
अजीत मिश्रा (खोजी)
आईजीआरएस में फर्जीवाड़ा: महुआ लखनपुर में ‘कागजी निस्तारण’ का खेल, गायब सफाईकर्मी पर मेहरबान अधिकारी?
- महुआ लखनपुर में सफाई व्यवस्था चौपट, सीएम पोर्टल पर शिकायत के बाद भी क्यों नहीं हो रही कार्रवाई? एडीओ पंचायत की भूमिका संदिग्ध
- बस्ती: शिकायतों के निस्तारण में ‘फर्जीवाड़ा’, ग्रामीणों ने लगाई गुहार, क्या कार्रवाई करेंगे डीपीआरओ?
- सीएम पोर्टल पर ‘धोखा’: महुआ लखनपुर में सफाईकर्मी की मनमानी और अधिकारियों की मिलीभगत की खुली पोल
बस्ती। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल’ (आईजीआरएस) का उद्देश्य आम जनता की समस्याओं का त्वरित और पारदर्शी समाधान करना है, लेकिन बस्ती जनपद के कप्तानगंज विकासखंड में यह व्यवस्था अब अधिकारियों की मिलीभगत और ‘कागजी निस्तारण’ के कारण उपहास का पात्र बन गई है। ताजा मामला महुआ लखनपुर ग्राम पंचायत का है, जहाँ सफाईकर्मी की मनमानी और अधिकारियों की लापरवाही ने सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?
महुआ लखनपुर के निवासियों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में तैनात सफाईकर्मी अशोक चौहान महीनों से ड्यूटी से नदारद हैं। गांव में गंदगी का अंबार है और बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने जब सीएम पोर्टल पर शिकायत (संख्या 92618500022305) दर्ज कराई, तो समाधान होने के बजाय सिस्टम ने उनके साथ भद्दा मजाक किया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने बिना उनसे संपर्क किए, बिना मौके पर आए, फर्जी आख्या लगाकर शिकायत का ‘निस्तारण’ कर दिया।
एडीओ पंचायत पर मिलीभगत के गंभीर आरोप
ग्रामीणों का आक्रोश इस बात पर अधिक है कि इस फर्जी निस्तारण के पीछे एडीओ पंचायत की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसकी शह पर ड्यूटी से गायब रहने वाले कर्मचारी को ‘अभयदान’ दिया जा रहा है? बिना काम किए सफाईकर्मी को हर महीने वेतन कैसे मिल रहा है? यह भ्रष्टाचार का एक बड़ा और गंभीर पहलू है, जिसकी जांच जरूरी है।
प्रधान प्रतिनिधि ने खोली पोल
इस पूरे प्रकरण में ग्राम प्रधान प्रतिनिधि गब्बर चौधरी का बयान प्रशासनिक लापरवाही की पुष्टि करता है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सफाईकर्मी की कार्यशैली को देखते हुए ग्राम पंचायत की ओर से पेरोल प्रमाणित नहीं किया गया है। यदि प्रधान की सहमति के बिना वेतन जारी हो रहा है, तो यह स्पष्ट है कि ब्लॉक स्तर पर नियमों को ताक पर रखकर वित्तीय अनियमितता की जा रही है।
जानकारी के आधार पर मामले के प्रमुख बिंदु :
- शिकायत का फर्जी निस्तारण: महुआ लखनपुर, कप्तानगंज के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सीएम पोर्टल (आईजीआरएस) पर दर्ज उनकी शिकायत संख्या 92618500022305 का निस्तारण शिकायतकर्ता से बात किए बिना ही कर दिया गया।
- सफाईकर्मी पर गंभीर आरोप: ग्राम पंचायत में तैनात सफाईकर्मी अशोक चौहान पर लंबे समय से ड्यूटी से गायब रहने का आरोप है, जिसके बावजूद उन्हें नियमित वेतन मिल रहा है।
- अधिकारियों की संलिप्तता: ग्रामीणों और शिकायतकर्ता का आरोप है कि एडीओ पंचायत की मिलीभगत से इस फर्जी निस्तारण को अंजाम दिया गया है।
- पेरोल पर स्पष्ट रुख: ग्राम प्रधान प्रतिनिधि गब्बर चौधरी ने स्पष्ट किया है कि गांव में सफाई न होने के कारण सफाईकर्मी का पेरोल प्रमाणित नहीं किया गया है।
- प्रशासनिक आश्वासन: जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) घनश्याम सागर ने मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
जवाबदेही तय करने की चुनौती
अब गेंद जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) घनश्याम सागर के पाले में है। उन्होंने जांच और कार्रवाई का आश्वासन तो दिया है, लेकिन जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या केवल रस्म अदायगी होगी या भ्रष्ट तंत्र पर कड़ा प्रहार?
निष्कर्ष:
आईजीआरएस में फर्जी निस्तारण न केवल शिकायतकर्ता के साथ अन्याय है, बल्कि यह शासन की मंशा को भी पलीता लगा रहा है। यदि इन ‘कागजी बाबूओं’ और ड्यूटी से गायब रहने वाले कर्मचारियों पर लगाम नहीं कसी गई, तो जनता का विश्वास पूरी तरह सिस्टम से उठ जाएगा। महुआ लखनपुर का मामला सिर्फ एक सफाईकर्मी का नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था का है, जो पारदर्शिता का दावा तो करती है, लेकिन हकीकत में भ्रष्टाचार को ढाल देती है।
प्रशासन को यह तय करना होगा: क्या मुख्यमंत्री का पोर्टल जनता की सेवा के लिए है या अधिकारियों के ‘फर्जी निस्तारण’ के खेल के लिए?






















