उत्तर प्रदेशबस्ती

कप्तानगंज वन रेंज में ‘हरा सोना’ लूट: रेंजर को गुमराह कर, माफिया की गोद में खेल रहे विभाग के ‘विभीषण’

थाने के बगल में 'आरी' की गूंज: क्या रेंजर राजू प्रसाद के आदेशों की अब विभाग में ही कोई औकात नहीं?

अजीत मिश्रा (खोजी)

कप्तानगंज वन रेंज में ‘हरा सोना’ लूटने का खेल: रेंजर की साख पर बट्टा लगा रहे विभाग के ‘भीषण’

ब्यूरो रिपोर्ट | बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश

  • कप्तानगंज में कट रहे हरे पेड़, रेंजर की साख पर भारी पड़ रही विभाग के ही ‘भ्रष्ट’ कर्मचारियों की तिकड़म
  • वन विभाग का ‘खेल’, रेंजर की ‘धूमिल छवि’: कप्तानगंज में बेखौफ लकड़ी माफिया
  • हरा भरा कप्तानगंज उजाड़ने पर तुले विभागीय कर्मचारी; रेंजर के सख्त फरमानों को दिखा रहे ठेंगा

कप्तानगंज: एक तरफ उत्तर प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘वृक्षारोपण महाअभियान’ चला रही है और हरे पेड़ों को काटने पर 10 हजार रुपये जुर्माने का कड़ा शासनादेश लागू है। वहीं, बस्ती जिले की कप्तानगंज वन रेंज में रेंजर राजू प्रसाद की साफ-सुथरी छवि को धूमिल करने के लिए वन विभाग के ही कुछ कर्मचारी ‘लकड़ी माफियाओं’ के साथ मिलकर ‘हरा सोना’ लूटने का खेल खेल रहे हैं।

​रेंजर को गुमराह करने का ‘सुनियोजित खेल’

​सूत्रों की मानें तो रेंजर राजू प्रसाद जब भी क्षेत्र में अवैध कटान की सूचना पाते हैं, तो विभाग में बैठे कुछ ‘आस्तीन के सांप’ उन्हें गलत जानकारी देकर गुमराह कर देते हैं। रेंजर की आंखों में धूल झोंककर माफियाओं को संरक्षण देने का यह सिलसिला अब बेलगाम हो चुका है। कप्तानगंज थाने के बिल्कुल बगल में बिना किसी परमिट के दो आम के पेड़ों की कटान इसका जीता-जागता सबूत है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस घटना पर न तो वन विभाग ने संज्ञान लिया और न ही कप्तानगंज पुलिस ने, जो इस मामले को केवल वन विभाग का बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ती नजर आई।

​लीपापोती की भेंट चढ़े मामले

​अवैध कटान की घटनाएं कप्तानगंज रेंज के कई गांवों में नासूर बन चुकी हैं:

  • ग्राम पंचायत पोखरा (अहिरौलिया/रौहलिया): यहां आम के पेड़ पर आरी चली।
  • ग्राम पंचायत पिनेसर (निषाद पुरवा): बड़ी संख्या में आम और सागौन के पेड़ धराशायी कर दिए गए।
  • ग्राम पंचायत शुक्लपुरा (तिवारी पुर): आम, गूलर, नीम और सागौन के पेड़ों का सफाया कर दिया गया।

​इन तमाम मामलों में शिकायतें होने के बावजूद जांच के नाम पर केवल ‘लीपापोती’ की गई। न कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही माफियाओं के हौसले पस्त हुए।

​रेंजर के आदेशों की उड़ रही धज्जियां

​रेंजर राजू प्रसाद द्वारा हरे पेड़ों के कटान पर सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन उनके अपने ही महकमे के कुछ लोग इन निर्देशों का मजाक उड़ा रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या रेंजर साहब अपने ही विभाग के इन ‘बाधक कर्मचारियों’ पर नकेल कसने में नाकाम साबित हो रहे हैं? या फिर माफियाओं की पहुंच रेंजर के कार्यालय तक इतनी गहरी हो चुकी है कि सख्त आदेश भी कागजों तक सिमटकर रह गए हैं।

​अब क्या करेंगे रेंजर साहब?

​अगर रेंजर राजू प्रसाद ने अब भी आंखें नहीं खोलीं और दोषी कर्मचारियों के साथ-साथ लकड़ी माफियाओं पर कठोर कानूनी डंडा नहीं चलाया, तो यह क्षेत्र पूरी तरह से वृक्ष विहीन हो जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रेंजर ने इस बार कड़ा रुख अपनाया, तो लकड़ी माफियाओं के बीच हड़कंप मच सकता है और अवैध कटान पर लगाम लग सकती है।

​अब देखना यह है कि रेंजर राजू प्रसाद अपनी साख बचाने के लिए इन ‘विभीषणों’ को बेनकाब करते हैं या फिर ये अवैध कटान इसी तरह रेंजर की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाता रहेगा।

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