न्याय की बाट जोहता मृतक का परिवार: सीजेएम कोर्ट के आदेश के बाद भी कप्तानगंज पुलिस खामोश
न्यायपालिका के आदेश की अवमानना: सीजेएम कोर्ट के आदेश के सात दिन बाद भी कप्तानगंज पुलिस ने दर्ज नहीं की एफआईआर बिजली विभाग की लापरवाही से हुई मौत: सीजेएम कोर्ट के सख्त निर्देश के बावजूद कप्तानगंज पुलिस की चुप्पी सवालों के घेरे में
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती पुलिस की हठधर्मिता: सीजेएम के आदेश को हवा में उड़ा रहा कप्तानगंज थाना, वृद्ध की मौत के मामले में एफआईआर दर्ज करने से इनकार
- मृतक का परिवार न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर; कोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ा रहा कप्तानगंज थाना
- क्या कप्तानगंज पुलिस न्यायलय से ऊपर है? विद्युत विभाग की लापरवाही के मामले में कार्रवाई से कतरा रही पुलिस
- चौखड़ा गांव का दर्द: सीजेएम के आदेश के बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं, पुलिस की सुस्ती पर उठे गंभीर सवाल
- जिम्मेदारों को बचाने की कोशिश? कोर्ट द्वारा संज्ञेय अपराध माने जाने के बाद भी कप्तानगंज पुलिस का टालमटोल रवैया
बस्ती: जनपद के कप्तानगंज थाना क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और संवेदनहीनता का मामला सामने आया है। बिजली विभाग के जिम्मेदारों की लापरवाही से एक वृद्ध की हुई जानलेवा मौत के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम), बस्ती के स्पष्ट आदेश के एक सप्ताह बाद भी कप्तानगंज पुलिस ने अब तक मुकदमा (FIR) दर्ज नहीं किया है। न्यायालय के आदेशों के प्रति पुलिस का यह रवैया न केवल कानून की अवमानना है, बल्कि एक पीड़ित परिवार के साथ घोर अन्याय भी है।क्या जनपद के कप्तानगंज थाने की पुलिस न्यायलय से ऊपर है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि बिजली विभाग की लापरवाही से हुई एक वृद्ध की दर्दनाक मौत के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) बस्ती के स्पष्ट आदेश के बावजूद एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी कप्तानगंज पुलिस ने मुकदमा पंजीकृत करने की जहमत नहीं उठाई है।

मौत का ‘मौत का कुआं’ बना चौखड़ा गांव
प्राप्त जानकारी और न्यायालय के आदेश के अनुसार, मामला कप्तानगंज उपकेंद्र के चौखड़ा गांव का है। वादी अशोक कुमार का आरोप है कि उनके गांव में 11,000 वोल्ट का हाईटेंशन तार गिर गया था। सूचना देने के बावजूद, विभाग के कनिष्ठ अभियंता (जेई) राजीताराम के निर्देश पर संविदाकर्मी लाइनमैन विशाल उर्फ बंटी और योगेंद्र मृतक को जबरन घटनास्थल पर ले गए। आरोप है कि बिना बिजली कटवाए उनसे तार हटवाने का दबाव बनाया गया, जिसके संपर्क में आते ही वृद्ध की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। यह पूरा मामला कप्तानगंज विद्युत उपकेंद्र के अंतर्गत आने वाले चौखड़ा गांव का है। वादी अशोक कुमार के अनुसार, उनके गांव में 11,000 वोल्ट की हाईटेंशन लाइन का तार टूटकर खेत में गिर गया था। इसकी सूचना विभाग के जेई राजीताराम को दी गई थी। आरोप है कि जेई के निर्देश पर संविदाकर्मी लाइनमैन विशाल उर्फ बंटी और योगेंद्र ने मृतक को जबरन घटनास्थल पर बुलाया। पीड़ित का आरोप है कि दोनों लाइनमैनों ने बिना बिजली आपूर्ति बंद कराए, वृद्ध व्यक्ति को जबरन तार हटाने पर मजबूर किया, जिसके संपर्क में आते ही बिजली का जोरदार झटका लगा और उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
न्यायालय ने मानी विभागीय लापरवाही
न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वयं संज्ञान लिया। न्यायिक जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि विभाग ने स्वयं स्वीकार किया है कि यह घातक दुर्घटना संविदाकर्मियों की लापरवाही से हुई और इसके लिए मृतक के परिवार को अनुग्रह राशि देने की स्वीकृति भी दी गई। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनता है। न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि बिजली विभाग के उपखंड अधिकारी ने स्वयं अपनी जांच (पत्रांक संख्या-423, दिनांक 06-11-2024) में यह स्वीकार किया है कि उक्त घातक दुर्घटना संविदाकर्मी विशाल और योगेंद्र की घोर लापरवाही का परिणाम है। विभाग ने मृतक के परिवार को 5,00,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की बात भी स्वीकार की है, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि गलती किसकी थी।
न्यायालय का आदेश और पुलिस की चुप्पी
न्यायालय ने तथ्यों का बारीकी से अवलोकन करने के बाद इसे संज्ञेय अपराध माना और 10 जून 2026 को कप्तानगंज थानाध्यक्ष को कड़े शब्दों में आदेश दिया कि मामले में सुसंगत धाराओं के तहत अभियोग पंजीकृत कर विवेचना सुनिश्चित की जाए और 7 दिनों के भीतर न्यायालय को रिपोर्ट दी जाए। किंतु, कानून के रक्षक ही अब कानून के भक्षक बनते नजर आ रहे हैं। आदेश की प्रति थाने पर पहुंचने के सात दिन बाद भी एफआईआर का न लिखा जाना, पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है:
- किसके दबाव में है पुलिस? क्या विद्युत विभाग के अधिकारियों का दबाव कप्तानगंज पुलिस को न्याय करने से रोक रहा है?
- न्यायालय की अवमानना क्यों? क्या एक स्थानीय थानाध्यक्ष का पद न्यायालय के आदेश से ऊपर हो गया है?
न्याय के लिए दर-दर भटक रहा पीड़ित परिवार
एक तरफ पीड़ित परिवार अपने पिता को खोने का गम झेल रहा है, तो दूसरी तरफ पुलिस की टालमटोल की नीति ने उन्हें न्याय के लिए दर-दर भटकने पर मजबूर कर दिया है। यदि सीजेएम कोर्ट के आदेश का सम्मान नहीं हो रहा है, तो आम नागरिक आखिर किससे न्याय की उम्मीद करे? सीजेएम कोर्ट ने 10 जून 2026 को कप्तानगंज थानाध्यक्ष को निर्देशित किया था कि वे सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर 7 दिनों के भीतर न्यायालय को सूचित करें। लेकिन एक सप्ताह का समय बीत जाने के बाद भी पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली ने पीड़ित परिवार को फिर से न्याय के लिए दर-दर भटकने पर मजबूर कर दिया है।
आखिर पुलिस किसके दबाव में है? क्या न्यायलय के आदेशों का पालन कराना पुलिस की प्राथमिकता नहीं है? अब देखना यह होगा कि वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में संज्ञान लेते हैं या फिर पीड़ित परिवार को न्याय के लिए और लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
अब बस्ती के पुलिस प्रशासन को यह तय करना होगा कि वे दोषियों को बचाने में अपनी ऊर्जा खर्च करेंगे या फिर न्यायालय के आदेश का पालन कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाएंगे। क्या पुलिस अधीक्षक, बस्ती इस मामले में संज्ञान लेकर कप्तानगंज पुलिस की संवेदनहीनता पर कोई कार्रवाई करेंगे?












