
बस्ती में ‘खाकी’ बेबस, रसूखदार मदरसा प्रबंधक के परिवार पर नाबालिग से रेप का आरोप; एक महीने बाद भी गिरफ्तारी नहीं
- ‘धर्म’ की आड़ में घिनौना खेल: रसूखदार के घर ‘बेटी’ सुरक्षित नहीं, पुलिस बनी मूकदर्शक
- बस्ती: रेप के आरोपियों पर मेहरबान पुलिस? एक महीने से फरार हैं नामजद, पीड़िता पर समझौते का दबाव
- रेप के आरोपियों पर कब हाथ डालेगी पुलिस? रसूख के आगे दम तोड़ रहा इंसाफ
- मदरसा प्रबंधक के परिवार पर संगीन आरोप; क्या कानून से ऊपर है हाजी मुनीर का रसूख?
- बस्ती: नाबालिग से दरिंदगी के बाद ‘मैनेजमेंट’ का खेल, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
बस्ती। कप्तानगंज के ‘दारुल उलूम सुन्नत फैजुनबी’ में इस समय शिक्षा कम और कुकृत्यों की चर्चा ज्यादा है। मदरसे के चर्चित प्रबंधक हाजी मुनीर अली का रसूख ऐसा है कि उनके परिवार पर एक नाबालिग के साथ बलात्कार और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का संगीन आरोप लगा है, लेकिन पुलिस की फाइलें एक महीने से ठंडे बस्ते में पड़ी हैं।
क्या है पूरा मामला?
आरोपों के अनुसार, 28 अप्रैल की रात हाजी मुनीर अली का पोता आसिफ पीड़ित लड़की के घर में घुस गया। आरोप है कि उसने पहले लड़की का गला घोंटा, बेहोशी की हालत में उसका बलात्कार किया और फिर अपनी करतूत को छिपाने के लिए घटना का वीडियो भी बनाया। पीड़ित परिवार के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में हाजी मुनीर के बेटे अनवर (जो मदरसे के सदस्य भी हैं) और दामाद साजिद (जो मदरसे में शिक्षक हैं) की भूमिका भी संदिग्ध है।
पुलिस की चुप्पी, बढ़ते सवाल
घटना के एक माह बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी न होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है:
- मेडिकल और धारा 164 के बावजूद देरी: पीड़िता का मेडिकल मुआयना हो चुका है और अदालत में धारा 164 के तहत उसके बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं, जो मामले की गंभीरता को साबित करने के लिए पर्याप्त हैं। फिर भी, पुलिस के हाथ खाली क्यों हैं?
- धमकाने का सिलसिला: पीड़िता के परिवार का आरोप है कि आरोपी पक्ष खुलेआम इलाके में घूम रहा है और लगातार उन पर समझौता करने का दबाव बनाया जा रहा है।
- ‘मैनेज’ करने का आरोप: पीड़ित परिवार का दावा है कि हाजी मुनीर अली ने अपने धन-बल और रसूख का इस्तेमाल कर पूरे मामले को ‘मैनेज’ कर लिया है, जिसके चलते पुलिस कोई कार्रवाई करने से कतरा रही है।
मदरसे की आड़ में चल रहा ‘अनैतिक साम्राज्य’
यह केवल एक बलात्कार का मामला नहीं, बल्कि एक संस्था की विश्वसनीयता का पतन भी है। इसी मदरसे के प्रबंधक पर आरोप है कि उन्होंने अपने पांच दामादों को नौकरी दी, जबकि वहां के बच्चों के भीख मांगने की खबरें भी पूर्व में शर्मसार कर चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस व्यक्ति के परिवार के चरित्र पर इतने गंभीर दाग लग चुके हों, उसे मदरसे जैसी पवित्र शिक्षण संस्था का संचालन करने का नैतिक अधिकार नहीं है।
प्रशासन के लिए चुनौती
समाज में यह चर्चा आम है कि यदि किसी गरीब की बेटी के साथ ऐसी दरिंदगी होती है, तो उसे न्याय के लिए इतने पापड़ क्यों बेलने पड़ते हैं? पीड़िता का परिवार डरा हुआ है, जबकि आरोपी सीना तानकर घूम रहे हैं। अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस अपना फर्ज निभाते हुए आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजती है, या हाजी मुनीर का ‘रसूख’ इस बार भी कानून को हरा देगा।
न्याय की मांग: यदि पुलिस अभी भी कार्रवाई नहीं करती, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि अपराधी चाहे कितना भी बड़ा रसूखदार क्यों न हो, सत्ता और पुलिस के संरक्षण के कारण वह कानून से ऊपर है।






















