
किसानों की पीठ में छुरा: हरैया में नकली यूरिया का ‘काला साम्राज्य’ ध्वस्त!
सफेद जहर का सौदागर गिरफ्तार: हाईवे किनारे फैक्ट्री डाल उगल रहे थे मौत!
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: हरैया में ‘सफेद जहर’ के काले कारोबार का भंडाफोड़! हरैया पुलिस की बड़ी स्ट्राइक: नेशनल हाईवे पर चल रही ‘नकली फैक्ट्री’ का भंडाफोड़!
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (यूपी)
- सावधान! आपकी फसल निगल रहा था महूघाट का यह नकली यूरिया प्लांट! विकास की एक कॉल और ढह गया मिलावटखोरों का किला; पिकअप और मशीनें जब्त।
- DEF के नाम पर ‘अवैध खेल’: टाटा एजेंसी के सामने पुलिस का छापा, मची खलबली। नकली यूरिया के जखीरे के साथ पुलिस ने दबोचे मौत के सौदागर।
- नकली यूरिया पर हरैया पुलिस का हंटर: हाईवे पर चल रहा था अवैध धंधा। रंगे हाथ पकड़ी गई नकली यूरिया बनाने वाली गैंग!
हरैया (बस्ती)। नेशनल हाईवे पर बेखौफ चल रहे मौत के सौदागरों के खिलाफ हरैया पुलिस ने एक बड़ी स्ट्राइक की है। महूघाट गांव के पास टाटा एजेंसी के ठीक सामने चल रही अवैध फैक्ट्री पर छापा मारकर पुलिस ने नकली यूरिया और DEF (डीजल एग्जांस्ट फ्लूइड) के जखीरे को बरामद किया है। यह कार्रवाई महज़ एक रूटीन चेकिंग नहीं, बल्कि उस सिंडिकेट पर चोट है जो किसानों की मेहनत और मिट्टी, दोनों को बर्बाद करने पर तुला था।

जागरूक नागरिक ने खोली पोल
इस पूरे काले साम्राज्य का पर्दाफाश तब हुआ जब विकास कुमार नामक एक जागरूक नागरिक ने हिम्मत दिखाई। विकास ने 112 PRV और स्थानीय पुलिस को सूचना दी कि हाईवे के किनारे बंद दरवाजों के पीछे नकली यूरिया बनाने का खेल चल रहा है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, दो शातिर अपराधी दिन-दहाड़े नकली यूरिया भरने और इसे बनाने के काम में लगे थे।
पुलिसिया कार्रवाई: मौके से बरामद हुआ सामान
सूचना मिलते ही एक्टिव हुई हरैया पुलिस ने मौके पर धावा बोला। पुलिस को वहाँ से एक टाटा पिकअप और भारी मात्रा में नकली यूरिया बनाने वाले यंत्र और उपकरण बरामद हुए हैं। बताया जा रहा है कि यहाँ अवैध रूप से DEF (जो गाड़ियों के धुएं को कम करने के काम आता है) भी बनाया जा रहा था, जो सीधे तौर पर इंजन और पर्यावरण के साथ खिलवाड़ है।
“पुलिस ने मौके से गाड़ी और अवैध मशीनों को कब्जे में ले लिया है। आरोपियों के खिलाफ कठोर विधिक कार्यवाही की जा रही है।” — पुलिस सूत्र
सवाल जो खड़े होते हैं:
- प्रशासन की नाक के नीचे: नेशनल हाईवे जैसे व्यस्त इलाके में टाटा एजेंसी के सामने आखिर इतने समय से यह अवैध फैक्ट्री कैसे फल-फूल रही थी?
- किसानों की बर्बादी: नकली यूरिया का यह जखीरा किन दुकानों तक पहुँचने वाला था? कितने किसानों की फसलें इस ‘सफेद जहर’ की भेंट चढ़ गईं?
- मास्टरमाइंड कौन?: पकड़े गए दो लोग तो सिर्फ मोहरे हो सकते हैं, इस अवैध फैक्ट्री के पीछे का असली ‘आका’ कौन है?

निष्कर्ष: हरैया पुलिस ने भले ही इस बार सफलता पा ली हो, लेकिन यह मामला जिले के अन्य संदिग्ध ठिकानों की जांच की मांग करता है। पुलिस अब इस मामले के तार खंगाल रही है ताकि इस धंधे से जुड़े हर चेहरे को बेनकाब किया जा सके।



















