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उत्तर प्रदेशबस्ती

कप्तानगंज में भ्रष्टाचार की पोल: दो दिन भी न टिक सकी नाली, सभासद के पति के गिरते ही खुली निर्माण की कलई

विकास की जर्जर तस्वीर: नगर पंचायत कप्तानगंज में घटिया नाली निर्माण से जनता की जान पर आफत भ्रष्टाचार का 'खाता' खुला: नाली की छत गिरते ही हरकत में आया प्रशासन, क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर होगी कार्रवाई?

अजीत मिश्रा (खोजी)

विकास की ‘जर्जर’ तस्वीर: दो दिन भी नहीं टिक सकी नाली, भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा जनमानस का पैसा

  • कप्तानगंज टिनिच मार्ग पर ‘घटिया’ विकास: जनता के पैसे का खिलौना बना नाली का निर्माण
  • जनता का सवाल: कब तक चलता रहेगा भ्रष्टाचार का खेल, आखिर किसकी मिलीभगत से हुआ यह घटिया निर्माण?

बस्ती/कप्तानगंज: जनपद की नगर पंचायत कप्तानगंज में विकास के नाम पर हो रहे ‘खेल’ की पोल किसी बड़े प्रशासनिक जांच से नहीं, बल्कि एक शर्मनाक हादसे ने खोल दी। कप्तानगंज टिनिच मार्ग पर हो रहे नाली निर्माण की गुणवत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निर्माण के मात्र दो दिन बाद ही उसका छत भरभरा कर गिर गया।विकास कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता के दावे कैसे हवा-हवाई साबित होते हैं, इसकी बानगी कप्तानगंज नगर पंचायत में देखने को मिली। नगर पंचायत के नकटीदेई से रहरवा तक बन रहा नाला अभी जनता के लिए शुरू भी नहीं हुआ था कि निर्माण कार्य की पोल खुल गई और यह भरभराकर ढह गया। इस घटना ने निर्माण कार्य में हुई धांधली और भ्रष्टाचार की परतें खोलकर रख दी हैं।

​घटिया सामग्री का ‘दम’, चंद दिनों में ही धराशायी

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि निर्माण की शुरुआत से ही इसमें मानक विहीन और घटिया सामग्री का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा था। ग्रामीणों ने कई बार इसकी शिकायत जिम्मेदार अधिकारियों से की, लेकिन शिकायतों को हमेशा की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। नतीजा यह हुआ कि बिना किसी भारी दबाव या प्राकृतिक आपदा के, मात्र कुछ ही दिनों में नाला ढह गया। यह स्पष्ट करता है कि ठेकेदार और संबंधित विभाग ने सरकारी खजाने को लूटने के लिए निर्माण की गुणवत्ता से खिलवाड़ किया है।

‘हादसा’ बना आईना

​इस भ्रष्टाचार की कलई तब खुली जब एक सभासद के पति नाली की छत पर खड़े हुए और वह ताश के पत्तों की तरह ढह गई। नतीजतन, वे सीधे नाली में जा गिरे। यह घटना केवल एक व्यक्ति के गिरने की नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था के गिर जाने की है, जो घटिया सामग्री के इस्तेमाल से जनता के टैक्स के पैसे को पलीता लगा रही है।इस लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भी उठाना पड़ा है। नाले के ढहने की घटना के दौरान एक सभासद प्रतिनिधि का पैर फिसल गया, जिससे वे चोटिल हो गए। यह तो गनीमत रही कि घटना के वक्त वहां कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, अन्यथा घटिया निर्माण का यह ‘भ्रष्टाचार का ढांचा’ किसी की जान भी ले सकता था।

​क्या यही है विकास का ‘मॉडल’?

​तस्वीर में स्पष्ट देखा जा सकता है कि किस तरह नाली का निर्माण किया जा रहा था। सवाल यह उठता है कि क्या निर्माण कार्य के दौरान किसी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके का निरीक्षण नहीं किया था? या फिर ‘मिलीभगत’ के चलते आँखें मूंद ली गई थीं? मीडिया में खबर आते ही प्रशासन हरकत में तो आया और आनन-फानन में घटिया निर्माण को तुड़वाकर पुनः कार्य शुरू कराया गया, लेकिन यह कार्रवाई केवल ‘डैमेज कंट्रोल’ है।जब इस गंभीर मामले पर कप्तानगंज के अधिशासी अधिकारी (ईओ) शिव प्रसाद सिंह से सवाल किया गया, तो उनका जवाब बेहद सामान्य रहा। उन्होंने बताया कि खराब हिस्से को ध्वस्त करवा दिया गया है और एजेंसी को दोबारा काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

सवाल यह उठता है कि क्या केवल ‘पुनर्निर्माण’ ही समाधान है? जनता का सवाल है कि घटिया सामग्री का इस्तेमाल करने वाले ठेकेदार और उसे अनदेखा करने वाले अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी? क्या जनता के टैक्स के पैसे का उपयोग ऐसे ही बार-बार निर्माण करने के लिए किया जाएगा?

​ग्रामीणों की मांग: हो उच्चस्तरीय जांच

गुस्साए ग्रामीणों ने इस पूरे प्रकरण को बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार बताया है। स्थानीय लोगों ने उच्चाधिकारियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए। दोषियों पर केवल जुर्माना ही नहीं, बल्कि सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी अन्य निर्माण कार्य में सरकारी धन के इस तरह दुरुपयोग की हिम्मत कोई न कर सके।

कप्तानगंज का यह नाला अब भ्रष्टाचार का एक ऐसा स्मारक बन चुका है, जो नगर पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गहरा सवालिया निशान लगा रहा है।

इस घटनाक्रम के बाद क्या आपको लगता है कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस विभागीय कार्रवाई की जाएगी, या यह मामला भी पुरानी शिकायतों की तरह दबा दिया जाएगा?

जनता के तीखे सवाल

​नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठ रहे ये सवाल हर जागरूक नागरिक की जुबान पर हैं:

  • घटिया निर्माण की जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
  • क्या जनता के पैसे की बर्बादी का हिसाब कोई अधिकारी देगा?
  • क्या केवल निर्माण तुड़वा देना ही सजा है, या दोषी ठेकेदार और लापरवाह अधिकारियों पर ठोस कानूनी कार्रवाई होगी?

​नगर पंचायत प्रशासन को अब स्पष्टीकरण देना होगा कि आखिर जनता की जान को जोखिम में डालकर किए जा रहे इस ‘भ्रष्ट निर्माण’ के पीछे असली दोषी कौन है? क्या इसी तरह भ्रष्टाचार का खेल चलता रहेगा, या जिम्मेदार कुंभकर्णी नींद से जागेंगे?

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