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बिसाहू दास महंत अस्पताल में डॉक्टरों की मनमानी, मरीजों को हो रही परेशानी  

जिला संवाददाता सुखदेव कुमार आजाद

 

 

जिला जांजगीर चांपा शहर चांपा के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल बिसाहू दास महंत में डॉक्टरों की लापरवाही और समय पर उपस्थित न होने की समस्या गंभीर बनी हुई है। मरीजों की बढ़ती संख्या के बावजूद डॉक्टर अपनी ड्यूटी पर समय से नहीं पहुंचते, जिससे मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।

 

कलेक्टर के आदेशों की अनदेखी

 

जिले के कलेक्टर द्वारा सभी सरकारी कार्यालयों और अस्पतालों के कर्मचारियों को सुबह 10 बजे तक उपस्थित होने और राष्ट्रगान के बाद कार्यभार संभालने का निर्देश दिया गया है। लेकिन बिसाहू दास महंत अस्पताल में इस आदेश की खुलेआम अवहेलना हो रही है। शुक्रवार, 28 फरवरी 2025 को निरीक्षण के दौरान देखा गया कि जिन डॉक्टरों की ड्यूटी लगी थी, वे सुबह 10:20 तक भी अस्पताल नहीं पहुंचे थे।

 

मरीजों की लंबी कतार, डॉक्टर गायब

 

यह अस्पताल चांपा नगर और आसपास के ग्रामीण इलाकों के मरीजों के लिए एकमात्र बड़ा सरकारी अस्पताल है, जहां सुबह 9 बजे से ही मरीजों की भीड़ लगनी शुरू हो जाती है। लेकिन डॉक्टर अक्सर साढ़े दस बजे के बाद आते हैं, जिससे मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। कुछ मरीज दूर-दराज के गांवों से आते हैं, लेकिन डॉक्टरों के समय पर उपस्थित न होने के कारण उन्हें बिना इलाज के ही लौटना पड़ता है।

 

निजी क्लीनिक चला रहे डॉक्टर, अस्पताल की छवि खराब

 

बताया जाता है कि अस्पताल में कार्यरत कई डॉक्टर स्थानीय निवासी हैं और वर्षों से यहीं जमे हुए हैं। इनका ध्यान अस्पताल से अधिक अपने निजी क्लीनिक पर रहता है, जहां वे अधिक कमाई कर सकते हैं। अस्पताल में हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन सेवा-भाव की कमी के कारण मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है।

 

स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट, प्रशासन मौन

 

यह अस्पताल पूर्व केंद्रीय मंत्री चरणदास महंत के पिता स्व. बिसाहू दास महंत के नाम पर स्थापित किया गया था, ताकि यह जनसेवा का प्रतीक बन सके। लेकिन डॉक्टरों की लापरवाही और प्रशासन की उदासीनता के कारण इसकी छवि धूमिल हो रही है।

 

प्रशासन को चाहिए कि

 

1. डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम लगाया जाए।

 

2. समय पर ड्यूटी न करने वाले डॉक्टरों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

 

 

3. डॉक्टरों के निजी क्लीनिकों की जांच की जाए और सरकारी अस्पताल की अनदेखी करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।

 

अगर प्रशासन ने जल्द ही इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं किया, तो यह अस्पताल मात्र एक नाम बनकर रह जाएगा और जनता का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से विश्वास उठ जाएगा।

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