल की कृतिका और 8 साल के नितिन की आंखों के आंसू सूख चुके हैं, पर खाकी की नींद नहीं टूट रही।

आधार कार्ड बनवाने निकली थी कंचन, सात दिन बाद भी सुराग सिफर

पिकौरा दत्तूराय निवासी रवि कुमार की 30 वर्षीय पत्नी कंचन देवी 29 अप्रैल को दोपहर 12 बजे घर से यह कहकर निकली थीं कि उन्हें आधार कार्ड बनवाना है और बच्चों के लिए स्कूल ड्रेस लेनी है। तब से वह वापस नहीं लौटीं। परिजनों ने सगे-संबंधियों और संभावित ठिकानों पर काफी खोजबीन की, लेकिन कंचन का कहीं पता नहीं चला।

पुलिस का ‘सिस्टम’: गुमशुदगी दर्ज करने में टाला-मटौली, फोटो तक नहीं मांगी!

हैरानी की बात यह है कि पीड़ित पति रवि कुमार जब 1 मई को न्याय की गुहार लेकर कोतवाली पहुंचा, तो पुलिस ने तत्परता दिखाने के बजाय मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। हद तो तब हो गई जब दोबारा 4 मई को तहरीर देने के बावजूद पुलिस का रवैया जस का तस रहा। सूत्रों की मानें तो पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज करने की प्रक्रिया में लापता महिला की फोटो तक मांगना मुनासिब नहीं समझा। आखिर बिना पहचान और बिना गंभीरता के पुलिस क्या तलाश रही है? क्या सर्विलांस के नाम पर केवल समय काटा जा रहा है?

मासूमों का विलाप: “मां लौट आओ, हमें भूख नहीं लगती”

घर का नजारा किसी पत्थर दिल को भी पिघला दे। 11 वर्षीय कृतिका और 8 वर्षीय नितिन ने अपनी मां के वियोग में खाना-पीना और स्कूल जाना छोड़ दिया है। दोनों मासूम गहरे अवसाद में हैं। पीड़ित पिता रवि कुमार दोहरी मार झेल रहा है—एक तरफ पत्नी के खोने का गम और दूसरी तरफ बिलखते बच्चों को संभालने की चुनौती। रवि ने एक भावुक वीडियो जारी कर पत्नी से घर लौटने की अपील की है, लेकिन सवाल प्रशासन से है कि आखिर पुलिस किसी अनहोनी का इंतजार क्यों कर रही है?

खतरे की घंटी: बंद मोबाइल और पुलिस की थ्योरी

लापता कंचन देवी का मोबाइल नंबर (6386446899) लगातार बंद आ रहा है। पुलिस का रटा-रटाया जवाब है कि “लोकेशन मिलने पर कार्रवाई होगी।” सवाल यह है कि यदि मोबाइल बंद है, तो लोकेशन के भरोसे हाथ पर हाथ धरकर बैठना कहां की समझदारी है? 11 साल के सफल वैवाहिक जीवन (लव मैरिज) के बाद अचानक इस तरह गायब होना किसी बड़ी साजिश या अनहोनी की ओर इशारा कर रहा है।

पीड़ित की अपील: रवि कुमार ने जनता से सहयोग मांगते हुए कहा है कि यदि कंचन देवी के बारे में कोई भी जानकारी मिले, तो तुरंत उनके मोबाइल नंबर 6388845003 पर सूचित करें।

अब देखना यह है कि बस्ती पुलिस की संवेदनहीनता कब खत्म होती है और इन मासूमों को उनकी मां वापस कब मिलती है। यदि समय रहते पुलिस ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी कोतवाली प्रशासन की होगी।

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