
बस्ती में ‘डबल’ का दंश: SBG ग्लोबल ने सवा तीन साल में डकारी करोड़ों की पूंजी, फाउंडर पर केस दर्ज
लालच की बलि चढ़ी गाढ़ी कमाई: बस्ती में निवेश के नाम पर 'डिजिटल डकैती', 38 लाख गंवाकर न्याय की गुहार लगा रहा पीड़ित
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती में ‘डबल’ के फेर में ‘दफन’ हुई गाढ़ी कमाई: SBG ग्लोबल के मायाजाल ने निगले करोड़ों, कब तक ठगे जाएंगे मासूम?
ब्यूरो: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- सावधान! शहर में घूम रहे हैं ‘दोगुना’ करने वाले ठग: SBG ग्लोबल के मायाजाल में फंसा पांडेय बाजार का कारोबारी, FIR दर्ज
- निवेश के नाम पर महाठगी: SBG ग्लोबल के फाउंडर अनिल यादव के खिलाफ बस्ती पुलिस का शिकंजा
- बस्ती में ठगी का ‘ग्लोबल’ खेल: सब्जबाग दिखाकर लूटी मेहनत की कमाई, अब कागजों में उलझी पुलिस की जांच
बस्ती। ताश के पत्तों की तरह बिछे जाल और ‘पैसा डबल’ करने के तिलिस्म ने एक बार फिर बस्ती के आम जनमानस की मेहनत की कमाई को लील लिया है। ताज़ा मामला SBG ग्लोबल नाम की कंपनी का है, जिसके तथाकथित ‘फाउंडर’ अनिल यादव ने निवेश को दोगुना-तिगुना करने का ऐसा सब्जबाग दिखाया कि लोग अपनी जमा-पूंजी लुटा बैठे। कोतवाली पुलिस ने अब जाकर इस ठग गिरोह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, लेकिन सवाल वही है—जब लुटेरे शहर में खुलेआम जाल बिछा रहे थे, तब प्रशासन की नींद क्यों नहीं टूटी?
पाण्डेय बाजार से शुरू हुई ठगी की डरावनी दास्तां
शहर के पाण्डेय बाजार निवासी संजय प्रताप जायसवाल इस ‘डिजिटल डकैती’ के नवीनतम शिकार बने हैं। साल 2022 से शुरू हुआ यह खेल 17 जून 2025 तक चलता रहा। संजय के मुताबिक, उनसे करीब 38 लाख 25 हजार रुपए ऐंठ लिए गए। फर्जी दस्तावेज, झूठे साक्ष्य और जमीन के एग्रीमेंट का झुनझुना थमाकर आरोपियों ने विश्वासघात की सारी हदें पार कर दीं।
ठगी का पैटर्न: वही पुराना लालच, नया चेहरा
SBG ग्लोबल का यह कथित फाउंडर अनिल यादव (निवासी आजमगढ़) कोई पहला शख्स नहीं है जिसने बस्ती की भोली जनता को निशाना बनाया है। ‘कम समय में ज्यादा मुनाफा’ का फॉर्मूला हमेशा से ठगों का हथियार रहा है।
- निवेश का मायाजाल: 2022 से ही सुनियोजित तरीके से लोगों को फंसाया गया।
- टालमटोल की राजनीति: जब पैसा वापस करने का समय आया, तो जमीन के नाम पर गुमराह किया जाने लगा।
- करोड़ों की चपत: आशंका है कि संजय तो सिर्फ एक चेहरा हैं, इस कंपनी ने जिले के सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपए डकार लिए हैं।
पुलिस की सुस्ती या ठगों की चुस्ती?
कोतवाली थाना पुलिस ने अब मुकदमा दर्ज कर जांच की बात कही है। थानाध्यक्ष मोतीचंद का कहना है कि दस्तावेजों की पड़ताल हो रही है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर ये फर्जी कंपनियां शहर के पॉश इलाकों में अपने दफ्तर खोलकर लोगों को कैसे ठग लेती हैं? क्यों बिना रजिस्ट्रेशन और बिना वित्तीय गारंटी के इन ‘ग्लोबल’ लुटेरों को फलने-फूलने का मौका मिलता है?
सावधान बस्ती! लालच ही ठगों का हथियार है
यह घटना जिले के उन तमाम लोगों के लिए चेतावनी है जो रातों-रात अमीर बनने के चक्कर में अपनी मेहनत की कमाई अनजान कंपनियों के हवाले कर देते हैं। पुलिसिया कार्रवाई अपनी जगह है, लेकिन जब तक जनता जागरूक नहीं होगी, तब तक अनिल यादव जैसे ‘फाउंडर’ नए नाम के साथ आपकी जेब पर डाका डालते रहेंगे।

















