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सिविवि से शिक्षकों के खाते में आए बजट तो शुरू हो शोध कार्य

सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में विभिन्न विषयों पर शिक्षकों द्वारा शोध करने के लिए शासन से आया बजट विश्वविद्यालय से रिलीज नहीं होने से शोध कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। जबकि 11 विषयों के लिए अलग-अलग बजट शासन से मार्च में ही स्वीकृत हो गया था। लेकिन अभी तक शासन से आई धनराशि शिक्षकों के खाते में नहीं पहुंच पाई है। इससे शोध कार्य करने में लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। जबकि बजट नहीं मिलने से लगभग सभी शिक्षक अभी तक शोध के क्षेत्र में एक भी कदम नहीं बढ़ाए है।
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में तैनात 11 शिक्षकों को रिसर्च करने के लिए प्रदेश सरकार ने 15 मार्च को धन आवंटित किया था। सभी शिक्षक अपने-अपने विषयों पर रिसर्च करेंगे और जिले के साथ पूरे प्रदेश की जानकारी शासन को भेजेंगे। नेपाल सीमा से सटे जिले में महात्मा बुद्ध से जुड़े अनेक धरोहर हैं। इसके बारे में लोगों को जानकारी देने के लिए 11 शिक्षकों को रिसर्च एंड डेवलपमेंट योजना के तहत प्राप्त प्रस्तावों के परीक्षण के लिए धन आवंटित किया गया था। नेपाल बॉर्डर के समीप होने से दोनों देश के संबंध और उसके रहन सहन के बारे में भी जानकारी ली जाएगी। रिसर्च के माध्यम से जिले में गौतम बुद्ध से जुड़े स्थानों का पता लगाया जाएगा। लेकिन अभी तक बजट शिक्षकों के खाते में नहीं आने से शोध का कार्य शुरु नहीं हो पाया है। इससे समय से शोध कार्य नहीं शुरु होने पर बजट शासन को वापस जाने का भी संभावना है। जिम्मेदारों का माने तो बजट समय से नहीं मिलने पर शिक्षकों को दोबारा मौका भी नहीं मिल सकता है। जबकि इससे शोध कार्य भी अधूरा रह जाएगा। रिसर्च के लिए शिक्षकों के विषय निर्धारित
इतिहास के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सच्चितानंद चौबे को औपनिवेशिक भारत में सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद के पारंपरिक परिप्रेक्ष्य एक अनुशीलन का शीर्षक मिला हैं। बीबीए के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विमल चंद्र वर्मा को जिले के किसानों को काला नमक चावल से लाभ के बारे में जानकारी प्राप्त करने का शीर्षक मिला हैं। प्राचीन इतिहास और संस्कृति पुरातत्व की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. वंदना गुप्ता को प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा में नारी शिक्षा आधुनिक ज्ञान संस्कार व भविष्योन्मुख दृष्टि का अध्यन करने के लिए मिला हैं। राजनीत विज्ञान की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सरिता सिंह को जिले में ग्रामीण विकास और पंचायती राज भूमिका के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए दिया गया हैं। हिंदी की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रेनू त्रिपाठी को आधुनिक हिंदी कविता में भारतीयता का स्वर व संस्कृतिक विमर्श के विषय पर रिसर्च करने के लिया मिला हैं। भौतिक विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मनीषा वाजपेई को कार्बनिक फोटोवोल्टिक के कुशल अनुप्रयोगों के लिए धातु नैनोऑक्साइड का संश्लेषण और लक्षण वर्णन के लिए मिला हैं। लोक प्रशासन विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुनीता त्रिपाठी को महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण की दिशा में महिला पुलिस की भूमिका के बारे में शोध करने के लिए मिला हैं। बीबीए विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अखिलेश दीक्षित को सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में संबद्ध महाविद्यालय में स्व वित्त पाठ्यक्रम में शिक्षकों का विकास और कल्याण के बारे में रिसर्च करने के लिए मिला हैं। प्राचीन इतिहास संस्कृति और पुरातत्व के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शरदेंदु त्रिपाठी को प्रमुख बौद्ध स्थलों का नवीन अध्ययन आर्थिक परिप्रेक्ष्य में करने के लिए मिला है। जैवप्रौद्योगिकी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ कपिल गुप्ता को उन्नत ट्राइटरपेनॉइड उत्पादन के लिए क्लिटोरिया टर्नेटिया से स्क्वैलेंस सिंथेसिस और स्क्वॉलिन एपॉक्सीडेज जीन की क्लोनिंग और विशेषता के बारे में रिसर्च करने के लिए मिला हैं।राजनीति विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अविनाश प्रताप सिंह को भारत नेपाल संबंध समसामयिक कूटनीतिक और सांस्कृतिक प्रवचन (पड़ोसी प्रथम नीति के विशेष संदर्भ में) रिसर्च करने के लिए मिला हैं।

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