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बड़ी खबर | जनसुनवाई पोर्टल बना जनउपेक्षा का प्रतीक? मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायत 30 दिन में नहीं मिली सुनवाई, सहारनपुर मंडल के अफसरों की कार्यशैली पर उठे सवाल

सहारनपुर मंडल के एक नागरिक द्वारा दर्ज कराई गई गंभीर शिकायत में न तो किसी जांच अधिकारी ने संपर्क किया, न ही घटनास्थल का कोई निरीक्षण किया गया।

🟥 बड़ी खबर | जनसुनवाई पोर्टल बना जनउपेक्षा का प्रतीक?

मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायत 30 दिन में नहीं मिली सुनवाई, सहारनपुर मंडल के अफसरों की कार्यशैली पर उठे सवाल

📍 सहारनपुर | विशेष संवाददाता – एलिक सिंह
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए शुरू किए गए मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल की साख पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सहारनपुर मंडल के एक नागरिक द्वारा दर्ज कराई गई गंभीर शिकायत में न तो किसी जांच अधिकारी ने संपर्क किया, न ही घटनास्थल का कोई निरीक्षण किया गया। इतना ही नहीं, संबंधित विभाग द्वारा भ्रमित करने वाले पत्राचार के आधार पर शिकायत को बंद कर दिया गया, जिससे शिकायतकर्ता का 30 दिन से अधिक समय बर्बाद हो गया।

✍️ क्या है पूरा मामला?

शिकायतकर्ता द्वारा मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर मंडलायुक्त सहारनपुर के नाम एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही की शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें जांच व कार्रवाई की अपेक्षा की गई थी। लेकिन:

  • न कोई जांच अधिकारी नियुक्त किया गया,

  • न कोई कॉल या मेल के माध्यम से संपर्क किया गया,

  • और न ही मौके पर जाकर वास्तविकता की पुष्टि की गई।

इसके उलट, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने दिनांक 26 अप्रैल 2025 को एक पत्र जारी कर, केवल दो दिन बाद 28 अप्रैल को ही शिकायत का निस्तारण कर दिया, वह भी भ्रम फैलाने वाली औपचारिकता के सहारे।

⚠️ जनसुनवाई या जनउपेक्षा?

यह घटना केवल एक व्यक्ति की शिकायत नहीं, बल्कि एक व्यवस्थागत विफलता का संकेत है। यदि मुख्यमंत्री के नाम की गई शिकायत पर भी अधिकारियों का यही रवैया है, तो आमजन की छोटी-मोटी समस्याओं पर क्या ध्यान दिया जाता होगा?

  • शिकायतकर्ता ने अब RTI के माध्यम से जानकारी मांगने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

  • वहीं, प्रथम अपील दायर कर दी गई है, जिसमें कहा गया है कि पोर्टल की छवि को नुकसान पहुंचा है।

📢 जनता का सवाल:

“जब मुख्यमंत्री का नाम लेकर शिकायत करें और अफसर ही संजीदगी न दिखाएं तो फिर पोर्टल किसके लिए?”

📍 बड़ी जांच की मांग

अब यह मांग उठ रही है कि:

  • इस तरह के फर्जी या औपचारिक निस्तारण की गहराई से जांच हो।

  • संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

  • मुख्यमंत्री कार्यालय इस मामले को नजीर बनाए ताकि जनसुनवाई पोर्टल की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रह सके।


🖊️ एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
जिला प्रभारी – भारतीय पत्रकार अधिकार परिषद
📞 मो.: 8217554083

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