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नाइजीरिया में इस्लामिक आतंकियों का खूनी खेल: 62,000 से अधिक ईसाइयों का नरसंहार, लेकिन दुनिया खामोश!

जहाँ एक ओर भारत में जिहादी हमलों पर वैश्विक मीडिया और सोशल मीडिया पर आक्रोश दिखाई दे रहा है,

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नाइजीरिया में इस्लामिक आतंकियों का खूनी खेल: 62,000 से अधिक ईसाइयों का नरसंहार, लेकिन दुनिया खामोश!

 

अबुजा/नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2025:

जहाँ एक ओर भारत में जिहादी हमलों पर वैश्विक मीडिया और सोशल मीडिया पर आक्रोश दिखाई दे रहा है, वहीं अफ्रीकी देश नाइजीरिया में ईसाई समुदाय के नरसंहार पर दुनिया हैरान करने वाली चुप्पी साधे बैठी है।

 

मुस्लिम फुलानी चरमपंथी समूह द्वारा ईसाइयों के खिलाफ जारी नरसंहार अब भयानक रूप ले चुका है। Genocide Watch की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2000 से अब तक 62,000 से अधिक ईसाइयों की निर्मम हत्या की जा चुकी है। मार्च-अप्रैल 2025 में ही 126 निर्दोष लोगों का कत्लेआम हुआ, जिनमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं।

 

 


 

मार्च-अप्रैल 2025 की घटनाओं का वीभत्स विवरण:

 

27 मार्च: Plateau राज्य के रुवि गाँव में अंतिम यात्रा में जुटे 12 लोगों की निर्मम हत्या, एक 19 वर्षीय महिला का सामूहिक बलात्कार।

 

2 अप्रैल: बोक्कोस इलाके के 15 गांवों पर एक साथ हमला, 56 नागरिक मारे गए, 5000 से अधिक लोग बेघर।

 

6 अप्रैल: डबवाम व फविल समुदायों में हमले, कई लोग मारे गए और घायल हुए।

 

10-13 अप्रैल: विभिन्न समुदायों में सिलसिलेवार हमले, फसलों की तबाही, हजारों नागरिकों का विस्थापन।

 

13 अप्रैल: किमाकपा गांव पर बड़ा हमला, 56 लोगों की हत्या, जिनमें 15 मासूम बच्चे शामिल।

 

 

 


 

हत्याओं का पैटर्न और अमानवीयता:

 

इन नरसंहारों की सबसे भयावह बात यह है कि अधिकांश हत्याएँ कुल्हाड़ी से गला काटकर की गईं।

एक सात वर्षीय बालक, नेनचे स्टीवेन, जिसे आतंकियों ने कुल्हाड़ी से गला रेतकर मारने का प्रयास किया, किसी तरह बच गया। उसके पिता की हत्या कर दी गई, माँ के हाथ काट दिए गए और भाई-बहनों को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया।

 

 


 

सुरक्षा बलों की निष्क्रियता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी:

 

Plateau राज्य में तैनात नाइजीरियन शांति सेना के बावजूद हमलों पर कोई नियंत्रण नहीं हुआ।

 

Christian Solidarity International के अध्यक्ष डॉ. जॉन ऐबनेर के अनुसार, इतने व्यापक नरसंहार के बावजूद कोई प्रभावी सरकारी हस्तक्षेप या गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

 

संयुक्त राष्ट्र (UN) और वैश्विक मीडिया की इस भयानक त्रासदी पर चुप्पी ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को आक्रोशित कर दिया है।

 

 

 


 

भूमि कब्जे के पीछे छुपा मजहबी आतंक:

 

विशेषज्ञों का मानना है कि मुस्लिम फुलानी समूह लंबे समय से ईसाई किसानों की ज़मीनें हड़पने के लिए इस तरह के हमले कर रहे हैं। जमीन के विवाद को एक सुनियोजित मजहबी संघर्ष में बदल दिया गया है।

 

फ्रांस 24 की रिपोर्ट भी पुष्टि करती है कि बेनुए राज्य में भी हाल ही में 56 लोगों की हत्या कर दी गई थी। अप्रैल महीने में अकेले 100 से अधिक ईसाइयों की जान ले ली गई।

 

 


 

जागो दुनिया, अब और कब तक?

 

“62,000 से अधिक निर्दोष ईसाई मारे गए, फिर भी संयुक्त राष्ट्र से कोई निंदा प्रस्ताव नहीं?

क्या अफ्रीका के ईसाई मानवाधिकारों के दायरे से बाहर हैं?”

— मानवाधिकार कार्यकर्ता

 

 

 

आश्चर्य की बात यह है कि नाइजीरिया में इतने बड़े पैमाने पर हो रहे नरसंहार पर न तो संयुक्त राष्ट्र ने कोई आपात बैठक बुलाई है, न ही वैश्विक मीडिया ने इसे प्रमुखता से उठाया है।

 

जब भारत या पश्चिमी देशों में आतंकी घटनाएँ होती हैं तो तुरंत निंदा प्रस्ताव और कार्रवाई की मांग उठती है। फिर नाइजीरिया के ईसाइयों के खून की कीमत इतनी सस्ती क्यों?

 

 


 

अंतिम सवाल:

 

क्या अब भी दुनिया इन मासूम आवाजों को अनसुना करती रहेगी?

या फिर अब समय आ गया है कि नरसंहार के खिलाफ एकजुट होकर आवाज बुलंद की जाए?

 

 


 

रिपोर्ट: एलिक सिंह

संपादक – वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज़

📞 8217554083

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