
अजीत मिश्रा (खोजी)
गाजीपुर: शिक्षा विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा, ड्यूटी के साथ उठा रहे थे पेंशन
गाजीपुर: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के रूहीपुर स्थित गंगा प्रसाद राम प्रसाद यादव इंटर कॉलेज में एक शातिराना तरीके से चल रहे पेंशन घोटाले का खुलासा हुआ है। इस मामले में 13 शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
गाजीपुर के शिक्षा विभाग में हुए इस बड़े घोटाले का विस्तृत विवरण नीचे दिया गया है, जो इस पूरे घटनाक्रम की गंभीरता को दर्शाता है:
घटना का मुख्य केंद्र: गंगा प्रसाद राम प्रसाद यादव इंटर कॉलेज
यह चौंकाने वाला मामला उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रूहीपुर इलाके में स्थित गंगा प्रसाद राम प्रसाद यादव इंटर कॉलेज से सामने आया है। कॉलेज के 13 एडहॉक शिक्षकों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी तरीके से सरकारी खजाने को चूना लगाया है।
घोटाले की कार्यप्रणाली (Modus Operandi)
जांच में कई परतें खुलीं, जिनसे पता चला कि शिक्षक बेहद शातिराना अंदाज में विभाग को धोखा दे रहे थे:
- फर्जी पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO): इन 13 शिक्षकों ने फर्जी पीपीओ दस्तावेज जमा करके अवैध रूप से पेंशन लेना शुरू कर दिया था।
- दोहरी आय: सबसे गंभीर मामला सहायक अध्यापक अशोक पांडे का सामने आया, जो स्कूल में पढ़ाकर नियमित सैलरी तो ले ही रहे थे, साथ ही फर्जी पीपीओ के आधार पर पेंशन का लाभ भी उठा रहे थे।
- मृत और पूर्व शिक्षकों के नाम का दुरुपयोग: एफआईआर में यह बात भी चौंकाने वाली है कि जिन 13 लोगों के नाम घोटाले में आए हैं, उनमें से कुछ शिक्षकों का निधन हो चुका है और कुछ काम छोड़कर जा चुके हैं, फिर भी उनके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किया गया।
- दूसरों के पीपीओ नंबर: जांच में खुलासा हुआ कि ये शिक्षक जिन पीपीओ नंबरों का उपयोग कर रहे थे, वे असल में विभाग के दूसरे असली पेंशनभोगियों के नाम पर जारी किए गए थे।
पोल कैसे खुली?
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा एक विधवा की शिकायत से हुआ:
- वर्ष 2018 में कॉलेज के शिक्षक हरिद्वार राम का निधन हो गया था।
- उनकी पत्नी प्रेमिला को जब पारिवारिक पेंशन नहीं मिली, तो उन्होंने अधिकारियों से शिकायत की।
- शिकायत में उन्होंने बताया कि उनके पति के साथ काम करने वाले शिक्षक चंद्रिका सिंह यादव और सुमंत कुमार भास्कर को पेंशन मिल रही है।
चूँकि नियमों के अनुसार एडहॉक शिक्षकों को पेंशन का लाभ मिलना ही नहीं चाहिए, इसलिए महिला की इस शिकायत ने विभाग के अधिकारियों के होश उड़ा दिए और मामले की गहराई से जांच शुरू हुई।
प्रशासन की कार्रवाई
- एफ.आई.आर (FIR): कॉलेज प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी 13 शिक्षकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज करा दी है।
- निलंबन और प्रतिबंध: मुख्य आरोपी शिक्षक अशोक पांडे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है और उनके कॉलेज परिसर में प्रवेश करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
- जांच का दायरा: तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए वाराणसी के उपनिदेशक को सूचित किया था, जिसके बाद पूरी जांच प्रक्रिया तेज कर दी गई।
एक शिकायत ने खोली पोल
इस पूरे महाघोटाले का भंडाफोड़ एक बेहद नाटकीय मोड़ के साथ हुआ। वर्ष 2018 में कॉलेज के एक शिक्षक हरिद्वार राम के निधन के बाद, उनकी पत्नी प्रेमिला को पारिवारिक पेंशन का लाभ नहीं मिला। जब उन्होंने शिकायत की, तो उन्होंने बताया कि उनके पति के साथ काम करने वाले अन्य एडहॉक शिक्षक पेंशन का लाभ उठा रहे हैं। चूँकि नियमों के अनुसार एडहॉक शिक्षकों को पेंशन नहीं मिलती, इसलिए इस शिकायत ने अधिकारियों को जांच के लिए मजबूर कर दिया।
ड्यूटी और पेंशन: दोनों का ‘मजा’
जांच में जो तथ्य सामने आए, वे बेहद हैरान करने वाले थे। 13 एडहॉक शिक्षकों ने फर्जी पीपीओ (पेंशन पेमेंट ऑर्डर) जमा करके पेंशन लेनी शुरू कर दी थी। इनमें से कुछ शिक्षक ऐसे भी थे, जिनका निधन हो चुका था या जो सेवा छोड़ चुके थे। सबसे चौंकाने वाला नाम सहायक अध्यापक अशोक पांडे का सामने आया, जो स्कूल में नियमित ड्यूटी कर वेतन तो ले ही रहे थे, साथ ही फर्जी पीपीओ के जरिए पेंशन का भी अवैध लाभ उठा रहे थे।
दूसरों के नंबरों पर चल रहा था खेल
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि ये शिक्षक जिन पीपीओ नंबरों का इस्तेमाल कर रहे थे, वे वास्तव में विभाग के अन्य असली पेंशनभोगियों के थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने आरोपी शिक्षक अशोक पांडे को निलंबित कर दिया है और उनके कॉलेज परिसर में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।
यह घोटाला न केवल वित्तीय अनियमितता का मामला है, बल्कि सरकारी दस्तावेजों और पहचान के दुरुपयोग का एक गंभीर उदाहरण भी है।






















