
सिद्धार्थनगर में धान की रोपाई के बीच किसानों को उर्वरकों की कमी नहीं होने दी जाएगी। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि जनपद में यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी और एसएसपी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। किसानों से अपील की गई है कि वे खतौनी, फार्मर रजिस्ट्री या सहकारी समिति की सदस्यता पासबुक के आधार पर अधिकृत उर्वरक केंद्रों से ही खाद खरीदें। वहीं उर्वरक विक्रेताओं को पीओएस मशीन के माध्यम से ही बिक्री करने, निर्धारित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराने और गैर-अनुदानित उत्पादों की टैगिंग न करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला कृषि अधिकारी रवि शंकर पाण्डेय ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि वर्तमान में धान की रोपाई तेजी से चल रही है, जिसके चलते फास्फेटिक उर्वरकों की मांग बढ़ी है। जनपद में करीब 37,621 मीट्रिक टन यूरिया, 7,895 मीट्रिक टन डीएपी, 8,154 मीट्रिक टन एनपीके, 666 मीट्रिक टन एमओपी तथा 22,034 मीट्रिक टन एसएसपी उपलब्ध है।
उन्होंने बताया कि एनपीके, टीएसपी और एसएसपी जैसे फास्फेटिक उर्वरकों में फास्फोरस और सल्फर होता है, जो पौधों की जड़ों को मजबूत बनाने और फसल की बेहतर बढ़वार में सहायक है। कृषि विभाग ने सभी सहकारी समितियों और निजी उर्वरक विक्रेताओं को निर्देश दिए हैं कि किसानों की आवश्यकता के अनुसार पीओएस मशीन से ही खाद का वितरण करें, वितरण रजिस्टर में सभी विवरण दर्ज करें और किसी भी स्थिति में निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत न वसूलें। यदि कोई विक्रेता कालाबाजारी, ओवररेटिंग या गैर-अनुदानित उत्पादों की जबरन टैगिंग करता पाया गया, तो उसके खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।







