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कितने हैं अबतक गुमशुदा?? क्या है स्थिति?

31 जुलाई को केदारघाटी में आई आपदा के बाद अब आपदा के चौथे दिन केदार घाटी के जंगलों में फंसे लोगो के रेस्क्यू का अंतिम दौर चल रहा है। आज भी अभी तक 300 से ज्यादा लोगों का एसडीआरएफ एनडीआरएफ और स्थानीय लोगों द्वारा रेस्क्यू किया गया है। अब केदारघाटी में फंसे लगभग 400 सौ लोगो को हैली से निकाला जा रहा है ।
इसी बीच कुछ दुखद खबरें भी आ रही हैं। यहां अबतक दो शव बरामद हुए हैं जिनमे एक की पहचान सहारनपुर निवासी के रूप में हुई है वहीं दूसरे शव की अभी तक शिनाख्त नहीं हो पाई है जो अभी रुद्रप्रयाग मोर्चरी में रखा हुआ है।
वहीं राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैन के रहने वाले कपिल ने बताया कि उनका 22 वर्षीय भाई हिमांशु भी 31 जुलाई को भीमबली से गायब है और उससे कोई संपर्क नही हो पा रहा है । हिमांशु इसी साल इंटर करने के बाद रोजी रोटी की तलाश में घोड़े खच्चर चलाने केदारनाथ गया था। कपिल ने बताया कि जिनके साथ उनका भाई खच्चर चलाता था उस व्यक्ति ने बताया कि खुद उसके भाई की भी मौत हो गई है।
स्थानीय प्रशासन के मुताबिक अभी तक कितने लोग गुमशुदा हुए हैं ये कह पाना मुश्किल है क्योंकि कुछ लोग प्रशासन के पास गुमशुदगी नोट तो करवा रहे हैं लेकिन कुछ ही समय बाद उनका अपने परिजनों से संपर्क हो रहा है । ऐसे में प्रशासन के पास अभी तक गुमशुदगी के कोई ठोस आंकड़े नहीं हैं। प्रशासन का कहना है कि अब रेस्क्यू अभियान लगभग पूरा होने वाला है इसके बाद अब गुमशुदगी वाले मामले में काम किया जा रहा है । ऐसे सभी परिजनों को चिन्हित किया जा रहा है जिन्होंने गुमशुदगी नोट तो करवाई है पर अब उनके अपने लोग सकुशल उन्हे मिल चुके हैं। जिनके परिजनों के लोग गुमशुदा होंगे उनकी तलाश शुरू की जाएगी।
वहीं प्रशासन दबी जुबान में अनुमान के तौर पर गुमशुदगी के आंकड़े से कम बता रहे हैं।
वहीं जब गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी आपदा ग्रसित अपने संसदीय क्षेत्र में पीड़ितो का हाल चाल पूछने केदारघाटी गए तो कांग्रेस अध्यक्ष करण महारा ने बयान जारी करते हुए कहा कि जिस चॉपर में अनिल बलूनी गए वो आपदा में कार्यों में लगता तो पीड़ितों के रेस्क्यू में मदद मिलती।
वहीं अब आपदा के ही बीच में भाजपा के पूर्व अध्यक्ष मदन कौशिक जब 2 अगस्त शिव रात्रि को केदारनाथ मंदिर में पहुंचे और फोटो सोशल मीडिया में पोस्ट किया तो उनके इस पोस्ट पर भी कांग्रेस ने बयान जारी करते हुए कहा कि एक तरफ आपदा से पूरी घाटी जूझ रही है और मंदिर दर्शनार्थीयों के लिए फिलहाल बंद है तो ऐसे में कैसे मदन कौशिक केदारनाथ पहुंच गए?
केदारनाथ में आई इस आपदा में सोनप्रयाग से केदारनाथ तक छः जगहों पर आस्था पथ बह गया है। सोनप्रयाग , गौरीकुंड , जानकीचट्टी, चीरबासा, लिंचोली, भीमबली में मार्ग बह गया है । सबसे बड़ा वॉशआउट जानकीचट्टी में है जो लगभग सौ से डेढ़ सौ मीटर बह गया है।
अब इन विभिन्न पड़ावों पर सिर्फ घोड़े खच्चर वाले हैं जिनके पास घोड़ों के लिए अभी भी चारे की आपूर्ति पूरी तरह से नहीं हो पा रही है हालांकि हैली से कुछ स्थानों पर चारा पहुंचाया जा रहा है। वहीं यहां नेटवर्क न होने से इन लोगों का अपने परिजनों से भी संपर्क नही हो पा रहा है । ऐसे में अपनो की तलाश में परिजन लगातार सोनप्रयाग पहुंच रहे हैं । वहीं अब जंगलों में फंसे ज्यादातर लोगो का रेस्क्यू भी हो चुका है कुछ लोग चोमासी के जंगलों में हो सकते हैं ।
अब यहां रास्तों को खोलने की जिम्मेदारी आर्मी ने अपने हाथों में ले ली है ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि सोनप्रयाग से केदारनाथ तक क्षतिग्रस्त मार्ग आवागमन के लिए जल्द ही सुगम हो जायेगा।
बादल फटने की घटनाओं को इस संवेदनशील उच्च हिमालय क्षेत्र में मानवीय दवाब बताया जा रहा है इसके अतिरिक्त कंशट्रकशन, अत्यधिक हैली सेवाओं की उड़ाने और पर्यावरणीय असंतुलन भी है ।





