

++++++वंदेभारतलाइवटीव न्युज, ++++++++
रविवार 14 सितंबर 2025-: प्राप्त जानकारी के अनुसार देश में जनगणना 2027 की शुरुआत में होगी। सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायद जनगणना 2027 की शुरुआत करने से पहले ही पूरे तंत्र की जांच पड़ताल के 01 अक्टूबर 2025 से माॅक ड्रिल शुरू होगी। प्राप्त जानकारी अनुसार यह मॉक ड्रिल करीब 60 दिनों तक चलाई जायेगी। इसके अंतर्गत विभिन्न गतिविधियों की जांच की जायेगी। माॅक ड्रिल में प्राप्त अनुभवों के आधार पर छह महिने में खामियों को दूर करके फिर 01 अप्रैल 2026 से वास्तविक जनगणना आरंभ की जायेगी। जानकारी अनुसार माॅक ड्रिल में जनगणना की कमी पूरी प्रशासनिक मशीनरी की जांच और उस पर काम करने का अभ्यास किया जायेगा। इसके तहत स्मार्ट मैप हाउस लिस्टिंग के तरीके, डेटा एकत्रित करना, रियल टाइम डेटा ट्रांसफर , घर घर पहुंचकर लोकेशन जांचना , एप्प में हर घर की जियो पिन बनाना , तथा उसके अक्षांश देशांतर के जीपीएस बनाने की पड़ताल भी की जायेगी। इस दौरान हाउस लिस्टिंग में सबसे बड़ी जांच डिजिटल लेआऊट मैपिंग की होगी। इसके अंतर्गत मकानों, तथा सभी प्रतिष्ठानों की जियो टैगिंग भी होगी। जनगणना कर्मी घर घर पहुंचकर एप्प में लोकेशन ऑन करेंगे और उसे मैप पर पिन करेंगे। इस प्रकार मकान या प्रतिष्ठान की जियो टैगिंग भी हो जायेगी। इसके लिए हर गांव कस्बे शहर के डॉट बनकर जीपीएस मानचित्र भी बन जायेगी। जानकारी के अनुसार जियो टैगिंग से बना हुआ डिजिटल लेआउट, मैप बादल फटने या बाढ़ आने , भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा के समय उपयोगी भी साबित होगी। सूदूर हिमालय जैसे क्षेत्र में बसे हुए किसी गांव में बादल फटने जैसी किसी घटना के होने पर इस डिजिटल मैप की सहायता से शीघ्र ही पता चल सकेगा कि किस घर में कितने लोग रहते हैं। होटलों की क्षमता के हिसाब से कितने लोग रहे होंगे। इस पूरी जानकारी से राहत बचाव कार्य के लिए जरूरी साधन जैसे नौका हेलीकॉप्टर, खाद्य सामग्री पैकेज आदि की व्यवस्था पहुंचाने मे मदद भी मिल सकेगी। जियो टैगिंग से बना डिजिटल लेआउट मैप से – राजनीतिक सीमाएं, जैसे की संसदीय या विधानसभा क्षेत्रों, का युक्तिसंगत तरीके से निर्धारण करने में भी मदद मिल सकेगी। जियो टैगिंग से तैयार किए गए मैप से यह तस्वीर भी साफ हो जारेगी की क्षेत्र में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र का संतुलित बंटवारा कैसे हो। समुदायों को ऐसे न बांट दिया जाये कि एक मोहल्ला एक क्षेत्र मे हो और दूसरा मोहल्ला किसी दूसरे क्षेत्र में चला जाए। घरों के डिजि डॉट से डिलिमिटेशन की भी प्रक्रिया सहज हो जायेगी। जियो टैगिंग मै से शहरी प्लानिंग भी आसान होगी- शहरों में सड़कों, गलियों, स्कूलों, अस्पतालों, पार्को की भी प्लानिंग करने में डिजिटल मैप मदद करेगा। यदि किसी स्थान के घरों के डिजिटल लेआउट में बच्चों की संख्या अधिक होगी तो पार्क अथवा स्कूल आदि बनाने की योजना बनाई जा सकेगी। यदि किसी बस्ती में कच्चे मकानों य खराब घरों की संख्या भी अधिक होगी तो वहां किसी भी मेडिकल इमरजेंसी के समय पर तत्काल मोबाईल राहत वैन को भी भेजी जा सकेगी। जियो टैगिंग मैप से शहरीकरण तथा पलायन दर का डेटा भी आसानी मिल सकेगा-जनगणना होने के दस वर्ष बाद फिर होने वाली जनगणना में डिजिटल मैप के परिवर्तन आसानी के साथ दर्ज किए जा सकेंगे। इससे देश के विभिन्न भागों में शहरीकरण की दर और पलायन के क्षेत्रों की मैपिंग की भी तुलना सही तरीके से किया जा सकेगा। जियो टैगिंग मैप की मदद से मतदाता सूची से फर्जी मतदाताओं के नाम हटाने में भी मदद होगी- आधार की पहचान कः साथ-साथ जियो टैगिंग मतदाता सूची को शुद्ध और मजबूत बनाने मे भी मददगार साबित होगी। जब मतदाता किसी भौगोलिक स्थान से डिजिटल तरीके से जुड़ा हुआ होगा तो फिर दोहरे पंजीकरण के समय पर उसके मूल निवास स्थान का भी पता चल सकेगा। यह एक प्रकार क्रांति है, पहले अंदाजे के साथ बने स्कैच से लोकेशन तय की जाती थी। अब पूरे देशभर का डिजिटल लेआउट होगा। इससे सरकारी सेवाओं सुविधाओं, की आपूर्ति एवं राहत बचाव कार्यों में इसका उपयोग किया जा सकेगा।







