
डुमरियागंज तहसील मुख्यालय स्थित डॉ. अम्बेडकर चौक पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में क्षेत्र के बौद्ध अनुयायियों ने बेवां स्थित रामकुमार लधु विद्यालय से मोटरसाइकिल जुलूस निकाला। जुलूस के दौरान “सम्राट अशोक अमर रहें”, “भगवान बुद्ध की करुणा हो”, “बौद्ध धम्म की पहचान, मानव-मानव एक समान” जैसे गगनभेदी नारे लगाए गए। जुलूस डुमरियागंज परिवर्तन चौक पहुंचकर समाप्त हुआ। जहां बौद्धाचार्य शीश कुमार अम्बेडकर ने
कIर्यक्रम में भारतीय बौद्ध महासभा के प्रांतीय अध्यक्ष निर्भय कुमार जैसल ने सम्राट अशोक के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कलिंग युद्ध के बाद सम्राट अशोक ने हिंसा का त्याग कर बौद्ध धर्म को अपनाया। उन्होंने कहा कि आज की परिस्थितियों में हमें सम्राट अशोक से सीख लेकर उनके अहिंसा और शांति के मार्ग पर चलने की जरूरत है। गंगाराम नायक ने भी सम्राट अशोक के जीवन से प्रेरणा लेने पर जोर दिया और कहा कि आज आतंकवाद जैसी समस्याओं से निपटने के लिए हमें उनके आदर्शों को अपनाना होगा।
भारतीय बौद्ध महासभा के जिलाध्यक्ष राममिलन गौतम ने सम्राट अशोक के धर्म-प्रचार के योगदान की सराहना करते हुए बताया कि उन्होंने न केवल भारत में बल्कि श्रीलंका, अफ़गानिस्तान, मिस्र और यूनान तक बौद्ध धर्म का प्रचार किया। उन्होंने कहा कि सम्राट अशोक ने कभी युद्ध में हार का सामना नहीं किया और उनके शासनकाल में तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला जैसे 23 विश्वविद्यालयों की स्थापना हुई।
ये लोग रहे मौजूद
इस दौरान विजय कुमार, सचिन भास्कर, संतोष सिंघानिया, दिलीप कुमार, अमरेंद्र कुमार, संतोष आजाद, ओमप्रकाश, वीरेंद्र सक्सेना, सूर्यबली, श्रीराम राम बक्स, अनिल गौतम, जय भीम अम्बेडकर, राम नरेश, हरिकेश गौतम, मनोज फोटो, आदि मौजूद रहे।




