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बस्ती में ‘सिंडिकेट’ राज! डीएम के आदेश पर भारी पड़ी भ्रष्टाचारियों और जाँच अधिकारियों की जुगलबंदी

साहब मौन, फाइलें गौन! क्या बस्ती में बेलगाम हो चुकी है अफसरशाही? साऊंघाट के तरेता ग्राम पंचायत में 'महाघोटाला', आज डेडलाइन खत्म पर जाँच टीम अब तक लापता!

अजीत मिश्रा (खोजी)

डीएम के आदेश को ठेंगा! जाँच अधिकारियों और भ्रष्टाचारियों की जुगलबंदी में ‘तरेता’ की जाँच दफन

​ 15 मई को खत्म हो रही समय-सीमा, पर मजाल है कि ‘साहब’ लोग कुर्सी से हिले हों!

बस्ती संवाददाता | 15 मई 2026

  • भ्रष्टाचार की जाँच में ‘नया भ्रष्टाचार’! तरेता घोटालेबाजों को बचाने में जुटे जिम्मेदार
  • उप-सुर्खी: संपादक राहुल पटेल की शिकायत पर भी नहीं पसीजा प्रशासन, ठेंगे पर जिलाधिकारी का आदेश!
  • तरेता ग्राम पंचायत घोटाला: आज खत्म हो रही समय-सीमा, आखिर क्यों नहीं हिला जिला प्रशासन?
  • दिखावे की जाँच और सौदेबाजी के खेल से क्षेत्र में भारी आक्रोश, डीएम के ‘एक्शन’ का इंतजार!
  • डीएम का आदेश बेअसर, तरेता भ्रष्टाचार की जाँच पर लगी ‘सेटिंग’ की दीमक!

बस्ती। जनपद में नौकरशाही बेलगाम हो चुकी है या फिर भ्रष्टाचारियों का सिंडिकेट इतना मजबूत है कि अब सीधे जिला अधिकारी (डीएम) के आदेशों की भी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मामला विकास खण्ड साऊंघाट के तरेता ग्राम पंचायत का है, जहाँ मनरेगा और विकास कार्यों में हुए कथित महाभ्रष्टाचार की जाँच फाइलों में ही दम तोड़ती नजर आ रही है।

​आलम यह है कि जिलाधिकारी महोदया द्वारा तय की गई जाँच की समय-सीमा दिनांक 15 मई 2026 को समाप्त हो रही है, लेकिन धरातल पर नतीजा ढाक के तीन पात है। सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर जाँच अधिकारियों को किसका संरक्षण प्राप्त है, जो वे अपने सर्वोच्च विंग के आदेश को भी ठेंगे पर रख रहे हैं?

‘जाँच में नया भ्रष्टाचार’: क्या यही है ‘जीरो टॉलरेंस’?

​जिले में यह पहली बार नहीं है जब भ्रष्टाचार की जाँच खुद भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई हो। चर्चाओं का बाजार गर्म है कि यदि दिखावे के लिए कोई जाँच टीम पहुँचती भी है, तो वहाँ न्याय कम और ‘सौदेबाजी’ ज्यादा होती है।

बड़ा सवाल: जब जाँच के नाम पर सिर्फ औपचारिकता का खेल खेला जाएगा, तो भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद क्यों नहीं होंगे? जनपद में आज तक कोई ऐसी नजीर (उदाहरणात्मक कार्यवाही) पेश नहीं की गई, जिसे देखकर अन्य सफेदपोश लुटेरों की रूह कांपे।

 

संपादक की शिकायत पर भी ‘कुंडली’ मार कर बैठे रहे अधिकारी

​गौरतलब है कि तरेता ग्राम पंचायत में जनता की गाढ़ी कमाई के बंदरबांट को लेकर ‘नव्य संदेश प्रवाह’ के प्रधान संपादक राहुल पटेल ने खुद जिलाधिकारी महोदया के समक्ष पुख्ता साक्ष्यों के साथ शिकायत दर्ज कराई थी। त्वरित एक्शन लेते हुए जिलाधिकारी ने जाँच टीम का गठन भी कर दिया। लेकिन शायद जिम्मेदार अधिकारियों को ‘गठजोड़’ की मलाई ज्यादा पसंद आई। आरोपियों और जाँच अधिकारियों की कथित संलिप्तता के चलते पूरी प्रक्रिया को ‘टैम्पर्ड’ करने का प्रयास किया जा रहा है।

जनता के तीखे सवाल, प्रशासन मौन:

  1. अल्टीमेटम खत्म, रिपोर्ट कहाँ है? जब आज 15 मई की डेडलाइन पार हो रही है, तो जाँच टीम ने अब तक अपनी रिपोर्ट टेबल पर क्यों नहीं रखी?
  2. डीएम के आदेश की क्या अहमियत है? क्या बस्ती जनपद में अब जिलाधिकारी के आदेश महज एक कागजी पुर्जा बनकर रह गए हैं, जिसका अनुपालन करना मातहत जरूरी नहीं समझते?
  3. गठजोड़ का सच कब आएगा सामने? भ्रष्टाचारियों को अभयदान देने वाले इन जाँच अधिकारियों पर कब होगी एफआईआर और विभागीय कार्रवाई?

निष्कर्ष: तरेता ग्राम पंचायत का यह मामला अब सिर्फ एक वित्तीय अनियमितता का केस नहीं रह गया है, बल्कि यह जिला प्रशासन की साख की परीक्षा है। क्षेत्र में इस ढुलमुल रवैये को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं और आक्रोश व्याप्त है। देखना यह है कि समय-सीमा बीतने के बाद आज जिलाधिकारी महोदया इन ‘सुस्त और संलिप्त’ अधिकारियों की क्लास लगाती हैं या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते के हवाले कर दिया जाएगा।

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