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अदालत के आदेश की अवहेलना करना एस.डी.एम. खेरागढ़ को पड़ा महंगा

न्यायालय के आदेश की अवहेलना,न्यायायिक कार्य में बाधा कारित करने में एसडीएम खेरागढ़ के विरुद्ध धारा 349 में मामला दर्ज

शिवम् सिकरवार आगरा: आगरा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने एसडीएम खेरागढ़ संदीप यादव के विरुद्ध कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने, न्यायायिक कार्य में बाधा कारित करने, बार बार कोर्ट के आदेश के बाद भी जांच आख्या प्रस्तुत न करने पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए एसडीएम खेरागढ के विरूद्ध धारा-349 दण्ड प्रक्रिया संहिता के तहत कारित अपराध का प्रसंज्ञान लिया है।

कोर्ट ने कार्यालय को आदेशित किया कि न्यायालय के इस आदेश को प्रकीर्ण दाण्डिक वाद के दर्ज रजिस्टर किया जावे एवं एसडीएम खेरागढ के विरूद्ध न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के लिए दिनांक 06.09.2024 को तिथि नियत करके सम्मन जारी किया जावे।
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जानकारी के मुताबिक न्यायालय मुख्य न्यायिक महोदय आगरा की न्यायालय मे गीता देवी ने एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था जिसके संबध में एसडीएम खेरागढ़ संदीप यादव से जांच आख्या मांगी गयी थी लेकिन एसडीएम खेरागढ़ ने जांच आख्या प्रस्तुत नहीं की।
कोर्ट ने नोटिस में कहा कि

उनके द्वारा समय से आख्या न देने के कारण न्यायिक कार्य में पहुंची बाधा के लिए क्यों न उनके विरूद्ध विधिनुसार दण्डात्मक वाद दर्ज कर दण्डात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जावे ?

उक्त नोटिस में यह भी कहा गया था कि यदि नियत तिथि को एसडीएम खेरागढ स्वयं उपस्थित होकर न्यायालय के आदेश का अनुपालन नहीं करते हैं तो यह अवधारित करते हुए कि उन्हें न्यायालय की नोटिस के संबंध में कुछ नहीं कहना है, उनके विरूद्ध एकपक्षीय दण्डात्मक कार्यवाही अग्रसारित की जा सकती है।

कोर्ट का यह नोटिस मिलने के बाद भी एसडीएम खेरागढ़ न तो न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुए और न ही उन्होंने न्यायालय के समक्ष कोई लिखित जबाब दाखिल किया।
कोर्ट ने माना की नोटिस मिलने बाद भी एसडीएम का न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत न होना यह दर्शाता है कि एसडीएम खेरागढ़ के द्वारा जानबूझकर न्यायालय के आदेश की अवहेलना की जा रही है और उनके द्वारा समस्त तथ्यों से अवगत होते हुए भी जानबूझकर जांच आख्या उपलब्ध न कराकर न्यायालय के न्यायिक कार्य में बाधा उत्पन्न की जा रही है।

एसडीएम खेरागढ द्वारा पूर्व में भी कई बार न्यायालय के आदेश का अनुपालन समय से न करके आख्या प्रेषित नहीं की गयी है। इस कारण लंबित प्रकरण के निस्तारण में न्यायालय को बाधा कारित हुई है।

न्यायालय ने माना कि उनका स्पष्ट मत है कि एसडीएम खेरागढ़ आदेशों की अवहेलना करते हैं और इस बार उनके द्वारा न्यायालय की लिखित नोटिस प्राप्त होने के बाद भी उनके द्वारा उसका अनुपालन न करके न्यायालय के आदेश की अवहेलना की गयी है और इसके साथ ही न्यायिक कार्य में बाधा पहुंचाने का कार्य भी किया गया है।
अतः इस न्यायालय के मत में एसडीएम खेरागढ के विरूद्ध उपरोक्त तथ्यों के आलोक में प्रकीर्ण वाद दर्ज करके दण्डात्मक कार्यवाही किये जाने हेतु पर्याप्त व युक्ति-युक्त आधार उपलब्ध हैं।

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