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“मौत की फैक्ट्री: बिना लाइसेंस पानी के नाम पर परोसा जा रहा था ‘ज़हर’, प्रशासन ने जड़ा ताला”

"Bilsari ब्रांड का भंडाफोड़: लैब टेस्ट में फेल हुआ पानी, सिद्धार्थनगर में मिलावटखोरों पर चला बाबा का डंडा"

अजीत मिश्रा (खोजी)

जनता की सेहत से ‘खिलवाड़’ का काला कारोबार: सिद्धार्थनगर में ‘ज़हर’ उगल रही पानी की फैक्ट्री सील

ब्यूरो, बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

  • “जनता की प्यास या जान से खिलवाड़? नौगढ़ में अवैध पानी प्लांट सील, हजारों बोतलें जब्त”
  • “अवैध कारोबार पर सर्जिकल स्ट्राइक: भीमापार में पानी फैक्ट्री सील, मचा हड़कंप”
  • “सावधान! ब्रांडेड लेबल के पीछे छिपा था गंदा खेल; सिद्धार्थनगर प्रशासन ने सीज की हजारों बोतलें”

सिद्धार्थनगर। ताक पर कानून, ठेंगे पर प्रशासन और नीयत में सिर्फ मुनाफा! सिद्धार्थनगर के नौगढ़ में मासूम जनता की प्यास बुझाने के नाम पर ‘धीमा ज़हर’ परोसने वाले एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। जिलाधिकारी के कड़े रुख के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने भीमापार स्थित एक पानी फैक्ट्री पर सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए उसे सील कर दिया है।

​बिना लाइसेंस ‘मौत’ का सामान

​हैरानी की बात यह है कि भीमापार में यह यूनिट बिना किसी वैध लाइसेंस के धड़ल्ले से चल रही थी। जिसे हम ‘शुद्ध पेयजल’ समझकर पी रहे थे, उसका न तो कोई मानक था और न ही कोई कानूनी आधार। प्रशासन की टीम जब मौके पर पहुँची, तो वहां चल रहे गोरखधंधे को देखकर अधिकारी भी दंग रह गए।

​Bilsari ब्रांड के फेल हुए नमूने

​कार्रवाई के दौरान Bilsari ब्रांड के नाम से बाजार में खपाए जा रहे पानी के सैंपल लिए गए थे। खाद्य प्रयोगशाला की रिपोर्ट ने पुख्ता कर दिया कि यह पानी इंसानी शरीर के लिए ‘मानक विहीन’ और खतरनाक है। रिपोर्ट आते ही विभाग ने कड़ा प्रहार किया:

    • 1 लीटर की 264 बोतलें मौके पर सीज की गईं।
    • 500 मिली की 816 बोतलें जब्त कर नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू हुई।
    • ​पूरी यूनिट को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत ताला जड़कर सील कर दिया गया।

“जनता की सेहत के साथ समझौता करने वाले किसी भी मिलावटखोर को बख्शा नहीं जाएगा। बिना लाइसेंस और मानक विहीन उत्पाद बेचने वालों की जगह सलाखों के पीछे है।”

प्रशासनिक संदेश

 

​मिलावटखोरों में हड़कंप

​सहायक आयुक्त (खाद्य)-II के निर्देशन में हुई इस छापेमारी में सहायक आयुक्त आर.एल. यादव, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी नरेंद्र प्रताप सिंह और खाद्य सुरक्षा अधिकारी हीरा लाल व नीरज कुमार चौधरी की टीम ने इस काले कारोबार का अंत किया। इस बड़ी कार्रवाई के बाद जिले के अन्य मिलावटखोरों और अवैध प्लांट संचालकों में हड़कंप मच गया है।

सावधान! क्या आप जो पानी पी रहे हैं, वह शुद्ध है? प्रशासन की यह कार्रवाई एक चेतावनी है उन लोगों के लिए जो चंद रुपयों के लिए लोगों की जान दांव पर लगा रहे हैं।

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