उत्तर प्रदेशबस्ती

बस्ती में ‘मिलावट का साम्राज्य’ का अंत, 10 साल से ‘अमर मसाला’ के नाम पर परोसा जा रहा था जहर

बस्ती में 'मौत का मसाला': चकदहा में 10 साल से चल रहे 'जहर के कारखाने' का भंडाफोड़! 10 साल से थाली में परोसा जा रहा था 'जहर', चकदहा के नकली मसाले के सिंडिकेट का हुआ पर्दाफाश!

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती: 10 साल से ‘जहर’ परोस रहे थे मिलावटखोर, चकदहा में नकली मसाले की फैक्ट्री का भंडाफोड़

  • बस्ती का ‘अमर मसाला’: स्वाद के नाम पर शरीर में घोला जा रहा था धीमा जहर, ऐसे खुला राज!
  • सदर तहसील की नाक के नीचे 10 साल तक चला ‘मिलावट का खेल’, खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई में खुला नेटवर्क!
  • चकदहा से मुंडेरवा तक ‘मिलावट का जाल’: कैसे फल-फूल रहा था नकली मसालों का साम्राज्य?
  • ‘अमर मसाला’ फैक्ट्री सील: बस्ती के कई बाजारों में सप्लाई हो रहा था खतरनाक मिलावटी मसाला!

बस्ती: सदर तहसील का चकदहा गाँव, जो अब तक शांति के लिए जाना जाता था, अचानक एक ऐसे काले सच का केंद्र बन गया जिसने पूरे जिले को हिलाकर रख दिया है। फूड कमिश्नर के सख्त निर्देशों के बाद चितरंजन सिंह की टीम द्वारा की गई छापेमारी में एक ऐसी सच्चाई सामने आई है, जिसे सुनकर हर कोई दंग है—यहाँ पिछले एक दशक से आम लोगों की थाली में ‘जहर’ परोसा जा रहा था।क्या आप जानते हैं कि आपकी रसोई में रखा ‘अमर मसाला’ आपकी सेहत के लिए कितना घातक हो सकता है? बस्ती जनपद के सदर तहसील अंतर्गत चकदहा गाँव में खाद्य विभाग द्वारा की गई छापेमारी ने एक ऐसे घिनौने सच को उजागर किया है, जो आपकी रूह कंपा देगा। पिछले 10 सालों से यहाँ एक ऐसा ‘मौत का कारखाना’ चल रहा था, जिसने जिले के बड़े हिस्से को धीमा जहर परोसा है।

​’अमर’ नाम, पर सेहत के लिए काल

​छापेमारी के दौरान मुख्य आरोपी के घर से भारी मात्रा में ‘अमर मसाला’ के नाम से नकली मसालों का जखीरा बरामद हुआ। जो मसाला आम घरों के स्वाद का हिस्सा था, वह असल में रसायनों और मिलावट का एक घातक मिश्रण निकला। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस नकली मसाले के सेवन से न जाने कितने लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ चुके हैं।स्थानीय लोगों और पीड़ित ग्राहकों की मानें तो पिछले कुछ वर्षों में इन इलाकों में पेट संबंधी और गंभीर बीमारियों के मामलों में अचानक उछाल आया है। जो मसाला स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था, वह असल में हानिकारक रसायनों, नकली पिगमेंट और अखाद्य पदार्थों से बना था। डॉक्टर इसे स्लो पॉइजन (धीमा जहर) करार दे रहे हैं।

​नाक के नीचे 10 साल तक कैसे चला ‘मौत का खेल’?

​सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग के दफ्तरों से महज कुछ ही दूरी पर स्थित सदर तहसील के इस इलाके में यह धंधा 10 साल तक बेखौफ कैसे फलता-फूलता रहा? क्या स्थानीय तंत्र की मिलीभगत थी या फिर किसी बड़ी संरक्षण नीति का नतीजा? एक दशक तक कानून की आँखों में धूल झोंकने वाला यह सिंडिकेट सिर्फ चकदहा तक सीमित नहीं था।फूड कमिश्नर के विशेष निर्देश पर चितरंजन सिंह की टीम ने जब चकदहा स्थित एक घर में दबिश दी, तो वहां का मंजर देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। यहाँ बड़े पैमाने पर नकली मसाले बनाए जा रहे थे। चौंकाने वाली बात यह है कि ग्रामीणों के अनुसार, यह अवैध कारोबार कोई नया नहीं, बल्कि पिछले एक दशक से फल-फूल रहा था। सालों से चल रही इस अवैध फैक्ट्री ने न केवल कानून की धज्जियां उड़ाईं, बल्कि हजारों लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया।

​जाल बना काल: कलवारी से मुंडेरवा तक सप्लाई

​जांच में खुलासा हुआ है कि इस अवैध मसाले का नेटवर्क चकदहा से निकलकर कलवारी, कुसौरा, दुबौलिया, चिलमा और मुंडेरवा तक फैला हुआ था। कुदरहा समेत पूरे इलाके में इन नकली मसालों की सप्लाई हो रही थी। एक छोटे से घर से शुरू हुआ यह सिंडिकेट पूरे जिले के बाजारों में अपनी पैठ बना चुका था।

यह कोई छिटपुट मिलावट का मामला नहीं था। यह एक संगठित सिंडिकेट था, जिसकी जड़ें जिले के चप्पे-चप्पे तक फैली थीं। जांच में जो नेटवर्क सामने आया है, वह हैरान करने वाला है:

  • सप्लाई चेन: चकदहा से शुरू होकर यह नकली मसाला कलवारी, कुसौरा, दुबौलिया, चिलमा और मुंडेरवा जैसे प्रमुख बाजारों तक पहुंच रहा था।
  • प्रसार: कुदरहा से लेकर पूरे बस्ती सदर क्षेत्र के छोटे-बड़े दुकानदार इस जहर को अपने ग्राहकों को ‘शुद्ध’ बताकर बेच रहे थे।
  • कार्यप्रणाली: आरोपी ने एक ऐसा जाल बुना था कि वह सस्ते दाम पर माल सप्लाई कर दुकानदारों को अपनी ओर आकर्षित करता था, और दुकानदार अधिक मुनाफे के चक्कर में लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे थे।

​जनता का आक्रोश: सख्त सजा की मांग

​इस छापेमारी के बाद पूरे इलाके के मिलावटखोरों में खौफ का माहौल है। वहीं, आम जनता में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जो लोग मुनाफे की खातिर बच्चों और बुजुर्गों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर सकते हैं, उन्हें सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। खाद्य विभाग ने फिलहाल सैंपल लेकर जगह को सील कर दिया है, लेकिन जनता अब केवल छापेमारी नहीं, बल्कि दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई चाहती है।बस्ती सदर तहसील के प्रशासनिक कार्यालयों और खाद्य सुरक्षा विभाग की नाक के नीचे 10 साल तक यह गोरखधंधा कैसे चलता रहा?

  • स्थानीय सुरक्षा तंत्र: क्या खाद्य विभाग के अधिकारी 10 साल तक इस अवैध फैक्ट्री से अनजान थे?
  • मिलीभगत की बू: लोगों का आरोप है कि बिना किसी संरक्षण के इतना बड़ा नेटवर्क चलाना नामुमकिन है।
  • कार्रवाई की मांग: जनता अब मांग कर रही है कि सिर्फ मुख्य आरोपी पर ही नहीं, बल्कि उन रसूखदारों पर भी कार्रवाई हो जिन्होंने इस ‘मौत के धंधे’ को संरक्षण दिया।

फिलहाल खाद्य विभाग की टीम ने बड़ी मात्रा में नकली ‘अमर मसाला’ और उसे बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री जब्त कर ली है। फैक्ट्री को पूरी तरह सील कर दिया गया है। विभाग का कहना है कि जब्त सैंपल्स को लैब में जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSSAI) की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाएगा।

यह छापेमारी तो सिर्फ एक शुरुआत है। सवाल यह है कि जिले में ऐसे और कितने ‘अमर मसाले’ के कारखाने चल रहे हैं, जो आम आदमी की थाली में जहर परोस रहे हैं? प्रशासन को अब केवल चकदहा ही नहीं, बल्कि पूरे जिले में गहन अभियान चलाने की जरूरत है, ताकि लोगों का विश्वास और स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।

सावधान रहें: यदि आप भी बाजार से खुले या संदिग्ध ब्रांड के मसाले खरीद रहे हैं, तो सतर्क हो जाएं। आपकी रसोई की शुद्धता आपकी जान बचा सकती है।

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