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अविभाजित बिहार क्रिकेट टीम के रणजी ट्रॉफी में पदार्पण पर एक नजर

बिहार क्रिकेट संघ ने 1936-37 सत्र में घरेलू क्रिकेट में कलकत्ता के रेंजर्स मैंदान में बंगाल के खिलाफ तीन दिवसीय प्रथम श्रेणी क्रिकेट प्रतियोगिता रणजी ट्रॉफी में वर्ष 1936 दिसंबर 19 को पदार्पण किया था।बिहार के पहले कप्तान के एडी नौरोजी थे।बिहार ने पहले बल्लेबाजी करते हुए पहली पारी में पहले दिन 113 रनों पर सिमट गई थी। बिहार के लिए सलामी बल्लेबाज बिजाॅय सेन ने 28 रनों की पारी खेली थी।बंगाल के लिए दत्त ने 5 विकेट लिए थे। बंगाल ने पहली पारी में केवल 89 रन बनाए थे।बंगाल के लिए के भट्टाचार्य ने 18 रनों की पारी खेली थी।बिहार के लिए दासगुप्तपा ने 6 विकेट लिए थे।पहली पारी  में बिहार को 24 रनों की बढ़त मिली थी।दूसरी पारी में बिहार 127 रनों पर सिमट गयी थी।दूसरी पारी में बिहार के लिए बी सेन व ए चौधरी ने 24 रनों की पारी खेली थी।बंगाल के लिए दूसरी पारी में बेरहेंड ने 5 विकेट लिए थे।152 रनों का लक्ष्य बंगाल ने दो विकेट के नुकसान पर हासिल कर लिए थे।बंगाल के लिए दूसरी पारी में के भट्टाचार्य ने 53 नाबाद व जी बोस ने नाबाद 60 रनों की शानदार पारी खेली थी।बिहार के लिए दूसरी पारी में चक्रवर्ती ने एक सफलता हासिल किया था।इस तरीके से अपने रणजी ट्रॉफी पदार्पण मैंच में बिहार 8 विकेटो से पराजित हुयी थी।20240708 172402 हालांकि तीन दिवसीय यह मैंच दो दिनों में ही खत्म हो गया था।इस मैंच में दो अर्धशतकीय पारी बंगाल के बल्लेबाजों के द्वारा खेली गयी थी तो बिहार के एक गेंदबाज के द्वारा एक पारी में 5 से अधिक विकेट लिया गया तो बंगाल के दो गेंदबाजों ने एक पारी में 5 विकेट हासिल किए थे।इस मैंच में बंगाल के गेंदबाज दत्त ने कुल 9 विकेट व बेहरेंड ने कुल 8 विकेट लिए थे।बिहार के लिए इस मैंच में 8 व बंगाल के लिए 2 खिलाडियों ने पदार्पण किया था।

GOPAL MISHRA (GOPESH)). BEGUSARAI BIHAR

क्रिकेट विश्लेषक,खेल जर्नलिस्ट,क्रिकेट प्रशिक्षक,क्रिकेट सलाहकार, क्रिकेट अंपायर,पर्यावरण प्रेमी।मेहनत,धैर्य की सीमा से परे अद्भुत,इंसान। ##खेल ही जीवन है जीवन ही खेल है। वर्तमान समय में एक खेल ही ऐसा विकल्प है जिसके माध्यम से हम बेहतर व्यक्तित्व व समाज का निर्माण कर सकते हैं।
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