
।। टांडा पुल खोलने पर उठे सवाल, ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आई मरम्मत कार्य की गंभीर खामियां ।।
।। तीन महीने बाद 13 दिसंबर 2025 को इसे दोपहिया और हल्के चारपहिया वाहनों के आवागमन के लिए खोल दिया गया।।
।। जोखिम भरा टांडा पुल -अधूरा,मानक विहीन निर्माण,निकली सरिया,लोहे के एंगल और चालू कर दिया गया टांडा पुल ।।
अजीत मिश्रा (खोजी)
टांडा पुल खोलने पर उठे सवाल, ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आई मरम्मत कार्य की गंभीर खामियां ।
बस्ती 14 दिसंबर 25 उत्तर प्रदेश।
बस्ती से कलवारी होते हुए अकबरपुर–बनारस मार्ग पर घाघरा नदी पर बने टांडा पुल को 11 सितंबर 2025 को मरम्मत कार्य के लिए पूरी तरह बंद किया गया था। लगभग तीन महीने बाद 13 दिसंबर 2025 को इसे दोपहिया और हल्के चारपहिया वाहनों के आवागमन के लिए खोल दिया गया, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। मौके पर जाकर पुल खुलकर मरम्मत कार्य की गुणवत्ता का निरीक्षण किया गया। ग्राउंड रिपोर्ट में जो सामने आया, वह बेहद चिंताजनक है। पुल पर चल रहा मरम्मत कार्य प्रथम दृष्टया ही निम्न स्तर का प्रतीत होता है और वर्तमान स्थिति में यह दोपहिया व हल्के चारपहिया वाहनों के लिए भी सुरक्षित नहीं कहा जा सकता।
पुल के अधिकांश जॉइंट्स पर पतली-पतली सरिया बाहर निकली हुई है, जो नुकीली और खतरनाक स्थिति में है। यह न केवल दोपहिया वाहनों बल्कि चारपहिया वाहनों के टायरों के लिए भी गंभीर जोखिम पैदा कर रही है। पुल का आधे से अधिक हिस्सा अब भी अधूरा है, बावजूद इसके आवागमन शुरू कर दिया गया है।
निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि कार्यदायी संस्था द्वारा लगभग एक इंच पुरानी कंक्रीट हटाकर नीचे दिखाई देने वाली सरिया को तोड़ दिया गया है और उसके ऊपर डामर-गिट्टी की परत बिछा दी गई है। यह परत देखने में ही मानकविहीन प्रतीत हो रही है और इसकी मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। पुल के बीच स्थित ओवरहाइट हिस्से पर मजदूर सरिया निकालकर तोड़ते हुए पाए गए। जैसे ही मीडिया द्वारा वीडियो बनाया जाने लगा, मजदूरों ने काम रोक दिया और यह कहते हुए पीछे हट गए कि रिकॉर्डिंग की जा रही है। इसके आगे मशीनों के माध्यम से सड़क पर डामर और गिट्टी का लेपन किया जा रहा था। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मरम्मत कार्य अभी आधा-अधूरा है और गुणवत्ता पर गंभीर संदेह है, तब ऐसे पुल को आवागमन के लिए खोलने का फैसला किस आधार पर लिया गया। यह निर्णय आम लोगों की सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ प्रतीत होता है।

गौरतलब है कि कुछ ही दिन पहले बस्ती के पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी द्वारा पुल पर शीघ्र आवागमन शुरू कराने को लेकर एक पत्र लिखा गया था। ऐसे में यह आशंका भी जताई जा रही है कि कहीं उस पत्र की गरिमा बनाए रखने के लिए ही अधूरे और मानकविहीन पुल को जल्दबाजी में खोल तो नहीं दिया गया। अब जरूरत इस बात की है कि जिम्मेदार विभाग तत्काल पुल की तकनीकी जांच कराए और जब तक मरम्मत कार्य पूरी तरह मानकों के अनुरूप सुरक्षित न हो जाए, तब तक आम जनता की जान जोखिम में डालने से बचे।
















