

सहारनपुर। मिशन शक्ति में सहारनपुर पुलिस की संवेदनशीलता: भीड़ में बिछड़ी नन्ही परी सकुशल परिवार से मिली
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर संचालित मिशन शक्ति अभियान ने एक बार फिर मानवीय संवेदनशीलता की मिसाल पेश की। सहारनपुर के ऐतिहासिक मां शाकुंभरी देवी धाम में चल रहे मेले के दौरान हजारों की भीड़ के बीच एक नन्ही बच्ची अपने माता-पिता से बिछड़ गई। बच्ची इतनी छोटी थी कि अपना नाम, पता या परिवार की कोई जानकारी नहीं दे पा रही थी। अचानक भीड़ के बीच रोती हुई इस मासूम को देखकर मेले में तैनात पुलिसकर्मी तुरंत सक्रिय हो गए। महिला आरक्षी ज्योति वर्मा और महिला मुख्य आरक्षी कविता ने बच्ची को गोद में उठाकर शांत कराने की कोशिश की और उसे तुरंत खोया–पाया केंद्र पर ले जाकर सुरक्षित रखा। पुलिस ने समय न गंवाते हुए मेले के सभी प्रवेश और निकास द्वारों पर बच्ची के मिलने की सूचना प्रसारित करवाई और लाउडस्पीकरों से बार-बार अनाउंसमेंट कराए। भीड़ में मौजूद लोग भी इस दृश्य को देखकर पुलिस के मानवीय रवैये की सराहना करने लगे। बच्ची, जिसे बाद में “परी” के नाम से जाना गया, लगभग पाँच घंटे तक पुलिस की देखरेख में सुरक्षित रही। इस दौरान महिला आरक्षियों ने उसे अपने बच्चे की तरह संभाला, पानी पिलाया और स्नेह से उसे डर और घबराहट से दूर रखा। शाम को जब उसके माता-पिता उसे खोजते हुए खोया–पाया केंद्र पहुंचे, तो मासूम परी अपनी मां को देखते ही उनकी गोद में दौड़ पड़ी। इस पल को देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। माता-पिता ने भावुक होकर सहारनपुर पुलिस का आभार जताया और कहा कि पुलिस की तत्परता और संवेदनशीलता ने उनकी बेटी को सकुशल घर पहुंचा दिया। यह घटना न केवल सहारनपुर पुलिस की चुस्ती और सतर्कता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि मिशन शक्ति जैसे अभियान समाज में सुरक्षा और विश्वास की नई उम्मीद जगाते हैं। मेले में मौजूद अन्य श्रद्धालुओं ने भी कहा कि पुलिस की उपस्थिति और उनके सक्रिय सहयोग से लोग निश्चिंत होकर पूजा-अर्चना कर पाए। विशेष रूप से महिला पुलिस कर्मियों की भूमिका सराहनीय रही, जिन्होंने बच्ची की तरह-तरह से देखभाल की और यह दर्शाया कि कानून व्यवस्था की ड्यूटी के साथ-साथ मानवता भी उनके कर्तव्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस पूरे घटनाक्रम ने यह संदेश दिया कि भीड़भाड़ वाले धार्मिक आयोजनों में बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा पुलिस की शीर्ष प्राथमिकता होती है। सहारनपुर पुलिस ने न केवल इस घटना से मिशन शक्ति की भावना को मजबूती दी, बल्कि स्थानीय लोगों के विश्वास को भी और गहरा किया कि संकट के समय पुलिस उनके साथ खड़ी है। सुरक्षा के साथ संवेदनशीलता का यह उदाहरण दर्शाता है कि जब प्रशासन और पुलिस मिलकर मानवता को प्राथमिकता देते हैं, तो समाज में विश्वास और शांति स्वतः स्थापित होती है।














