
सागर/वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664 * पंडित दीनदयाल उपाध्याय शासकीय कला एवं वाणिज्य विद्यालय में पीएम उषा परियोजना के अंतर्गत पर्यावरणी चुनौतियों और सततविकास विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का आयोजन किया गया। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि शैलेन्द्र जैन विधायक विषय प्रवर्तक खेत में मेड और मेड में पेड़ से चर्चा में आये पद्यश्री उमाशंकर पाण्डेय तथा अध्यक्षता डॉ. हरींसंह गौर केन्द्रीय वि.वि. के कुलपति डॉ. वाय.एस. ठाकुर ने की। स्वागत भाषण देते हुये डॉ. सरोज गुप्ता ने कहा कि विद्यार्थी भारतीय ज्ञान परम्परा से जुडे़ पूर्वजों के मूल्यों को अपनाये क्योंकि प्रकृति का संरक्षण ही प्रकृति का विकास है। मुख्य अतिथि विधायक शैलेन्द्र जैन ने कहा कि समग्र विकास भौतिक संसाधनों के साथ पर्यावरीण संरक्षण के साथ होना चाहिए। विकास सतत चलने वाली प्रक्रिया है विकास का प्रभाव पर्यावरण पर नकारात्मक न हो इसका ध्यान योजना बनाने वालो को करना होगा। जल स्त्रोतो के साथ वायु एवं मृदा का संरक्षण के संबंध में व्यापक कानून बनाकर इनका संरक्षण किया जाये। जल योद्धा एवं विषय प्रवर्तक पद्यमश्री उमाशंकर पाण्डेय ने पर्यावरण संरक्षण के संबंध में अपनी बात को पुष्ट करते हुये कहा कि जल योद्धा के रूप में पांच नाम सामने आते हैं। जिनमें भागीरथ, अनुसैया, राजा भोज, अहिल्याबाई तथा दुर्गावती इनमें छटवा नाम सागर के लाखा बंजारा का नाम भी होना चाहिये। वर्तमान समय में यह कहते हुये दुख होता है कि जल संरक्षण पर केवल कुछ ही किताबे है जबकि जल बेचने पर हजारों किताबे मिल जायेगी। विश्व में कैपटाउन जल विहीन शहर हो गया हैं भारत के बैग्लौर उसी दिशा में बढ़ता हुआ शहर है। भारत में जल पाठशाला से लेकर जल विश्वविद्यालय स्थापित करने की आवश्यकता है। भारतीय इतिहास में मेघ माला, मेघ दूत जल मंगल नमर्दाष्टक में जल बनाने के ग्रंथ है। जल धन है अतः इसे संरक्षण करे कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के कुल गुरू वाय.एस. राजपूत ने कहा कि सागर में बिजली से अंत्योष्टि करने का प्लांट फेल हो गया। जबकि अंत्योष्टि में कई कुंटल लकड़ी जलाई जा रही है। जो पेड़ कटने से ही आती है। मेडीकल कॉलेज को देहदान करके पेड़ों से लकड़ी काटने का कार्य रोका जा सकता है। डॉ. भावना यादव विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी ने कहा कि परिवर्तन विकास की परिभाषा है अतः सतत विकास सुरक्षित सकारात्मक विकास से ही किया जा सकता है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अमर कुमार जैन ने तथा आभार डॉ. शुचिता अग्रवाल ने किया। प्रथम तकनीकि सत्र में अधक्षता करते हुये पूर्व कुलपति डॉ. एस. पित्रे ने कहा कि प्राकृतिक ईधन के अनियंत्रित उपयोग से कार्बन की मात्रा वायुमंण्डल में तेजी से बड़ी है। जो ओजोन परत से नुकसान पहुंचाती है।
तकनीकि विशेषज्ञ प्रा. ए.पी. मिश्रा विभागाध्यक्ष रसायन शास्त्र ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण भविष्य की आवश्यकताओं के लिये एक अनिवार्य एवं चिंतनीय विषय है। उपभोक्तावादी संस्कृति के कारण पर्यावरीण असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो रही है। विशिष्ट अतिथि डॉ. राजेश शुक्ला ने पर्यावरण संरक्षण में आर्योवेद चिकित्सा पद्धति एवं जीवन पद्धति पर विचार रखे। सत्र में डॉ. सुबोध जैन व सचिन चतुर्वेदी ने भी पर्यावरण की समस्या पर अपने विचार रखे।
द्वितीय सत्र में डॉ. निविदिता शर्मा, बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पूर्व सदस्य ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण एक दिवसीय नही है अपितु दिन प्रति दिन व्यवहार का हिस्सा होना चाहिए। डॉ. आशीष द्विवेदी ने कहा कि पर्यावरण कोे चार पैरो वाले जानवरों से खतरा नहीं है उसको खतरा दो पैर वाले मनुष्यों से हैं। पत्रकारिता में पर्यावरण के लिये विशेष चैनल व रिपोर्टो का अभाव है। सचिन चतुर्वेदी ने यह संकल्प दिलाया कि यहां से जाने के बाद प्रत्येक विद्यार्थी एक पेड़ जरूर लगाये। डॉ. एस.के. जैन ने कहा कि निवास की कमी के कारण पशु पक्षी पर संकट उत्पन्न हो रहा है। प्रथम सत्र का संचालन डॉ. शुचिता अग्रवाल तथा आभार डॉ. अवधेष प्रताप सिंह तथा द्वितीय सत्र का संचालन डॉ. अभिलाषा जैन एवं आभार डॉ. राना कुंजर सिंह ने किया। कार्यक्रम में पूर्व जनभागीदाी अध्यक्ष विनय मिश्रा, डॉ. गोपा जैन, डॉ. रंजना मिश्रा, डॉ.संगीता मुखर्जी, डॉ. इमराना सिद्दीकी, डॉ. रेनू सोलंकी, डॉ. प्रतिभा जैन, डॉ. शैलेन्द्र सिंह राजपूत सहित महाविद्यालय के 400 विद्यार्थी उपस्थित थे।
















